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Mother's Day: मोहाली की अक्षरा और शिमला की स्वाति के लिए मां बनी देवदूत, बेटियों के लिए दान की किडनी

Sun, 14 May 2023 04:02 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 14 May 2023 04:02 PM IST
सार

इस मदर्स डे ऐसे ही माताओं की कहानी हम पेश कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी संतान की जिंदगी पर आंच आने पर अपने जीवन की परवाह किए बिना अंग का दान कर मिसाल कायम की है। अपनी माताओं के अंगों को पाकर दूसरा जीवन मिलने पर वे बच्चे अपनी मां में ईश्वर की प्रतिमूर्ति को देखते हैं।

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Special Story on  Mother's day
अपनी मांओं के साथ अक्षरा और स्वाति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उसको जब भी देखती हूं मेरी मन्नत पूरी हो जाती है,  उसमें, उससे, उस पर ही, मेरी दुनिया पूरी हो जाती है... यह चंद लाइनें बच्चों की जिंदगी में उनकी मां के महत्व को बयां करने के लिए काफी हैं। बच्चों को दुनिया में लाने के साथ ही उन पर आने वाले हर एक मुसीबत के सामने ढाल बनकर खड़ी होने वाली मां यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती कि उसकी आंखों के सामने उसका बच्चा हर पल मौत के करीब जाए। इसके लिए भले ही उसे अपने जीवन का बलिदान देना पड़े, लेकिन वे अपने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए हर हद को पार करने के लिए तैयार रहती है। 

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इस मदर्स डे ऐसे ही माताओं की कहानी हम पेश कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी संतान की जिंदगी पर आंच आने पर अपने जीवन की परवाह किए बिना अंग का दान कर मिसाल कायम की है। अपनी माताओं के अंगों को पाकर दूसरा जीवन मिलने पर वे बच्चे अपनी मां में ईश्वर की प्रतिमूर्ति को देखते हैं। उनका कहना है कि उसको नहीं देखा हमने कभी पर इसकी जरूरत क्या होगी, ए मां तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी।
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पहले ही दिन किडनी देने का ले लिया था निर्णय
मोहाली निवासी 42 वर्षीय अंजू को 2020 में पता चला कि उनकी बेटी अक्षरा की दोनों किडनी खराब हो चुकी है। 19 साल की बेटी के जिंदगी में अचानक आए इस तूफान ने जैसे अंजू को तोड़ कर रख दिया। लेकिन मां होने के नाते उसने हिम्मत नहीं हारी। बीमारी का पता चलते ही बिना कुछ सोचे अंजू ने तय कर लिया कि वह अपनी बेटी की जान बचाने के लिए अपनी किडनी उसे देंगी। कोविड-19 के कारण 2 साल तक किडनी प्रत्यारोपण नहीं हो पाया। 
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इस दौरान इलाज के लिए अंजू और उनके पति अमित कुमार देश के अलग-अलग कोनों में अक्षरा को लेकर गए। लेकिन सफलता नहीं मिली। अंत में किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके ऋषि ने उन्हें पीजीआई के बारे में बताया। उनकी मदद से वे पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग में पहुंचे। वहां डॉक्टर एचएस कोहली की देखरेख में उनकी टीम ने अंजू की किडनी को अक्षरा में प्रत्यारोपित किया। किडनी प्रत्यारोपण 2022 अगस्त में हुआ। अब अंजू और अक्षरा बिल्कुल ठीक हैं। अक्षरा का कहना है कि मेरी मां ने मुझे एक नहीं दो जन्म दिया है। एक बार इस दुनिया में लाकर और दूसरी बार किडनी खोने पर अपनी किडनी दान करके।


बचपन से बेटी को तिल तिल मरते देखना असहनीय था
मेरे लिए अपनी बेटी को तील-तील कर मरना देखना किसी सजा से कम नहीं था। यह कहना है शिमला निवासी शिक्षा का जिनकी बेटी स्वाति बचपन से ही किडनी के मर्ज से ग्रस्त थी। लेकिन 2 साल पहले अचानक स्थिति खराब हुई तो जिंदगी बचाने के लिए पीजीआई के डॉक्टरों ने किडनी प्रत्यारोपण करने का एकमात्र विकल्प बताया। जिस पर शिक्षा ने बिना कुछ सोचे अपनी एक किडनी बेटी को देने का निर्णय लिया। ऐसा तथा जब शिक्षा के कंधों पर अपनी दूसरी बेटी की भी जिम्मेदारी थी। स्वाति के पिता हार्टअटैक के कारण बचपन में ही दुनिया छोड़ चुके थे। ऐसे में अपने दम पर दोनों बेटियों को पालने वाली शिक्षा के लिए अंगदान का निर्णय लेना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए किडनी देने में एक पल की भी देरी नहीं लगाई। शिक्षा का कहना है कि किडनी बचाकर मैं क्या करती, जब अपनी बेटी को ही नहीं बचा पाती। एक- एक किडनी के बल पर हम दोनों जी सकते हैं। इसलिए मैंने किडनी देने का निर्णय लिया।

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