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Chandigarh News: हरियाणा कांग्रेस में होगा आमूल चूल परिवर्तन, प्रभारी और प्रधान की होगी छुट्टी
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-हुड्डा के स्थान पर अशोक अरोड़ा हो सकते हैं विधायक दल के नेता
-प्रदेशाध्यक्ष के लिए फिर से कुमारी सैलजा का चल रहा नाम
-नई टीम आते ही फील्ड में खड़ा किया जाएगा कांग्रेस का संगठन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में पिछले दस साल से सत्ता से बेदखल और लगातार तीन विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस हाईकमान प्रदेश कांग्रेस में आमूल चूल परिवर्तन करने जा रही है। सबसे पहले प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया को हटाया जाएगा और इनके साथ ही वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान का बदला जाना भी लगभग तय है। ये दोनों ही नेता न तो प्रदेश के नेताओं को एकजुट कर पाए और न ही गुटबाजी खत्म करने को लेकर दोनों नेताओं द्वारा कोई ठोस कार्य किए गए। तीसरी बात आती है पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की। परिवर्तन के इस दौर में इस बार हुड्डा का नेता प्रतिपक्ष बनना मुश्किल नजर आ रहा है। हार के चलते हाईकमान हुड्डा से भी नाराज है और उनके स्थान पर अशोक अरोड़ा विधायक दल के नेता चुने जा सकते हैं। संतुलन साधने के लिए दोबारा से प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर कुमारी सैलजा का नाम सबसे आगे चल रहा है।
प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया पहले ही अपने इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं। ऐसे में राहुल गांधी के नजदीकी जितेंद्र बघेल को हरियाणा का सह प्रभारी नियुक्त किया जा चुका है। बघेल फिलहाल हरियाणा के मामलों को समझ रहे हैं और जल्द ही वह पूरी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप देंगे। संभावना ये है कि 13 नवंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले ही विधायक दल का नेता चुना जाएगा, क्योंकि सदन में भाजपा के बाद कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी है और कांग्रेस विधायक दल का नेता ही नेता प्रतिपक्ष होगा। पिछली बार पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सीएलपी थे, लेकिन इस बार मामला कुछ बदला हुआ है। हालांकि, 37 में से 32 विधायक हुड्डा के समर्थक हैं और शेष विधायक कुमारी सैलजा के समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में ये तय माना जा रहा है कि हाईकमान इस बार हुड्डा के स्थान पर किसी अन्य नेता को यह जिम्मेदारी सौंपेगा। इनमें अशोक अरोड़ा और गीता भुक्कल के नाम चल रहे हैं। इसी प्रकार, प्रदेशाध्यक्ष के लिए कुमारी सैलजा का नाम सबसे आगे है। सैलजा संगठन को लेकर हुड्डा और उदयभान पर सवाल खड़ा करती रही हैं।
जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों की होगी नियुक्ति
प्रदेश में कांग्रेस 10 साल से संगठन खड़ा नहीं पाई है। कांग्रेस हाईकमान की ओर से प्रदेश के लगाए गए सह प्रभारी जितेंद्र बघेल का भी मानना है कि प्रदेश में सभी नेताओं को साथ लेकर चलना और संगठन बनाना बड़ी चुनौती होगी। इसलिए नए नेताओं के चुने जाने के बाद पार्टी का सबसे पहला काम संगठन खड़ा करना होगा। इनमें जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष चुने जाने हैं। इन सभी की सूची पहले से ही कांग्रेस हाईकमान के पास पहुंची हुई है।
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-प्रदेशाध्यक्ष के लिए फिर से कुमारी सैलजा का चल रहा नाम
-नई टीम आते ही फील्ड में खड़ा किया जाएगा कांग्रेस का संगठन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में पिछले दस साल से सत्ता से बेदखल और लगातार तीन विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस हाईकमान प्रदेश कांग्रेस में आमूल चूल परिवर्तन करने जा रही है। सबसे पहले प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया को हटाया जाएगा और इनके साथ ही वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान का बदला जाना भी लगभग तय है। ये दोनों ही नेता न तो प्रदेश के नेताओं को एकजुट कर पाए और न ही गुटबाजी खत्म करने को लेकर दोनों नेताओं द्वारा कोई ठोस कार्य किए गए। तीसरी बात आती है पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की। परिवर्तन के इस दौर में इस बार हुड्डा का नेता प्रतिपक्ष बनना मुश्किल नजर आ रहा है। हार के चलते हाईकमान हुड्डा से भी नाराज है और उनके स्थान पर अशोक अरोड़ा विधायक दल के नेता चुने जा सकते हैं। संतुलन साधने के लिए दोबारा से प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर कुमारी सैलजा का नाम सबसे आगे चल रहा है।
प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया पहले ही अपने इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं। ऐसे में राहुल गांधी के नजदीकी जितेंद्र बघेल को हरियाणा का सह प्रभारी नियुक्त किया जा चुका है। बघेल फिलहाल हरियाणा के मामलों को समझ रहे हैं और जल्द ही वह पूरी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप देंगे। संभावना ये है कि 13 नवंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले ही विधायक दल का नेता चुना जाएगा, क्योंकि सदन में भाजपा के बाद कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी है और कांग्रेस विधायक दल का नेता ही नेता प्रतिपक्ष होगा। पिछली बार पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सीएलपी थे, लेकिन इस बार मामला कुछ बदला हुआ है। हालांकि, 37 में से 32 विधायक हुड्डा के समर्थक हैं और शेष विधायक कुमारी सैलजा के समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में ये तय माना जा रहा है कि हाईकमान इस बार हुड्डा के स्थान पर किसी अन्य नेता को यह जिम्मेदारी सौंपेगा। इनमें अशोक अरोड़ा और गीता भुक्कल के नाम चल रहे हैं। इसी प्रकार, प्रदेशाध्यक्ष के लिए कुमारी सैलजा का नाम सबसे आगे है। सैलजा संगठन को लेकर हुड्डा और उदयभान पर सवाल खड़ा करती रही हैं।
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जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों की होगी नियुक्ति
प्रदेश में कांग्रेस 10 साल से संगठन खड़ा नहीं पाई है। कांग्रेस हाईकमान की ओर से प्रदेश के लगाए गए सह प्रभारी जितेंद्र बघेल का भी मानना है कि प्रदेश में सभी नेताओं को साथ लेकर चलना और संगठन बनाना बड़ी चुनौती होगी। इसलिए नए नेताओं के चुने जाने के बाद पार्टी का सबसे पहला काम संगठन खड़ा करना होगा। इनमें जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष चुने जाने हैं। इन सभी की सूची पहले से ही कांग्रेस हाईकमान के पास पहुंची हुई है।
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