स्वच्छ सर्वेक्षण 2020: स्वच्छता रैंकिंग में मामूली सुधार... देश में 16वें नंबर पर रहा चंडीगढ़
- पिछले साल 20वें पायदान पर रहा था, 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों में मिला आठवां स्थान
- वर्ष 2019-20 के परिणाम जारी, इस बार भी टॉप टेन में जगह नहीं बना सका चंडीगढ़
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विस्तार
स्वच्छता रैंकिंग 2019-20 के परिणाम गुरुवार को जारी कर दिए गए। चंडीगढ़ इस बार भी टॉप टेन में जगह नहीं बना सका। मामूली सुधार के साथ सिटी ब्यूटीफुल देश में 16वें पायदान पर रहा। पिछले वर्ष चंडीगढ़ 20वें पायदान पर था। वहीं, 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों में चंडीगढ़ को आठवां स्थान मिला है।
हर साल सफाई पर करोड़ों रुपये फूंकने के बावजूद नगर निगम ने पिछली बार की तुलना में इस बार केवल चार पायदान की छलांग लगाई है। सिटी ब्यूटीफुल के लिए यह रैंकिंग किसी भी मायने से ठीक नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि रैंकिंग में गिरावट का कारण गीला-सूखा कचरा अलग-अलग न लेना व शहर से निकलने वाले कचरे को पूरी तरह प्रोसेस न कर पाना है। चंडीगढ़ को 6 हजार में से 4970 अंक मिले हैं। अब निगम के अधिकारी फिर से इस मंथन में लग गए हैं कि कैसे शहर को अगली स्वच्छता रैंकिंग में टॉप 10 में लाया जाए।
पहले दो चरण में ही पिछड़ गया था चंडीगढ़
वर्ष 2019-2020 की पहली तिमाही में चंडीगढ़ को 11वां स्थान मिला था। उस समय अधिकारियों को उम्मीद थी कि इस बार टॉप 10 में स्थान बना लिया जाएगा। दूसरी तिमाही में शहर फिसलकर और नीचे 27वीं रैंक पर चला गया था। उसके बाद काफी किरकिरी हुई। अधिकारियों ने तीसरे व चौथे चरण के लिए काफी प्रयास किया लेकिन शहर टॉप 10 में नहीं आ सका।
बेहतर सेवा देने में पिछड़ा नगर निगम
रैंकिंग में सबसे कम नंबर निगम को लोगों तक दी जाने वाली सेवा में मिले हैं। लोगों को दी जा रही सेवाओं के आधार पर निगम को 1500 में से 1144.99 नंबर ही मिले हैं। इसके अलावा सर्टिफिकेशन स्कोर में ओडीएफ प्लस प्लस व थ्री स्टार रैंकिंग को मिलाकर 1500 में से 1100 नंबर मिले हैं। दिल्ली से आई टीम ने अधिकारियों को बिना बताए सर्वे किया, जिसमें निगम को 1500 में से 1452.76 अंक मिले।
निगम के सर्वे को मिले 1272.32 अंक
निगम की ओर से कराए गए सर्वे के फीडबैक को फिर से चेक किया गया तो उसमें 1500 में से 1272.32 अंक निगम को मिले। इसमें निगम ने फील्ड में जाकर लोगों से बातचीत के आधार पर सर्वे किया। जहां निगम को 880 में से 832 अंक मिले। वहीं अन्य सूत्रों से सर्वे में निगम को 220 में से 206.71 अंक मिले। इसके अलावा स्वच्छ भारत एप से सर्वे में निगम को 400 में से 233.61 अंक मिले हैं।
सफाई में शहर को पूरे 240 नंबर मिले
निगम को आवासीय व औद्योगिक क्षेत्र में सफाई के 240 व बस स्टैंड की सफाई के पूरे 150 नंबर मिले हैं। हालांकि कचरे के निस्तारण व समाप्त करने में 700 में से 409.90 अंक मिले हैं। हालांकि सब्जी मंडी व मीट मंडी की सफाई में निगम को 150 में से 123 अंक मिले हैं। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में सफाई के लिए निगम को 1500 में से 1452.76 अंक मिले हैं।
33785 लोगों ने ही दिया फीडबैक, फिर भी नंबर एक
इस पूरे सर्वेक्षण में शहर के लोगों की काफी अहम भूमिका होती है। वर्ष 2011 जनगणना के अनुसार, शहर की कुल जनसंख्या 1026459 है। पहले व दूसरे चरण के बाद अधिकारियों ने लोगों को काफी जागरूक किया ताकि लोग अपने शहर के बारे में बेहतर ऑनलाइन फीडबैक दे सकें लेकिन केवल 33785 लोगों ने ही ऑनलाइन फीडबैक दर्ज कराया। बावजूद इसके निगम को फीडबैक देने में सर्वश्रेष्ठ केंद्र शासित प्रदेश का अवॉर्ड मिला है। वहीं जिन शहरों की बेहतर रैंकिंग है, उनके निवासियों ने ज्यादा से ज्यादा फीडबैक दिया है।
साल दर साल गिरता जा रहा प्रदर्शन
वर्ष 2017 में स्वच्छता रैंकिंग में शहर को 11वां स्थान मिला था। उसके बाद लोगों के साथ मिलकर अधिकारियों ने मेहनत की, जिसकी बदौलत अगले वर्ष 2018 में स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर में तीसरे नंबर पर आ गया। लेकिन उसके बाद शहर का प्रदर्शन लगातार गिरता गया। वर्ष 2019 में शहर फिसलकर 20वें पायदान पर पहुंच गया। जब लोगों ने पार्षदों व अधिकारियों को निशाने पर लिया तो सभी ने बेहतर रैंकिंग का भरोसा दिलाया लेकिन अब भी रैंकिंग 16वीं मिली है।
सफाई पर हर साल करोड़ों रुपये होते हैं खर्च
