बेटा खोया, दर्द ने 70 की उम्र में चैंपियन बना दिया
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नाम-तेज सिंह। काम-फर्राटा दौड़। हवा से भी तेज दौड़ते हैं 70 साल के तेज सिंह। जिंदगी ने जिंदा नहीं छोड़ा, पर हौसलों ने मरने भी नहीं दिया। तकदीर ने 20 साल का जवान बेटा छीन लिया, हादसे में एक हाथ चला गया।
70 साल की उम्र में सहारा तलाशने और मौत का इंतजार करने की बजाय नजीर बन गए। गम से उबरने के लिए खेल को ही जिंदगी बना लिया। हादसे हौसला नहीं छीन सके और हिम्मत ने स्टेट रनिंग चैंपियन बना दिया।
यह कहानी है बेरी के मांगावास गांव निवासी दो बार के स्टेट चैंपियन तेज सिंह की। सिंह रोहतक में शुरू हुई राष्ट्रीय वेटरन एथलेटिक्स प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए हैं। खुद पर भरोसा इतना कि कहते हैं कि अभी तो दस साल और दौड़ूंगा।
70 की उम्र, 20 का जोश
तेज सिंह की उम्र भले ही 70 साल की है, लेकिन जोश 20 साल के युवा जैसा। वे 100, 200 और 400 मीटर रेस में हिस्सा लेते हैं। दो सालों से स्टेट रनिंग चैंपियन हैं। पिछले माह हिसार में हुई प्रतियोगिता में भी खिताब जीता। तेज सिंह कहते हैं कि लगातार मेहनत और जज्बे से यह कामयाबी मिली। सिंह अभी भी गांव में रोजाना दौड़ लगाते हैं ताकि स्टेमिना बना रहे।
हादसों से उबरने के लिए अपनाया खेल को
जिंदगी हादसे देती रही और तेज सिंह आगे बढ़ते रहे। बस हादसों से पार पाने के लिए ही खेल को जीवन बना लिया। बृहस्पतिवार को प्रैक्टिस में जुटे तेज सिंह कहते हैं कि हादसे बड़े थे, लेकिन खुद हौसला हार जाता तो बाकी दोनो बेटों को कैसे संभालता। पहले गांव में होने वाली प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। जीत से हौसला बढ़ा और बात अफसरों तक पहुंची। ट्रायल के बाद राज्य की वेटरन एथलेटिक्स टीम में जगह मिली।
कितनों को मौका मिलता है 70 की उम्र में प्रदेश का नाम चमकाने का
तेज सिंह की निगाहें इस बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप पर हैं। प्रदेश का नाम चमकाने का दबाव भी है। चेहरे पर हल्की मुस्कराहट लिए कहते हैं कि 70 की उम्र में प्रदेश की सेवा करने का मौका कितनों को मिलता है। पूरी ताकत लगाकर दौडूंगा। चैंपियनशिप में कई और ऐसे नाम हैं जो उम्र की सीमा तोड़ मिसाल बन रहे हैं। बहादुरगढ़ के खरड़ गांव निवासी 80 साल के भीम सिंह राठी 800 मीटर की रेस 3 मिनट में पूरा कर देते हैं। झज्जर निवासी कैरसिंह 82 साल के हैं, लेकिन हारे चाहे जीतें, दौड़ जरूरी पूरी करते हैं।