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Chandigarh News: निलंबित हेड कांस्टेबल पवन कुमार सीबीआई दफ्तर पहुंचा, किया सरेंडर
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चंडीगढ़। सात लाख रुपये रिश्वत मांगने के मामले में फरार चल रहे चंडीगढ़ पुलिस के निलंबित हेड कांस्टेबल पवन कुमार ने सोमवार को सीबीआई दफ्तर पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इससे पहले वह सेक्टर-9 स्थित चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय अपना निलंबन वापस करवाने पहुंचा था। सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर विशेष कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।सीबीआई ने रामदरबार निवासी दीपक उर्फ दिप्पा की शिकायत पर आठ महीने पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और ट्रैप लगाकर दो आरोपियों मनीष उर्फ बबलू दुबे और अनिल गोयल को गिरफ्तार किया था लेकिन तब पवन सीबीआई टीम को चकमा देकर भाग निकला था। करीब आठ महीने तक वह सीबीआई से बचता रहा।
इस मामले में सीबीआई ने इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों के खिलाफ भी जांच की थी, जिस समय ये मामला सीबीआई के पास आया था तब इंस्पेक्टर सेखों ऑपरेशन सेल के इंचार्ज थे लेकिन सीबीआई को जांच के दौरान उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले तो उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। हालांकि इसी मामले की जांच के दौरान सीबीआई को इंस्पेक्टर सेखों और उनकी पत्नी के पास आय से अधिक संपत्ति का रिकॉर्ड मिला, जिसके बाद सीबीआई ने सेखों दंपति पर केस दर्ज किया था।
पिछले साल सीबीआई को शिकायत देकर दीपक उर्फ दिप्पा ने बताया था कि उसे पुलिस ने फोन कर ऑपरेशन सेल बुलाया। वहां उसे गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया और बुरी तरह से टॉर्चर किया गया। पुलिस ने उससे कहा कि उसके खिलाफ एक गैंगस्टर मनी टोपी ने बयान दिए हैं कि वह भी वसूली के रैकेट में शामिल है। दीपक ने आरोप लगाया कि उस केस में उसका नाम शामिल करने की धमकी देकर उससे सात लाख रुपये रिश्वत मांगी गई थी। ये रिश्वत हेड कांस्टेबल पवन ने इंस्पेक्टर सेखों के नाम पर मांगी और अनिल गोयल उर्फ कोकी और मनीष उर्फ बबलू दुबे इसमें बिचौलिए थे।
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इस मामले में सीबीआई ने इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों के खिलाफ भी जांच की थी, जिस समय ये मामला सीबीआई के पास आया था तब इंस्पेक्टर सेखों ऑपरेशन सेल के इंचार्ज थे लेकिन सीबीआई को जांच के दौरान उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले तो उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। हालांकि इसी मामले की जांच के दौरान सीबीआई को इंस्पेक्टर सेखों और उनकी पत्नी के पास आय से अधिक संपत्ति का रिकॉर्ड मिला, जिसके बाद सीबीआई ने सेखों दंपति पर केस दर्ज किया था।
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पिछले साल सीबीआई को शिकायत देकर दीपक उर्फ दिप्पा ने बताया था कि उसे पुलिस ने फोन कर ऑपरेशन सेल बुलाया। वहां उसे गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया और बुरी तरह से टॉर्चर किया गया। पुलिस ने उससे कहा कि उसके खिलाफ एक गैंगस्टर मनी टोपी ने बयान दिए हैं कि वह भी वसूली के रैकेट में शामिल है। दीपक ने आरोप लगाया कि उस केस में उसका नाम शामिल करने की धमकी देकर उससे सात लाख रुपये रिश्वत मांगी गई थी। ये रिश्वत हेड कांस्टेबल पवन ने इंस्पेक्टर सेखों के नाम पर मांगी और अनिल गोयल उर्फ कोकी और मनीष उर्फ बबलू दुबे इसमें बिचौलिए थे।
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