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चंडीगढ़ में अब हर वार्ड में होगी स्वच्छता प्रतियोगिता, प्रशासन देगा नंबर, मिलेगा सर्वश्रेष्ण का पुरस्कार
Thu, 01 Oct 2020 02:54 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 01 Oct 2020 02:54 PM IST
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Chandigarh The City Beautiful
- फोटो : social media
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चंडीगढ़ नगर निगम दो अक्तूबर से हर वार्ड में स्वच्छता प्रतियोगिता शुरू करने जा रहा है। यह प्रतियोगिता फरवरी माह तक चलेगी। प्रशासन की एक टीम हर माह वार्ड को अंक देगी। अंत में जिस वार्ड के नंबर सबसे ज्यादा होंगे, उसे पुरस्कृत किया जाएगा। नगर निगम यह उपाय स्वच्छता श्रेणी में सुधार के लिए अपना रहा है।
संयुक्त आयुक्त सौरभ अरोड़ा ने बताया कि इस बार स्वच्छता श्रेणी में बेहतर स्थान के लिए प्रयास जारी है। दो अक्तूबर से एक योजना तैयार की है। शहर के 26 वार्ड में स्वच्छ वार्ड प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इसमें सूखा-गीला कचरा अलग-अलग करने से लेकर उसके निस्तारण की प्रक्रिया को देखा जाएगा।
प्रशासन की ओर से गठित एक टीम हर माह वार्ड का निरीक्षण करेगी और कचरे की स्थिति देखेगी। उसके आधार पर वार्ड को नंबर दिए जाएंगे। चूंकि स्वच्छता सर्वेक्षण भी अक्तूबर से फरवरी माह तक चलता है, इसलिए इस प्रतियोगिता के माध्यम से श्रेणी में भी सुधार का प्रयास रहेगा। फरवरी में सभी माह के नंबर जोड़ने के बाद सर्वश्रेष्ठ वार्ड को पुरस्कार दिया जाएगा।
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संयुक्त आयुक्त सौरभ अरोड़ा ने बताया कि इस बार स्वच्छता श्रेणी में बेहतर स्थान के लिए प्रयास जारी है। दो अक्तूबर से एक योजना तैयार की है। शहर के 26 वार्ड में स्वच्छ वार्ड प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इसमें सूखा-गीला कचरा अलग-अलग करने से लेकर उसके निस्तारण की प्रक्रिया को देखा जाएगा।
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प्रशासन की ओर से गठित एक टीम हर माह वार्ड का निरीक्षण करेगी और कचरे की स्थिति देखेगी। उसके आधार पर वार्ड को नंबर दिए जाएंगे। चूंकि स्वच्छता सर्वेक्षण भी अक्तूबर से फरवरी माह तक चलता है, इसलिए इस प्रतियोगिता के माध्यम से श्रेणी में भी सुधार का प्रयास रहेगा। फरवरी में सभी माह के नंबर जोड़ने के बाद सर्वश्रेष्ठ वार्ड को पुरस्कार दिया जाएगा।
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एक हजार नंबर के होंगे 15 मानक
संयुक्त आयुक्त ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 15 मानक तय किए गए हैं। जो 2 अक्तूबर को नगर निगम की वेबसाइट पर भी डाल दिए जाएंगे। इन मानकों पर एक हजार नंबर दिए जाएंगे। यह मानक भी स्वच्छता सर्वेक्षण के आधार पर ही तय किए गए हैं।
जरूरतमंद लोगों के लिए शुरू होगी स्वच्छता सवारी
नगर निगम दो अक्तूबर से शहर में स्वच्छता सवारी नाम से एक गाड़ी भी चलाएगा, जिसमें लोग अपने पुराने कपड़े, जूते व अन्य सामान जो कि किसी जरूरतमंद के काम आ सकते हैं, दे सकेंगे। इस सवारी को तीन मानको नवीनीकरण, फिर से नवीनीकरण, फिर से उपयोग के आधार पर शुरू किया जा रहा है। इससे लोग जरूरतमंदों की सहायता कर सकें।
साल दर साल गिरता जा रहा प्रदर्शन
