{"_id":"651514070f8c9beaf8240dca5bb1698c","slug":"specialist-doctor-and-family-of-patient-gave-him-new-life","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिवार और मरीज ने हार नहीं मानी और दे दी मौत को मात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिवार और मरीज ने हार नहीं मानी और दे दी मौत को मात
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Mar 2014 12:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लगातार 70 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहे। कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और तीन बार 40 मिनट तक दिल की धड़कन ने भी जवाब दे दिया था, लेकिन अब वही मरीज बिल्कुल स्वस्थ है।
विज्ञापन
यह संभव हुआ है हिम्मत और कभी हार नहीं मानने के जज्बे से। यमुनानगर के ओडाहारी निवासी 48 वर्षीय सतपाल ने 84 दिनों में मौत को मात देकर जिंदगी की जंग जीत ली।
विज्ञापन
वह मल्टीपल आर्गन फेल्योर पीड़ित थे, लेकिन अपने व परिवार के धैर्य और अलकेमिस्ट अस्पताल के डाक्टरों के तजुर्बे ने उन्हें जिंदगी की सौगात दी।
डाक्टरों की इस मल्टी-डिसिप्लीनरी टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट, फिजिशयन और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट शामिल हैं। सतपाल ने एक संदेश भी दिया है कि ‘‘कभी न आस छोड़ो, फिर चाहे सबसे कम उम्मीद वाला केस क्यों न हो।’’
विज्ञापन
डाक्टरों ने भी माना, मौत के बेहद करीब थे सतपाल
अलकेमिस्ट अस्पताल के प्रबंध निदेशक डा. इंद्रजीत सिंह विरदी ने बताया कि सतपाल को गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था और वह मौत के बेहद करीब थे।
संक्रमण उनके पूरे शरीर में फैल चुका था और गुर्दे भी फेल हो चुके थे। उनके गुर्दे के पास भी एक बड़ा फोड़ा था। मरीज को सेप्टिक हो गया था और उनके कई अंग फेल हो चुके थे, जिनमें उनके गुर्दे भी शामिल थे।
... पर हार नहीं मानी
इंटेंसिव केयर डॉक्टर्स की एक टीम ने डॉ. अचिंत नारंग के नेतृत्व में उनका इलाज शुरू किया और दवाओं के अलावा डायलिसिस करने के अलावा वेंटीलेटर भी लगाया गया।
इलाज के दौरान कई बार उनकी हालत खराब हुई और एक्युट रिस्पेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) का भी सामना करना पड़ा, जो कि बालिगों में चोट या फेफड़ों में भयंकर संक्रमण के प्रति एक जोरदार और जान जोखिम में डालने का खतरा पैदा करने वाला एक रिएक्शन है। उन्हें तीन बार 40 मिनट तक दिल की धड़कन बंद होने की स्थिति का भी सामना करना पड़ा।