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‘सारंगी’ नाटक से संदेश, लोक गायन कमाई का जरिया नहीं

Thu, 23 Feb 2017 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 23 Feb 2017 12:51 AM IST
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Tagore Theatre, chandigarh event,  sector 18, sarangi
पंजाब कला भवन में ‘सारंगी’ नाटक से दिया संदेश - फोटो : अमर उजाला
पंजाब कला भवन में बुधवार से थिएटर फेस्टिवल की शुरुआत हुई। इसका आयोजन डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स एंड पब्लिक रिलेशन, हरियाणा और पंजाब आर्ट्स कांउसिल, रूपक कला वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से किया जा रहा है। फेस्टिवल के पहले दिन नाट्यम द थिएटर ग्रुप के कलाकाराें की ओर से ‘सारंगी’ नाटक का मंचन किया गया। इसके लेखक गुरमीत और निर्देशक कीर्ति कृपाल रहे।   
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नाटक में दिखाया गया कि एक पीरू नाम का व्यक्ति है जोकि कार्यक्रमाें में सांरगी बजाते हुए वीराें और महान व्यक्तियाें की गाथाएं सुनाता है। उसके दो बेटे है, इनमें एक चरणी है जोकि कॉलेज में स्टूडेंट प्रधान है और अपने पिता पर ही गया है। वहीं दूसरा बेटा कादरी है जिसके विचार ही अलग होते हैं। 
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एक दिन मेले में पीरू अपनी सारंगी लेकर पहुंचता है तो वहां पहले से उपस्थित बगेर सिंह उससे कहता है वह लोगों की फरमाइश को छोड़कर मेरे गाए गीत पर प्रस्तुति दे। वह उसकी यह बात नहीं मानता है, क्याेंकि पीरू के लिए लोक गायन कमाई का जरिया नहीं है, वह हमेशा से लोगाें के लिए ही गाता और बजाता रहा है। इस बात से नाराज होकर बगेर सिंह झूठा आरोप लगाकर पीरू को पकड़वा देता है, लेकिन लोग ईमानदार पीरू के लिए आंदोलन कर देते है और आखिरी में पुलिस को पीरू को छोड़ना पड़ता है। इसी दौरान पीरू का बड़ा बेटा चरणी स्टूडेंट्स की कलह में दम तोड़ देता है। जिसके सदमे से पीरू बीमार पड़ जाता है।
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इसी दौरान एक कार्यक्रम का न्यौता आता है तो दूसरा बेटा कादरी पिता से कहता है आज आपकी जगह मैं जाउंगा और कार्यक्रम पेश करूंगा। पिता मना करता है, लेकिन वह अपने दो आदमियाें को लेकर कार्यक्रम में चला जाता है। वहीं एक बार फि र से बगेर सिंह वहां होता है और वह कादरी को पैसे देकर अपनी पंसद के गाने गाने को कहता है। पैसे देखकर कादरी लोगाें की पसंद छोड़कर बगेर सिंह की फरमाइश पर कार्यक्रम पेश करता है।


शाम तक वह ढेर सा पैसा लेकर घर पहुंचता है और पिता को कहता है कि देखाें, मैने कितना पैसा किस तरह से कमाया है। यह बात जानकर पिता पीरू को काफी दुख पहुंचता है और वह दम तोड़ देता हैं। इसका कादरी को गहरा दुख होता हैं और वह मन ही मन अपने आप को कोसने लगता है। उसके पिता ने हमेशा से लोक गायकी की और उसने पैसे के लिए फरमाइश पर कार्यक्रम क्याें पेश किया। कुछ दिनाें बाद फि र से एक कार्यक्रम होता है और बगेेर सिंह फिर से अपनी पसंद का गाना बोलने को कहता है। इस बार कादरी नकार देता है और अपने पिता को याद करते हुए लोक गायकी पेश करता हैं।
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