फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   student organization, danger to pregnant lady life, whatsapp to health minister

मंत्री को व्हाट्सऐप पर भेजा मैसेज, घायल गर्भवती की जान बचाएं

Wed, 29 Jun 2016 12:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Wed, 29 Jun 2016 12:54 PM IST
विज्ञापन
student organization, danger to pregnant lady life, whatsapp to health minister
whatsapp
लोगों की जान बचाने में सोशल मीडिया अब अहम भूमिका निभाने लगा है। छात्र संगठन ने स्वास्थ्य मंत्री से व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर मदद मांगी है। मैसेज में रोहतक के पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग में भर्ती एक हादसे में घायल गर्भवती महिला के उपचार में कानूनी अड़चन आने का हवाला है।
विज्ञापन


साथ ही, कहा है कि यदि मंत्री पीजीआई के वीसी को आदेश दे दें तो एक महिला की जान बच सकती है। छात्र संगठन के सदस्य ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को लिखा है कि सड़क दुर्घटना में घायल एक महिला (मोनिका पत्नी अनिल कोथकला) को पीजीआई रोहतक के आपात विभाग में लाई गई है।
विज्ञापन


महिला के सिर में गंभीर चोटें लगी हैं, लेकिन गर्भवती होने के कारण न तो उसका सिटी स्कैन हो सकता है और न ही एक्सरे। आपातकालीन विभाग के डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा तो अल्ट्रासाउंड विभाग के डॉक्टर ने कानूनी और प्रशासनिक नियमों का हवाला देकर मजबूरी जाहिर कर दी कि हमें गर्भवती का अल्ट्रासाउंड करने की अनुमति नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हादसे में महिला के पति की हो चुकी है मौत

student organization, danger to pregnant lady life, whatsapp to health minister
वॉट्सऐप
उनका कहना है की विकट परिस्थितियों में मरीज या उसके पति की लिखित अनुमति से हम कोशिश कर सकते हैं। लेकिन महिला के पति का हादसे में देहांत हो चुका है। परिवार के अन्य लोग जो गाड़ी में थे वे भी गंभीर हालात में हैं। हम कई घंटों से महिला की जिंदगी बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

यहां मौजूद डॉक्टर भी अपनी तरफ से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे भी मजबूर हैं। ऐसे हालात में सिर्फ  कुलपति या विभागाध्यक्ष या वरिष्ठ डॉक्टर के द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर महिला की जिंदगी बचाई जा सकती है। कोई भी नियम या कानून इंसान की जिंदगी से ऊपर नहीं होता। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में प्रावधान है की एक डॉक्टर द्वारा किसी मरीज की जिंदगी बचाने के लिए इलाज के लिए किया गया कोई भी कार्य अपराध की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।

इसलिए मंत्री जी आपसे विनती है की आप तुरंत पीजीआई के कुलपति को फोन करके मामले में संज्ञान लेने और हर संभव इलाज का आदेश दें, ताकि एक गर्भवती महिला की जिंदगी बचाई जा सके। मैं और मेरे साथी मरीज के साथ हैं। उम्मीद करते हैं की आप हालात को देखते हुए मानवता धर्म निभाएंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed