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लेखन को दरगाह की उपाधि दी है इस नामी लेखक ने

Sat, 16 Nov 2013 11:43 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 16 Nov 2013 11:43 AM IST
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surjit patar in book fair at chandigarh
पंजाबी के मशहूर लेखक व कवि सुरजीत पातर कहते हैं कि ‘मेरे लिए कविता लफ्जां दी दरगाह है। मैं जिस वी हालात च होवां, उसदे दर ते चला जादां हां।’ पातर ने अपने लेखन को एक दरगाह की उपाधि दी। पातर ने कहा, जब भी वे मायूस होते हैं या किसी चिंता में डूबे होते हैं तो वे इस दरगाह के दर पर चले जाते हैं।
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शुक्रवार को परेड ग्राउंड में चल रहे बुक फेयर में वे विशेष तौर पर उपस्थित थे। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कविताओं के प्रति अपने जज्बातों को साझा किया। पातर ने कार्यक्रम के दौरान अपनी मशहूर नज्में ‘उठ बाल ले मोमबत्तियां’ और ‘मैं राहां ते नहीं तुरदा’ गजल के अंदाज में सुनाईं।
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पातर ने कहा कि एक कवि के साथ ऐसा बहुत कम होता है, जब उसने कविता टेबल पर बैठकर लिखी हो, वरना ज्यादातर कविता आपको रास्ते में ही मिलती है। वे बचपन से ही संगीतकार बनना चाहते थे, लेकिन समय के साथ उनका रुझान लेखन की ओर हो गया।
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पातर के मुताबिक, कविता किसी भी समय आपकी सोच में प्रवेश कर जाती है, चाहे वह सालों पुराने किसी वाक्या से क्यों न जुड़ी हो। मसलन जब वे दूसरी कक्षा में पढ़ रहे थे तो उनके पिता विदेश चले गए। उन दिनों अपने घर के हालातों को उन्होंने यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के दौरान एक कविता का रूप दिया।

सुरजीत ऐसे बने ‘पातर’
पातर ने बताया कि पहले वे अपने नाम के साथ अपने गांव पत्तड़ कलां का नाम जोड़ते थे,जो किसी को पसंद नहीं आता था। एक बार उन्होंने एक अंग्रेजी कविता लिखी। कविता के नीचे अपना नाम लिखा। नाम के स्पेलिंग को उनके एक दोस्त ने पत्तड़ की बजाय पातर पढ़ दिया। अपने दोस्त के मुंह से निकले शब्दों से उन्हें अपना नया नाम मिल गया। बस वहीं से उन्होंने अपने नाम के साथ पातर लगाना शुरू कर दिया।

कॉमेडी नावेल लिख रही हूं: तारा
लेखिका और बॉलीवुड अभिनेत्री तारा देशपांडे भी बुक फेयर में पहुंची। उन्होंने बताया कि इन दिनों वह एक नावेल लिख रही हैं। वह नावेल को कॉमेडी के अंदाज में लिख रही हैं।


तारा ने बताया कि जल्दी ही वह बॉलीवुड में भी वापसी करेंगी। इसके अलावा वह एक कुकिंग शो में भी नजर आएंगी। तारा ने बताया कि चंडीगढ़ आने की हमेशा से ही उनकी हसरत थी जो कि इस बुक फेयर के जरिए पूरी हो गई।
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