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Hindi News ›   Chandigarh ›   Survey Reveals 99.9 percent of Children below age of 18 months Spend More Than Two Hours on Mobile Every Day 

चिंताजनक: डेढ़ साल से कम उम्र के 99.9 फीसदी बच्चे मोबाइल पर बिता रहे दो घंटे, दिमाग पर पड़ रहा असर

Tue, 28 Sep 2021 12:25 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़  Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 28 Sep 2021 12:25 PM IST
सार

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक की हालिया गाइडलाइन के अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन पर जीरो आवर का मानक तय किया गया है। यानी इस उम्र से पहले टीवी या मोबाइल पर बिताया गया 5 मिनट भी खतरनाक है।

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Survey Reveals 99.9 percent of Children below age of 18 months Spend More Than Two Hours on Mobile Every Day 
बच्चों में मोबाइल की लत। - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

देश भर में 18 माह से कम उम्र के 99.9 प्रतिशत बच्चे रोजाना मोबाइल पर दो घंटे से ज्यादा वक्त गुजारते हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा भारतीय बाल अकादमी की ओर से कोविड काल में किए गए एक सर्वे में हुआ है। इसे लेकर बाल रोग विशेषज्ञ चिंतित हैं, क्योंकि मोबाइल का दुष्प्रभाव बच्चों की आंखों के साथ दिमाग के विकास और व्यक्तित्व पर पड़ रहा है।

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पिछले दिनों चंडीगढ़ में हुए अकादमी के राष्ट्रीय सम्मेलन में इस पर विशेषज्ञों ने मंथन किया और बचाव के लिए अकादमी की वेबसाइट पर अभिभावकों को जागरूक करने के विकल्प उपलब्ध कराए गए। विशेषज्ञों ने स्क्रीन की बढ़ती आदत को भविष्य की गंभीर समस्या बताया और कहा कि इससे बचाव के लिए अतिरिक्त सजगता जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावक शुरुआत में अपनी सुविधा के लिए बच्चों को मोबाइल या टीवी की लत लगाते हैं और आगे चलकर बच्चे को इसकी लत लग जाती है।
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दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जीरो आवर का मानक तय
अकादमी की कोषाध्यक्ष डॉ. गुंजन बवेजा ने बताया कि अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक की हालिया गाइडलाइन के अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन पर जीरो आवर का मानक तय किया गया है। यानी इस उम्र से पहले टीवी या मोबाइल पर बिताया गया 5 मिनट भी खतरनाक है। ये पहले 18 महीने तक के बच्चों के लिए कुछ मिनट का मानक था। दुष्प्रभाव के चलते इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।


बच्चे को लेकर चिंतित हैं तो यहां संपर्क करें
भारतीय बाल अकादमी ने अभिभावकों के लिए बच्चों से जुड़ी तमाम समस्याओं के समाधान के लिए अपनी वेबसाइट www.iapindia.org पर समाधान उपलब्ध कराया है। जिस पर बच्चों की सेहत से जुड़ी जानकारी के साथ ही उनके सही विकास के मार्ग बताए गए हैं।

इन सुझावों को लें गंभीरता से

  • मोबाइल और टीवी की लत छुड़ाने के लिए खुद बच्चे के साथ वक्त बिताएं। इससे बच्चा बेहतर महसूस करेगा और उसके दिमाग का अच्छे से विकास होगा।
  • बच्चे को अच्छी सीख देने वाली फिल्में, कहानियां, धार्मिक चीजें आदि दिखा सकते हैं। इससे बच्चे के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव दिखेगा।
  • 8 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे का स्क्रीन देखने का एक टाइम फिक्स कर दें, ताकि उसका कम से कम समय मोबाइल पर खराब हो।
  • खुद भी सारा टाइम मोबाइल पर न लगे रहें। ऐसा करने से बच्चों में नकारात्मक विचार आते हैं।
  • बच्चों को मोबाइल की जगह पेड़-पौधे लगाने व उन्हें पानी देने और पेटिंग आदि करने को प्रेरित करें। ऐसा करते समय उनके काम की तारीफ करें।
  • बच्चों के सोने के कमरे में कभी टीवी, लैपटॉप, या मोबाइल फोन न रखें।
  • बच्चे से इस बात पर जरूर चर्चा करें कि उन्हें वीडियो गेम, फिल्म और टीवी में क्या पसंद या नापसंद है।

मोबाइल, टीवी पर ज्यादा समय बिताने वाले बच्चों की आंखों के साथ ही दिमाग पर भी दुष्प्रभाव पड़ रहा है। संपूर्ण विकास भी बाधित हो रहा है। बच्चे देरी से बोलना शुरू कर रहे हैं। बौद्धिक क्षमता कम हो रही है। बच्चा अकेलापन पसंद कर रहा है। -डॉ. अरुण बंसल, एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर पीजीआई

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