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एसवाईएल नहर विवाद पर सीएम बोले, न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 11 Mar 2016 03:47 PM IST
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प्रकाश सिंह बादल, पंजाब सीएम
- फोटो : file photo
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पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सदन में एलान किया है कि एसवाईएल नहर तो बननी ही नहीं है। सरकार इस मामले में कानूनी राय ले रही है। एसवाईएल के लिए एक्वायर की गई जमीन को डी-एक्वायर कर फिर किसानों को दिया जाएगा। इसी के साथ विपक्ष की गैर-मौजूदगी में सरकार ने पानी केमुद्दे पर प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिया।
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प्रस्ताव पेश करते हुए सीएम बादल ने कहा कि सदन में आज जो कुछ हुआ, उसका उन्हें अफसोस है। वह कई बार सत्तापक्ष और विपक्ष में बैठे, लेकिन आज विपक्ष ने जैसे बड़ी जिद की, न स्पीकर की सुनी न हमारी। पानी हमारी जिंदगी है, इस पर खेती निर्भर है और खेती पर उद्योग-व्यापार। वाणी में भी पानी को पिता का दर्जा दिया गया है।
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पंजाब केइतने योगदान के बाद भी पानी के मुद्दे पर सूबे के साथ पक्षपात हुआ। सबसे पहले 1955 में केंद्रीय सिंचाई मंत्री गुलजारी लाल नंदा ने पंजाब, राजस्थान, जेएंडके के सिंचाई मंत्री को बुलाकर 15.85 एमएएफ पानी में से आठ एमएएफ राजस्थान को देने का फतवा दिया। इससे पहले आजादी के बाद इंडस वाटर ट्रीटी में पाकिस्तान को 136 एमएएफ और पंजाब को सिर्फ 34 एमएएफ पानी मिला था। फिर 1966 के पंजाब री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट के तहत 3.5 एमएएफ पानी हरियाणा को दे दिया गया।
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इसके लिए 1956 में बने इंटर-स्टेट रिवर वाटर डिस्प्यूट एक्ट को भी दरकिनार कर दिया गया। 1981 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के सीएम को बुलाकर एसवाईएल नहर बनाने का फैसला कर लिया, लेकिन इससे पहले ही पंजाब व हरियाणा के बीच सरगर्मियां शुरू हो चुकी थीं। बादल ने तत्कालीन सीएम जैल सिंह की ओर से हरियाणा के सीएम बनारसी दास गुप्ता को एसवाईएल के संबंध में लिखे पत्रों की कॉपी सदन में पेश की। जैल सिंह की ओर से पहली बार एसवाईएल की प्रशासनिक मंजूरी संबंधी आदेश की कॉपी भी पेश की। बादल ने उस आरोप को भी नकारा कि उन्होंने एसवाईएल के लिए देवीलाल से एक करोड़ का चेक लिया था।
बादल ने कहा कि वह री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट के सेक्शन 78 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन 1982 में तत्कालीन सीएम दरबारा सिंह ने वह याचिका वापस ले ली। उसकेबाद इंदिरा ने कपूरी गांव में नहर निर्माण का उद्घाटन किया तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसका स्वागत किया, लेकिन अकालियों ने इसकेखिलाफ मोर्चा शुरू किया। हरियाणा फिर सुप्रीम कोर्ट चला गया। ये कहते हैं कि कैप्टन टर्मिनेशन एक्ट लाए। सच यह है कि इन्होंने माना कि पहले लिए फैसले गलत थे।
यह एक्ट कांग्रेस का इकबालिया जुर्म है। इस बारे में पहले जितने भी फैसले या समझौते हुए, सब कांग्रेस ने किए। बादल ने कहा कि पंजाब के पास एक बूंद अतिरिक्त पानी नहीं, एसवाईएल पर उनका स्टैंड साफ है। वह सदन में एलान करते हैं कि पंजाब केपानी की रखवाली के लिए बड़ी कुर्बानी से गुरेज नहीं करेंगे, अपने खून का आखिरी कतरा तक बहा देंगे। कानूनी माहिरों से राय ली जा रही है, एसवाईएल की जमीन डी-एक्वायर कर किसानों को दी जाएगी। नदियों के पानी की एक बूंद पर भी बेइंसाफी बर्दाश्त नहीं करेंगे।