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Doctors Day: डॉक्टरों की बोली में सेहत की गोली, मिलिए PGI के चिकित्सकों से, जिनके लिए सबसे पहले हैं मरीज
Sat, 01 Jul 2023 11:30 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 01 Jul 2023 11:30 AM IST
सार
पीजीआई हेमेटोलॉजी ओंकोलॉजी विभाग के डॉ. पंकज मल्होत्रा के चेहरे पर 24 घंटे नजर आने वाली हल्की मुस्कान उनके मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। ब्लड कैंसर के मरीजों का विशेष रूप से इलाज करने वाले डॉ. पंकज का मानना है कि मरीज के दर्द को समझना ही सबसे बड़ी डॉक्टरी है।
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डॉक्टर्स डे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डॉक्टर केवल एक मरीज का इलाज नहीं करते, बल्कि उनसे और उनके पूरे परिवार से एक रिश्ता जोड़ लेते हैं। उनकी बातों में एक अजीब सी जादू की गोली होती है, जिसकी डोज मिलते ही मानो दर्द दूर होने लगता है। उनकी एक हल्की सी मुस्कान मानो मरीजों में जीने की चाह बढ़ा देती हो। चाहे कोविड का दौर रहा हो या सामान्य दिन, उनके व्यवहार में कोई बदलाव नजर नहीं आता। उनके लिए खुद से और परिवार से भी बढ़कर है उनका मरीज। इस डॉक्टर्स डे पीजीआई के कुछ ऐसे ही डॉक्टरों से आपको मिलाते हैं, जिनके लिए उनके मरीज ही सबकुछ हैं।
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इन्हें पहुंच से है परहेज, सभी मरीज एक समान
पीजीआई रह्यूमेटोलॉजी के डॉ. अमन शर्मा रेयर डिजीज पर किए जाने वाले शोध के लिए विश्वस्तर पर प्रसिद्ध हैं। लेकिन पीजीआई में इनकी प्रसिद्धि का कारण कुछ और ही है। डॉ. अमन को इलाज के लिए पहुंच लगाने वालों से परहेज है। उनका मानना है कि इलाज के लिए घंटों कतार में खड़े रहने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीज को पहले इलाज मिलना चाहिए। वे गांव वाले मरीजों से उनकी भाषा में बात करने का प्रयास करते हैं ताकि उन्हें इलाज के बारे में पूरी जानकारी दी जा सके। इतना ही नहीं वे जरूरतमंद मरीज का इलाज करने के साथ ही उसकी जांच व अन्य जरूरी चीजों में भी अपने स्तर पर हरसंभव मदद करने को तैयार नजर आते हैं।
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डॉ. पवन मल्होत्रा बोले- मरीज का दर्द समझना सबसे बड़ी डॉक्टरी
पीजीआई हेमेटोलॉजी ओंकोलॉजी विभाग के डॉ. पंकज मल्होत्रा के चेहरे पर 24 घंटे नजर आने वाली हल्की मुस्कान उनके मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। ब्लड कैंसर के मरीजों का विशेष रूप से इलाज करने वाले डॉ. पंकज का मानना है कि मरीज के दर्द को समझना ही सबसे बड़ी डॉक्टरी है। ये पढ़ाई जिसने पढ़ ली वो अपने मरीज का आधा दर्द ऐसे ही दूर कर देगा। डॉ. पंकज की ओपीडी में दर्द से कराहते मरीज आंखों में आंसू लेकर जाते हैं, लेकिन लौटते हैं चेहरे पर हंसी और मन में जीने की चाह लेकर। डॉ. पंकज का कहना है कि कैंसर जैसे मर्ज से ग्रस्त मरीज के लिए एक-एक मिनट कीमती है। इसलिए हमारा प्रयास सबसे पहले उसके अंदर जीने की चाह जगाने की होनी चाहिए।
भूलने के मर्ज का इलाज कराने आने वाले मरीज इस डॉक्टर को नहीं भूलते
भूलने के मर्ज का इलाज कराने आने वाले मरीज एक बार पीजीआई के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनीष मोदी से मिल लें तो उन्हें ताउम्र नहीं भूल पाते। उनके चेहरे पर छाई मुस्कान, बातों में मिठास और सकारात्मक सोच उन्हें बाकी डॉक्टरों से अलग करती है। उनकी इसी खासियत के कारण उनकी ओपीडी में मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि वे देर शाम तक परामर्श देते नजर आते हैं। डॉ. मोदी का मानना है कि तनाव और क्रोध में भौंहे तनी रखने से मिलता कुछ नहीं, बल्कि खो बहुत कुछ जाता है। इसलिए हमेशा सकारात्मक रहिए। अगर खुद परेशानी में हैं तब भी मरीजों पर गुस्सा जाहिर मत कीजिए। मरीज जाने कितनी परेशानी झेलकर डॉक्टर के पास आते हैं।
अवकाश के दिन भी ओपीडी और वार्ड में मरीजों के बीच आते हैं नजर
विश्व के जाने माने गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सुरिंदर राणा पीजीआई के लिए एक मिसाल हैं। बेहद सामान्य रहने वाले डॉ. सुरिंदर के हाथों में मानो जादू की छड़ी है। जिस मरीज को छू लें, उसका मर्ज कम होने लगता है। मरीजों को दवाओं की बजाय उनकी आदतों में सुधार कर ठीक करने वाले डॉ. सुरिंदर का मानना है कि छुट्टी डॉक्टरों के लिए नहीं बनाई गई है क्योंकि डॉक्टर छुट्टी पर रहने लगे तो मरीजों का इलाज कौन करेगा। अपने इस बात का समर्थन करते हुए ये अवकाश के दिन भी ओपीडी और वार्ड में मरीजों के बीच नजर आते हैं। डॉ. सुरिंदर का बेहद सरल स्वभाव उन्हें अपने मरीजों के करीब ले जाता है जिससे वे मरीज के मर्ज से जुड़ी हर बात आसानी से जान लेते हैं और उसका सटीक इलाज करते हैं।