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बेमिसालः सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने की मुहिम चला रही हैं दिप्ती, हाईकोर्ट तक भी गईं
Fri, 22 Feb 2019 03:20 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 22 Feb 2019 03:20 PM IST
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दीप्ती शर्मा
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चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा की रहने वाली 35 वर्षीय दिप्ती को शहर के लोग भले न जानते हों लेकिन शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी व शिक्षक उनसे बखूबी परिचित हैं। कारण है, दिप्ती ने एक मुहिम शुरू कर रखी है, जिसका मकसद है, सरकारी स्कूलों में क्वालिटी एजूकेशन। सरकार भी क्वालिटी एजूकेशन के तमाम दावे करती है लेकिन दशकों बीत जाने के बाद भी क्या सरकारी स्कूल व प्राइवेट स्कूल का शिक्षा समान स्तर का हो पाया है, जवाब है नहीं। दिप्ती जनहित याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाती हैं सरकारी स्कूलों की बेहतरी के लिए लगातार काम कर रही हैं। उनका मानना है कि सरकारी कुर्सियों पर बैठे बाबू, हाईकोर्ट के डंडे के बगैर काम नहीं करते।
सवाल- शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए हाईकोर्ट का रुख क्यों?
जवाब- दो ही तरीकों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है। पहला शहरवासियों को इतना जागरूक किया जाए कि वह खुद उठ खड़े हों और अपने बच्चों के साथ बाकी बच्चों के बारे में भी सोचने लग जाएं लेकिन ऐसा करने में काफी साल लग जाएंगे। दूसरा रास्ता हाईकोर्ट का है, क्योंकि मैंने देखा है जो काम कराने में 6 महीने लग जाते हैं। वह हाईकोर्ट के डंडे से 6 मिनट में हो जाते हैं।
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सवाल- शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए हाईकोर्ट का रुख क्यों?
जवाब- दो ही तरीकों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है। पहला शहरवासियों को इतना जागरूक किया जाए कि वह खुद उठ खड़े हों और अपने बच्चों के साथ बाकी बच्चों के बारे में भी सोचने लग जाएं लेकिन ऐसा करने में काफी साल लग जाएंगे। दूसरा रास्ता हाईकोर्ट का है, क्योंकि मैंने देखा है जो काम कराने में 6 महीने लग जाते हैं। वह हाईकोर्ट के डंडे से 6 मिनट में हो जाते हैं।
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सवाल- अब तक किन मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है?
जवाब- हाईकोर्ट जाने के अलावा अधिकारी कोई रास्ता नहीं छोड़ते। बार-बार शिकायत करने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं होती तो बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए हाईकोर्ट का रुख करना पड़ता है। डड्डूमाजरा के डंपिग ग्राउंड से आसपास के हजारों लोग नर्क की जिंदगी गुजार रहे हैं। नेता वादे करते रहे लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। इसलिए मैंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसके अलावा स्कूल में रेगुलर प्रिंसिपल की कमी, डेपुटेशन पर टीचर्स, स्कूलों में कई तरह की घटनाओं को लेकर मैंने याचिका दायर की, जिससे काफी सुधार आया भी है।
सवाल- क्या कारण हैं कि सरकारी स्कूल के बच्चे प्राइवेट से कम आंके जाते हैं?
जवाब- मैंने कई साल सरकारी स्कूल के बच्चों को फ्री में पढ़ाया है। मैंने देखा है कि कई बच्चे जो सातवीं-आठवी में पढ़ते हैं, वह अंग्रेजी में ठीक से अपना नाम भी नहीं लिख पाते। सरकारी स्कूलों में बहुत अच्छे टीचर्स हैं, बढ़िया इंफ्रास्ट्रक्चर है फिर भी रिजल्ट प्राइवेट स्कूलों से कम ही आता है। इसके पीछे कारण है, बच्चों को सिर्फ पास होने के लिए पढ़ाया जाता है। इसलिए क्वालिटी एजुकेशन पर ध्यान देना होगा।
सवाल- कौन से ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर वाकई इस वक्त काम करने की जरूरत है?
जवाब- इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार का है क्योंकि अगर बुनियाद ही खोखली हुई तो बाकी कुछ भी संभव नहीं है। सरकारी स्कूलों में गरीब घर के बच्चे पढ़ने आते हैं इसलिए क्वालिटी ऐजुकेशन पाना उनका हक तो बनता ही है साथ ही राष्ट्र के लिए भी यह बेहद अहम है। मैं खुद सरकारी स्कूल में पढ़ी हूं, मुझे पता है स्कूलों में कैसी पढ़ाई होती है।
जवाब- हाईकोर्ट जाने के अलावा अधिकारी कोई रास्ता नहीं छोड़ते। बार-बार शिकायत करने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं होती तो बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए हाईकोर्ट का रुख करना पड़ता है। डड्डूमाजरा के डंपिग ग्राउंड से आसपास के हजारों लोग नर्क की जिंदगी गुजार रहे हैं। नेता वादे करते रहे लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। इसलिए मैंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसके अलावा स्कूल में रेगुलर प्रिंसिपल की कमी, डेपुटेशन पर टीचर्स, स्कूलों में कई तरह की घटनाओं को लेकर मैंने याचिका दायर की, जिससे काफी सुधार आया भी है।
सवाल- क्या कारण हैं कि सरकारी स्कूल के बच्चे प्राइवेट से कम आंके जाते हैं?
जवाब- मैंने कई साल सरकारी स्कूल के बच्चों को फ्री में पढ़ाया है। मैंने देखा है कि कई बच्चे जो सातवीं-आठवी में पढ़ते हैं, वह अंग्रेजी में ठीक से अपना नाम भी नहीं लिख पाते। सरकारी स्कूलों में बहुत अच्छे टीचर्स हैं, बढ़िया इंफ्रास्ट्रक्चर है फिर भी रिजल्ट प्राइवेट स्कूलों से कम ही आता है। इसके पीछे कारण है, बच्चों को सिर्फ पास होने के लिए पढ़ाया जाता है। इसलिए क्वालिटी एजुकेशन पर ध्यान देना होगा।
सवाल- कौन से ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर वाकई इस वक्त काम करने की जरूरत है?
जवाब- इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार का है क्योंकि अगर बुनियाद ही खोखली हुई तो बाकी कुछ भी संभव नहीं है। सरकारी स्कूलों में गरीब घर के बच्चे पढ़ने आते हैं इसलिए क्वालिटी ऐजुकेशन पाना उनका हक तो बनता ही है साथ ही राष्ट्र के लिए भी यह बेहद अहम है। मैं खुद सरकारी स्कूल में पढ़ी हूं, मुझे पता है स्कूलों में कैसी पढ़ाई होती है।