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मौका न गवाएं, इंग्लैंड के बाद चंडीगढ़ में नाटक ‘मन्न मिट्टी’ का मंचन

Sun, 13 Nov 2016 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 13 Nov 2016 10:41 PM IST
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Tagore Theatre, chandigarh event, mann mitti
चंडीगढ़ में नाटक ‘मन्न मिट्टी’ का मंचन - फोटो : अमर उजाला
‘सब तो खतरनाक हुंदा है साडे सुपनियां दा मर जाणा।’ औरत हो या मर्द सबको सपने देखने का अधिकार है, इसलिए जिंदगी में अगर कभी कठिन समय आ भी जाए तो इंसान को कभी भी हार नहीं माननी चाहिए बल्कि आगे बढ़ते रहना चाहिए। 
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कुछ ऐसा ही दिखाया गया है अनीता शब्दीश के सोलो नाटक ‘मन्न मिट्टी’ में। जिसका मंचन रविवार को टैगोर थिएटर में चल रहे 13वें गुरशरन सिंह नाट उत्सव के तीसरे दिन हुआ। सुचेतक रंगमंच थिएटर के डायरेक्टर शब्दीश ने नाटक का निर्देशन किया।
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 नाटक के बारे में अनीता शब्दीश ने बताया कि चंडीगढ़ में पहली बार इस नाटक का मंचन किया जा रहा है। इससे पहले चार बार इसका मंचन इंग्लैंड में हो चुका है। नाटक को शब्दीश ने लिखा है। नाटक में रेप पीड़ित चार औरतों की कहानी है। इसमें वर्जिनिया वूल्फ से लेक मुखतारन माई तक  का वर्णन है। सत्य घटनाओं पर आधारित यह नाटक मर्दों द्वारा औरतों पर किए जाने वाले अत्याचारों पर व्यंग्य करता है। 
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अनीता शब्दीश ने सोलो परफार्मेंस के जरिए मर्द जाति पर कसा तंज

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चंडीगढ़ में नाटक ‘मन्न मिट्टी’ का मंचन
नाटक की शुरुआत 2013 में दिल्ली में हुए निर्भया कांड के  खिलाफ रोष प्रदर्शन से होती है। तब एक लेखिका मंच पर आती है और समाज से सवाल करती है कि आदमी और औरत दोनों धरती पर इकठ्टे आए तो फिर आदमियों की तुलना में औरत के हाथ कलम बहुत देर बाद क्यों आई? औरतों की भावनाओं को आदमियों ने ही लिखा।

फिर लेखिका इतिहास के उन पन्नों को खंगालती है और सवाल करती है कि आखिर कब तक एक औरत को इन हालात से जूझना पड़ेगा? फिर एक 10 साल की बच्ची का केस आता है जिससे उसका पिता और दादा बलात्कार करते हैं। बच्ची जब बड़ी होती है तो उन दोनों का मर्डर कर अपनी नानी के  घर आ जाती है। इस तरह हालात उसे कातिल बना देते हैं। नाटक की पहली कहानी में जहां एक औरत का उदास चेहरा दिखाया गया वही दूसरी कहानी में उसका विद्रोही रूप दिखाया गया है।

जिसमें वह अपने पति केअत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाती है। वहीं तीसरी कहानी में एक लेखिका का सीन दिखाया जाता है जिसका दोस्त उसके साथ  रेप करता है। वह इस स्थिति में पहुंच जाती है कि अत्महत्या करने के बारे में सोचने लग जाती है। उस समय वो मुखतारन माई के बारे में पढ़ रही होती है और उससे प्रेरणा लेकर वह सुसाइड का विचार छोड़ देती है, और जिंदगी में आगे बढ़ती है। 

  अनीता शब्दीश बताती है कि मेरी यह दिली तमन्ना है कि इस नाटक को मैं हर कॉलेज, स्कूल और जगह पर खेलों ताकि लड़कियां अपने साथ हुए दुष्कर्म के खिलाफ लड़ें और आत्महत्या का रास्ता न अपनाएं।
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