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मेयर का एलान, आवारा कुत्तों को गोद लेने वाले होंगे सम्मानित
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 23 Mar 2017 09:34 AM IST
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मेयर आशा जसवाल
- फोटो : अमर उजाला
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अगर आप आवारा कुत्तों को गोद लेते हैं तो नगर निगम आपको सम्मानित करेगा। यह निर्णय नगर निगम ने लिया है। बुधवार को मेयर आशा जसवाल ने एनजीओ और स्थानीय निवासियों को आवारा कुत्तों को गोद लेने की अपील की है।
एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में शहर में लगभग 12 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। स्ट्रे डाग्स से शहरवासी परेशान हैं। मेयर ने कहा कि जो लोग और एनजीओ आवारा कुत्तों को गोद लेती है वह एमओएच कार्यालय में इसकी जानकारी भी दे।
मेयर का कहना है कि आवारा कुत्तों को गोद लेने वालों को हर तीन माह बाद सम्मानित किया जाएगा। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों पर काबू पाने के लिए लोग सुझाव भी दे सकते हैं। इस समय नगर निगम की ओर से करीब आठ हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी वैक्सिन दी जा रही है। मेयर आशा जसवाल का कहना है कि इस समय उन गांव में यह वैक्सिन नहीं दी जा रही है जो कि नगर निगम के अंतर्गत नहीं है। इसके लिए जल्द ही गांव के सरपंचों के साथ बैठक की जाएगी।
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एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में शहर में लगभग 12 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। स्ट्रे डाग्स से शहरवासी परेशान हैं। मेयर ने कहा कि जो लोग और एनजीओ आवारा कुत्तों को गोद लेती है वह एमओएच कार्यालय में इसकी जानकारी भी दे।
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मेयर का कहना है कि आवारा कुत्तों को गोद लेने वालों को हर तीन माह बाद सम्मानित किया जाएगा। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों पर काबू पाने के लिए लोग सुझाव भी दे सकते हैं। इस समय नगर निगम की ओर से करीब आठ हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी वैक्सिन दी जा रही है। मेयर आशा जसवाल का कहना है कि इस समय उन गांव में यह वैक्सिन नहीं दी जा रही है जो कि नगर निगम के अंतर्गत नहीं है। इसके लिए जल्द ही गांव के सरपंचों के साथ बैठक की जाएगी।
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शहरवासी चाहते है डाग पाउंड बने
चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल
- फोटो : File Photo
शहरवासी चाहते है डाग पाउंड बने
फासवेक के सलाहकार दलविंदर सैनी का कहना है कि इससे निजात पाने के लिए शहर में डाग पाउंड बनने चाहिए। उनका कहना है कि अगर किसी ने कुछ धार्मिंक उद्देश्य से कुत्ते को कुछ खिलाना है तो वे वहां जाकर खिला सकते हैं। लेकिन नगर निगम डाग पाउंड बनाने के पक्ष में नहीं है क्योंकि इससे नगर निगम पर खर्चे का बोझ बढ़ जाएगा।
निगम पर गाइडलाइन की लटक रही तलवार
नगर निगम पर एनिमल वेलफेयर बोर्ड की ओर से आई नई गाइडलाइन को लागू करने पर भी तलवार लटक रही है। बोर्ड की ओर से नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि शहर के सभी गार्डन और पार्क पेट डाग्स के लिए खोले जाएं। जबकि पार्षद और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन इसके लिए तैयार नहीं है। बोर्ड की ओर से नगर निगम की ओर से जो पेट डाग्स की पाबंदी के लिए पार्कों के बाहर सूचना बोर्ड लगाए हैं उन्हें भी हटाने के निर्देश दिए हैं। इन गाइडलाइन को लागू करने केलिए केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी भी नगर निगम कमिश्नर से फोन पर बात कर चुकी है।
फासवेक के सलाहकार दलविंदर सैनी का कहना है कि इससे निजात पाने के लिए शहर में डाग पाउंड बनने चाहिए। उनका कहना है कि अगर किसी ने कुछ धार्मिंक उद्देश्य से कुत्ते को कुछ खिलाना है तो वे वहां जाकर खिला सकते हैं। लेकिन नगर निगम डाग पाउंड बनाने के पक्ष में नहीं है क्योंकि इससे नगर निगम पर खर्चे का बोझ बढ़ जाएगा।
निगम पर गाइडलाइन की लटक रही तलवार
नगर निगम पर एनिमल वेलफेयर बोर्ड की ओर से आई नई गाइडलाइन को लागू करने पर भी तलवार लटक रही है। बोर्ड की ओर से नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि शहर के सभी गार्डन और पार्क पेट डाग्स के लिए खोले जाएं। जबकि पार्षद और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन इसके लिए तैयार नहीं है। बोर्ड की ओर से नगर निगम की ओर से जो पेट डाग्स की पाबंदी के लिए पार्कों के बाहर सूचना बोर्ड लगाए हैं उन्हें भी हटाने के निर्देश दिए हैं। इन गाइडलाइन को लागू करने केलिए केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी भी नगर निगम कमिश्नर से फोन पर बात कर चुकी है।