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पंजाबः अकाली दल को बड़ा झटका, सुखदेव सिंह ढींडसा ने राज्यसभा की सदस्यता से दिया इस्तीफा
Sat, 19 Oct 2019 01:49 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 19 Oct 2019 01:49 PM IST
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सुखदेव सिंह ढींडसा
- फोटो : फाइल फोटो
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के सीनियर नेता और राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने राज्यसभा में शिअद संसदीय दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। इधर, शिअद मुख्यालय से शनिवार को पत्र की प्रति सार्वजनिक की गई, जो संसदीय मामलों के केंद्रीय मंत्री को भेजा गया है और उसमें बलविंदर सिंह भुंदड़ को राज्यसभा में शिअद संसदीय दल का नेता नियुक्त किए जाने के बारे में कहा गया है।
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ढींढसा ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने गुरुवार को राज्यसभा के चेयरमैन उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू को इस्तीफा भेज दिया है। यह भी पता चला है कि ढींढसा ने इस्तीफे की प्रति पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल को शुक्रवार को सौंपी। शनिवार को शिअद के प्रवक्ता और सीनियर उपाध्यक्ष डा. दलजीत सिंह चीमा ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर पत्र सार्वजनिक करते हुए लिखा कि शिअद ने पहले ही संसदीय मामलों के मंत्री को पत्र लिखकर राज्यसभा में अपनी लीडरशिप बदले जाने के बारे में 12 जून को बताया था।
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पत्र में बलविंदर सिंह भूंदड़ और नरेश गुजराल के नाम लिखे गए हैं। प्रति राज्यसभा के महासचिव को भी भेजी जा चुकी है। पत्र में भूंदड़ को अकाली संसदीय दल का नेता और नरेश गुजराल को उपनेता बनाए जाने के फैसले की जानकारी दी गई है।
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सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा अकाली दल में
सुखदेव सिंह ढींढसा के लीडरशिप छोड़ने को लेकर अकाली दल की ओर से कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है लेकिन मामले में पत्र सार्वजनिक करके यह साफ कर दिया है कि पार्टी पहले से उन्हें लीडरशिप से अलग करना चाहती थी। राज्यसभा में लीडर बदलने के लिए जून में ही पार्टी की ओर से पत्र लिख दिए जाने के दावे और ढींढसा द्वारा गुरुवार को इस्तीफा दिए जाने से यही संकेत मिले हैं कि अकाली दल में ठीकठाक नहीं चल रहा।
बेअदबी और बहिबल कलां मामलों के लेकर पार्टी में पहले की टूट हो चुकी है और सीनियर टकसाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा अपना अलग दल बना चुके हैं। इस नए दल से अकाली दल के कई अन्य नेता भी जुड़े लेकिन सुखदेव ढींढसा ने तटस्थ भूमिका अपना ली। वे न तो खुलकर बादल परिवार का समर्थन करते दिखाई दिए और न ही उन्होंने ब्रह्मपुरा का ही हाथ पकड़ा।
ताजा प्रकरण से यह माना जा रहा है कि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल और सुखदेव ढींढसा के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। इस बीच, चार विधानसभा हलकों में उपचुनाव को लेकर ढींढसा के पुत्र और पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा भी इन दिनों पार्टी की प्रचार मुहिम में दिखाई नहीं दे रहे ।