वर्ष 2017 में स्वच्छता रैंकिंग में शहर को 11वां स्थान मिला था। उसके बाद लोगों के साथ मिलकर अधिकारियों ने मेहनत की, जिसकी बदौलत अगले वर्ष 2018 में स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर में तीसरे नंबर पर आ गया, लेकिन उसके बाद शहर का प्रदर्शन लगातार गिरता गया। वर्ष 2019 में शहर फिसलकर 20वें पायदान पर पहुंच गया। जब लोगों ने पार्षदों व अधिकारियों को निशाने पर लिया तो सभी ने बेहतर रैंकिंग का भरोसा दिलाया, लेकिन तब भी 16वीं श्रेणी मिली थी।
जरूरतमंद लोगों के लिए शुरू होगी स्वच्छता सवारी
नगर निगम दो अक्तूबर से शहर में स्वच्छता सवारी नाम से एक गाड़ी भी चलाएगा, जिसमें लोग अपने पुराने कपड़े, जूते व अन्य सामान जो कि किसी जरूरतमंद के काम आ सकते हैं, दे सकेंगे। इस सवारी को तीन मानको नवीनीकरण, फिर से नवीनीकरण, फिर से उपयोग के आधार पर शुरू किया जा रहा है। इससे लोग जरूरतमंदों की सहायता कर सकें।
साल दर साल गिरता जा रहा प्रदर्शन
वर्ष 2017 में स्वच्छता रैंकिंग में शहर को 11वां स्थान मिला था। उसके बाद लोगों के साथ मिलकर अधिकारियों ने मेहनत की, जिसकी बदौलत अगले वर्ष 2018 में स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर में तीसरे नंबर पर आ गया, लेकिन उसके बाद शहर का प्रदर्शन लगातार गिरता गया। वर्ष 2019 में शहर फिसलकर 20वें पायदान पर पहुंच गया। जब लोगों ने पार्षदों व अधिकारियों को निशाने पर लिया तो सभी ने बेहतर रैंकिंग का भरोसा दिलाया, लेकिन तब भी 16वीं श्रेणी मिली थी।
सफाई पर हर साल करोड़ों होते हैं खर्च
सफाई व्यवस्था पर नगर निगम हर साल करोड़ों खर्च करता है। सेक्टर एक से लेकर सेक्टर-30 तक निगम निगम ने खुद ही सफाई की कमान संभाल रखी है, वहीं दक्षिण के सेक्टरों में लायंस कंपनी को सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लायंस कंपनी को हर माह चार करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। वहीं, अपने कर्मचारियों पर भी निगम करोड़ों खर्च करता है।
एनजीटी की ओर से लगातार मिल रही फटकार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से निगम को लगातार फटकार लगाई जा रही है। फरवरी माह में एनजीटी ने कहा था कि निगम ने जल्द से जल्द अलग-अलग कचरा लेने के साथ उसका निस्तारण करना शुरू नहीं किया तो एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, कोरोना ने निगम को बचा लिया। कचरा अलग-अलग भी निगम के लिए बड़ी चुनौती है।
हमारा प्रयास है इस बार शहर स्वच्छता श्रेणी में बेहतर पायदान पर पहुंचाएं। इसलिए हम अभी से प्रयास शुरू कर रहे हैं।
- सौरभ अरोड़ा, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम
एनजीटी की ओर से लगातार मिल रही फटकार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से निगम को लगातार फटकार लगाई जा रही है। फरवरी माह में एनजीटी ने कहा था कि निगम ने जल्द से जल्द अलग-अलग कचरा लेने के साथ उसका निस्तारण करना शुरू नहीं किया तो एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, कोरोना ने निगम को बचा लिया। कचरा अलग-अलग भी निगम के लिए बड़ी चुनौती है।
हमारा प्रयास है इस बार शहर स्वच्छता श्रेणी में बेहतर पायदान पर पहुंचाएं। इसलिए हम अभी से प्रयास शुरू कर रहे हैं।
- सौरभ अरोड़ा, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम