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Chandigarh News: उत्तर भारत में तेजी से बढ़ रहे पेट के कैंसर के मरीज

Sun, 04 Feb 2024 04:15 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Feb 2024 04:15 AM IST
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Stomach cancer patients are increasing rapidly in North India.
चंडीगढ़। उत्तर भारत में पेट के कैंसर (गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन आंकड़ों पर गौर करें तो पेट के कैंसर की रफ्तार सिर और गर्दन के कैंसर से भी ज्यादा हो गई है। इसकी पुष्टि पीजीआई की ओपीडी में पिछले चार वर्षों के दौरान आए मरीजों से हो रही है। संस्थान ने मरीजों का आंकड़ा आईसीएमआर को भेजा है। पीजीआई के रेडियोथेरेपी व ओंकोलॉजी और टेरटरी कैंसर सेंटर के प्रमुख प्रो. राकेश कपूर का कहना है कि पीजीआई की रजिस्ट्री के अनुसार गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (जीआईटी) मरीजों में वृद्धि सामने आ रही है। इसका मुख्य स्थान कोलोन और इसोफेगस है, जो आहार संबंधी कारकों से प्रमुख रूप से प्रभावित होते हैं। सबसे आम कैंसर सिर और गर्दन, जीआईटी, स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और फेफड़े का है। उन्होंने बताया कि 2023 में कैंसर के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है क्योंकि कोविड के कारण मरीज नहीं आ सके और स्क्रीनिंग भी रुक गई थी। प्रो. राकेश कपूर का कहना है कि गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट कैंसर के बढ़ने का मुख्य कारण जीवनशैली और खानपान में बदलाव है। पहले एक महीने में रेक्टल (मलाशय) कैंसर का एक मामला देखा जाता था और अब एक महीने में लगभग 3 से 4 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। चिंताजनक यह है कि अब 25 साल से कम उम्र वाले लोगों में भी इसकी संख्या बढ़ रही है।
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एसिडिटी को न करें नजरअंदाज
प्रो. राकेश कपूर का कहना है कि पुरानी एसिडिटी को आमतौर पर गंभीरता से नहीं लिया जाता है। यह अनदेखी ज्यादातर मामलों में गंभीर स्थिति का कारण बन रहा है इसलिए खानपान में सावधानी बरतें। गैस संबंधी परेशानी होने पर एसिडिटी रोकने की दवा बिना डॉक्टर के सलाह से लंबे समय तक न लें। प्रो. कपूर का कहना है कि समय रहते परेशानी का पता चलने पर स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है। शोध से यह बात साबित हो चुका है कि लगभग एक तिहाई कैंसर को समय पर पता लगाकर इलाज से 90 प्रतिशत तक रोका जा सकता है।
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इनसेट-
आंकड़े बयां कर रहे स्थिति की गंभीरता
(पीजीआई अस्पताल रजिस्ट्री के अनुसार कैंसर के नए ओपीडी मामले)
2020 में कुल -3582
ईएनटी-614,
जीआईटी-632,
स्तन-580,
स्त्री रोग-546,
फेफड़े-192

2021 में कुल- 4786
ईएनटी-689,
जीआईटी-859,
स्तन-630,
स्त्री रोग-653,
फेफड़े-219


2022 में कुल- 7109
ईएनटी-1232,
जीआईटी-1238,
स्तन-871,
स्त्री रोग-983,
फेफड़े-366


2023 में कुल- 7882
-ईएनटी-1264,
जीआईटी-1543,
स्तन-950,
स्त्री रोग-1079,
फेफड़े-372
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