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नाटक ‘देसी’ के मंचन से बताया गया सामाजिक समझ का महत्व
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Feb 2017 12:34 AM IST
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पंजाबी नाटक ‘देसी’ का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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सरघी कला केंद्र मोहाली और संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के सहयोग से सोमवार को पंजाबी नाटक ‘देसी’ का मंचन सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में किया गया। यह नाटक प्रसिद्ध लेखक निकॉस कजानजाकी शाह की प्ररेणा है। इसका लेखन और निर्देशन संजीवन सिंह ने किया। नाटक में बताया गया कि जरूरी नही किताबाें के जरिए मिला ज्ञान ही सबकुछ होता है, कई बार तजुर्बे और ग्रास रूट से मिली जानकारी भी सबपर भारी पड़ सकती हैं।
नाटक की शुरुआत एक चाय के ढाबे से होती है, जिसमें एक व्यक्ति जो पढ़ा लिखा होता है, एक अनपढ़ आदमी से मिलता है जो नाटक में मुख्य किरदार निभा रहा ‘देसी’ होता है। इस दौरान देसी अपनी कई बातें समझदार व्यक्ति को बताता है जिससे वह काफी प्रभावित होता है और उसे अपने साथ लेकर चल पड़ता है। एक दिन वह किसी गांव में होते हैं तो समझदार व्यक्ति कहता है कि यार कुछ दिनाें बाद बहुत ज्यादा बारिश होने वाली है मैने यह जानकारी नेट के जरिए देखी है। इस बात पर देसी आदमी आसमान की ओर देखने के कुछ देर बाद कहता है कि बारिश कुछ दिनों बाद नही आज रात को ही आने वाली है। इस पर समझदार व्यक्ति कहता है तुम गलत कह रहे हो। तुम्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस पर देसी उसे कहता है कि ठीक है मैं पढ़ा लिखा नही हूं लेकिन तजुर्बा भी कुछ होता है।
इसी तरह जब रात होती है तो एकाएक जोर से बारिश होने लगती है। इस पर समझदार व्यक्ति हैरान रह जाता है और मान लेता है कि किताबी ज्ञान के साथ साथ सामाजिक समझ और तजुर्बा भी इंसान के पास होना चाहिए। नाटक में देसी का किरदार मनी सब्रवाल और समझदार व्यक्ति का किरदार गुर फतह सिंह ने निभाया।
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नाटक की शुरुआत एक चाय के ढाबे से होती है, जिसमें एक व्यक्ति जो पढ़ा लिखा होता है, एक अनपढ़ आदमी से मिलता है जो नाटक में मुख्य किरदार निभा रहा ‘देसी’ होता है। इस दौरान देसी अपनी कई बातें समझदार व्यक्ति को बताता है जिससे वह काफी प्रभावित होता है और उसे अपने साथ लेकर चल पड़ता है। एक दिन वह किसी गांव में होते हैं तो समझदार व्यक्ति कहता है कि यार कुछ दिनाें बाद बहुत ज्यादा बारिश होने वाली है मैने यह जानकारी नेट के जरिए देखी है। इस बात पर देसी आदमी आसमान की ओर देखने के कुछ देर बाद कहता है कि बारिश कुछ दिनों बाद नही आज रात को ही आने वाली है। इस पर समझदार व्यक्ति कहता है तुम गलत कह रहे हो। तुम्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस पर देसी उसे कहता है कि ठीक है मैं पढ़ा लिखा नही हूं लेकिन तजुर्बा भी कुछ होता है।
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इसी तरह जब रात होती है तो एकाएक जोर से बारिश होने लगती है। इस पर समझदार व्यक्ति हैरान रह जाता है और मान लेता है कि किताबी ज्ञान के साथ साथ सामाजिक समझ और तजुर्बा भी इंसान के पास होना चाहिए। नाटक में देसी का किरदार मनी सब्रवाल और समझदार व्यक्ति का किरदार गुर फतह सिंह ने निभाया।
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