सफाई व्यवस्था पर नगर निगम हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है। सेक्टर एक से लेकर सेक्टर-30 तक निगम निगम ने खुद ही सफाई की कमान संभाल रखी है, वहीं दक्षिण के सेक्टरों में लॉयंस कंपनी को सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लॉयंस कंपनी को हर माह चार करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। वहीं अपने कर्मचारियों पर भी निगम करोड़ों रुपये खर्च करता है। फिर भी शहर का यह हाल है।
एनजीटी की ओर से लगातार मिल रही फटकार
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को देश में भले ही दूसरा स्थान मिल चुका हो लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से निगम को लगातार फटकार लगाई जा रही है। फरवरी माह में एनजीटी ने कहा था कि निगम ने जल्द से जल्द सेग्रीगेट कचरा लेने के साथ उसका निस्तारण करना शुरू नहीं किया तो एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि कोरोना ने निगम को बचा लिया लेकिन अब निगम ने कचरा निस्तारण नहीं किया तो जुर्माना लगना तय है।
जेपी ग्रुप से कचरे को अलग-अलग पर हुआ था विवाद
नगर निगम व जेपी ग्रुप में अलग-अलग कचरा देने को लेकर ही शुरू से विवाद चल रहा था। जेपी ग्रुप का कहना था कि निगम सूखा-गीला कचरा अलग-अलग करके नहीं दे रहा है। वहीं निगम का कहना था कि अनुबंध में ऐसा कोई जिक्र नहीं था। कचरे की गुणवत्ता देखने के लिए एनजीटी ने कमेटी तक बनाई थी। उसके बाद भी विवाद थमा नहीं था।
390 गाड़ियों से लिया जाएगा अलग-अलग कचरा
कमिश्नर का कहना है कि भविष्य के लिए योजन बना रहे हैं। घरों से कचरा लेने के लिए स्मार्ट सिटी के तहत 390 गाड़ियां भी खरीदी जा रहीं हैं। इनमें ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगेंगे और प्रत्येक गाड़ी को यूनिक आईडी भी दिया जाएगा। शहर को 10 जोन में बांटकर गाड़ियों को संचालित किया जाएगा। इन गाड़ियों की मॉनिटरिंग स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजिशन) के माध्यम से की जाएगी। स्काडा का ऑफिस सेक्टर 17 स्थित सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर में होगा।
शहर में तीन जगह बनेंगे कचरा संग्रहण केंद्र
डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाले वाहनों को पूरे शहर का चक्कर लगाकर जेपी प्लांट तक न जाना पड़े, इसके लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में तीन जगहों पर स्मार्ट सिटी ट्रांसफर स्टेशन एंड मैटेरियल रिकवरी सेंटर (कचरा संग्रहण केंद्र) बनाए जाएंगे। 32 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले इस प्रोजेक्ट के तहत इंडस्ट्रियल एरिया फेस-1, 3 बीआरडी के पास सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में और डड्डूमाजरा में ट्रांसफर स्टेशन एंड मैटेरियल रिकवरी सेंटर बनाया जाएगा।
हमारा प्रयास है कि हम शहर को बेहतर रैंकिंग दिलाएं। पिछले साल से चार इस बार रैंकिंग में चार पायदान की छलांग लगाई है जबकि हमारे पास कचरा प्रबंधन के मजबूत सूत्र नहीं थे। भविष्य की योजना बनाकर शहर को और अच्छी रैंकिंग दिलाएंगे। - राजबाला मलिक, मेयर
मेयर ने निगम से झूठी रिपोर्ट स्वच्छ भारत मिशन को भिजवाई है। इसमें 24 वार्डों में घर-घर से कचरा लेने की बात कही गई है। 479 में से 455 टन कचरा प्रोसेस कर रहे हैं। यह जनता के साथ धोखा है। इसी कारण रैंकिंग गिरी है। - देवेंदर सिंह बबला, नेता प्रतिपक्ष
हम रैंकिंग के सभी बिंदुओं को देख रहे हैं। कहां कमियां रहीं, इस पर मंथन करेंगे। उन कमियों को दूर किया जाएगा। कुछ जगह शहर को पूरे नंबर मिले हैं। कुछ जगह कमियां रहीं उन्हें आगामी सत्र में दूर करने का प्रयास रहेगा। - केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
इन कारणों से पिछड़ गए हम
- सूखा-गीला कचरा अलग-अलग करने के लिए डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्टरों से साल के अंत में हुआ समझौता।
- सदन में सफाई को लेकर सामंजस्य नहीं बन सका।
- निजी कंपनी के खिलाफ लगातार शिकायतें आईं, केवल जुर्माना लगाकर छोड़ा।
- शहर के लोगों और रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से नहीं बना तालमेल।
- बेशक हम फीडबैक देने में नंबर एक रहे हों, लेकिन जनसंख्या की तुलना में काफी कम लोगों ने सहभागिता दी।
- जेपी प्लांट से पूरे साल कचरा निस्तारण के लिए झगड़ा होता रहा।
- गांव में अलग-अलग कचरा लेने के लिए गाड़ियां शुरू हुईं लेकिन संकरी गली में गाड़ी जाती ही नहीं।
- सहज सफाई केंद्रों में अभी भी मिश्रित कचरा ही पहुंच रहा।
आंकड़े एक नजर में
- 130 गाड़ियां हैं निगम के पास
- 215 कुल सफाई कर्मचारी हैं निगम में
- 470 मीट्रिक टन कचरा प्रतिदिन निकलता है शहर में
- 120 मीट्रिक टन तक ही कचरा प्रोसेस हो पाता है प्रतिदिन