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22 साल बाद हरियाणा में होने जा रहे हैं छात्र संघ चुनाव, 15 अक्तूबर से पहले होंगे संपन्न
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 01 Oct 2018 11:14 PM IST
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हरियाणा में 22 साल बाद होने वाले कालेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र संघ चुनाव 15 अक्तूबर से पहले हो जाएंगे। इसकी घोषणा एक बार फिर हरियाणा सरकार ने की है। लेकिन चुनाव के तरीके पर संशय बना रहेगा। सरकार ने इस घोषणा में साफ नहीं किया है कि छात्र संघ के ये चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या अप्रत्यक्ष तरीके से।
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हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री राम बिलास शर्मा ने बताया कि हरियाणा के कालेजों व यूनिवर्सिटी में 22 वर्ष के बाद छात्र संघों के चुनाव 15 अक्तूबर से पहले कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि सीएम मनोहर लाल ने छात्र संघों के चुनाव के बारे गठित की गई चार सदस्यीय कमेटी, जिसमें तीन कुलपति व एक कुलसचिव शामिल थे, की रिपोर्ट को स्वीकृति दे दी है।
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शर्मा ने बताया कि वर्तमान सरकार ने विद्यार्थियों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार देने का निर्णय लेते हुए प्रोफेसर टंकेश्वर समिति की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में छात्र संघ चुनाव बहाल कर दिए हैं। समिति की रिपोर्ट के अनुसार इसी वर्ष से सभी विश्वविद्यालयों तथा वर्ष 2016-17 में या इससे पहले खोले गए कालेजों में चुनाव कराए जाएंगे।
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वर्तमान सरकार ने समिति की अनुशंसा तथा लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार छात्र संघ के चुनाव निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराने का निर्णय लिया है। सरकार ने समिति की अनुशंसा के अनुसार छात्र संघ चुनावों में छात्राओं की समुचित भागीदारी भी सुनिश्चित की है।
फिर आंदोलन की तैयारी
एनएसयूआई के राष्ट्रीय मीडिया कोऑर्डिनेटर दीपांशु बंसल ने कहा कि सरकार का ये रवैया बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार स्पष्ट नहीं कर रही है कि चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या अप्रत्यक्ष। इससे छात्रों में रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक प्रोफेसर टंकेश्वर समिति की रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए अगर चुनाव अप्रत्यक्ष हुए तो एनएसयूआई का विरोध जारी रहेगा।
उनके अनुसार हरियाणा के निकटवर्ती सूबे राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली में भी प्रत्यक्ष रूप से चुनाव कराए जाते हैं, उसी तर्ज पर हरियाणा में भी प्रत्यक्ष रूप से चुनाव कराए जाएं। उधर, इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चुनाव अप्रत्यक्ष हुए तो सरकार को फिर से छात्रों का आंदोलन झेलना पड़ेगा।