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पत्र लिखने वाले कांग्रेसियों पर सुनील जाखड़ ने साधा निशाना, बोले- असुरक्षा व महत्वाकांक्षा रखते हो
Mon, 31 Aug 2020 09:46 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 31 Aug 2020 09:46 AM IST
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राहुल गांधी, सुनील जाखड़
- फोटो : Facebook/ANI
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने गांधी परिवार के खिलाफ पत्र लिखने वाले कांग्रेसियों पर तंज कसते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी में परिवर्तन की मांग करने वाली पत्र राजनीति, इस पर हस्ताक्षर करने वालों में असुरक्षा और राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।
एक बयान में जाखड़ ने कहा कि अब जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी संगठन और अध्यक्ष का चुनाव छह महीने में किया जाएगा, इसके बावजूद कुछ नेता दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से अवांछित बयान देते रहते हैं। इस तरह के बयान और भी हास्यास्पद हो जाते हैं जब पार्टी में चुनाव की मांग ऐसे नेताओं द्वारा की गई है, जो या तो खुद कभी चुनाव नहीं लड़े या वे खुद भी ठीक से याद करने नहीं बता सकते कि उन्होंने आखिरी बार कब चुनाव लड़ा था।
जाखड़ ने कहा कि 2018 में पार्टी की आम बैठक में, वह नेता जो अब पार्टी में चुनाव की बात कर रहे हैं, ने प्रस्ताव दिया था कि चुनाव कराने के बजाय पार्टी अध्यक्ष को कार्यसमिति की नियुक्ति के लिए अधिकृत कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के चुनाव को न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रहे एक नेता की दलील थी कि इस तरह चुने गए व्यक्ति का एक तयशुदा कार्यकाल होगा और वह अपनी कुर्सी चले जाने के डर के बिना अपने दिमाग से फैसले लेने में सक्षम होगा।
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जाखड़ ने आगे कहा कि ‘मेरा मानना है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह निर्वाचित हो या नामांकित हो, के पास अपनी बात कहने का साहस नहीं है और वह अपना पद खोने के डर से अपने मन की बात कहने में असमर्थ है, तो उसे पार्टी के निर्णय लेने वाले निकाय में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं है।’
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एक बयान में जाखड़ ने कहा कि अब जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी संगठन और अध्यक्ष का चुनाव छह महीने में किया जाएगा, इसके बावजूद कुछ नेता दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से अवांछित बयान देते रहते हैं। इस तरह के बयान और भी हास्यास्पद हो जाते हैं जब पार्टी में चुनाव की मांग ऐसे नेताओं द्वारा की गई है, जो या तो खुद कभी चुनाव नहीं लड़े या वे खुद भी ठीक से याद करने नहीं बता सकते कि उन्होंने आखिरी बार कब चुनाव लड़ा था।
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जाखड़ ने कहा कि 2018 में पार्टी की आम बैठक में, वह नेता जो अब पार्टी में चुनाव की बात कर रहे हैं, ने प्रस्ताव दिया था कि चुनाव कराने के बजाय पार्टी अध्यक्ष को कार्यसमिति की नियुक्ति के लिए अधिकृत कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के चुनाव को न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रहे एक नेता की दलील थी कि इस तरह चुने गए व्यक्ति का एक तयशुदा कार्यकाल होगा और वह अपनी कुर्सी चले जाने के डर के बिना अपने दिमाग से फैसले लेने में सक्षम होगा।
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जाखड़ ने आगे कहा कि ‘मेरा मानना है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह निर्वाचित हो या नामांकित हो, के पास अपनी बात कहने का साहस नहीं है और वह अपना पद खोने के डर से अपने मन की बात कहने में असमर्थ है, तो उसे पार्टी के निर्णय लेने वाले निकाय में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं है।’