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Chandigarh News: विधानसभा स्पीकर ने फसली विविधता पर दिया जोर किसानों से भूजल के संयमित प्रयोग की अपील
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सिंचाई में नहरी पानी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने प्रदेशवासियों खासकर किसानों से अपील की है कि वे भूजल स्तर को और गिरने से रोकने के लिए पानी का संयम से प्रयोग करें। संधवां ने कहा कि भूजल के दुरुपयोग के कारण पंजाब भर में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है और राज्य के 150 ब्लाकों में से 78 प्रतिशत से अधिक जमीनी पानी नीचे जाने से डार्क जोन में आ गए हैं।
तेजी से गिर रहे भूजल स्तर पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए स्पीकर ने कहा कि किसानों को रिवायती धान की बुआई से सीधी बुआई जैसी उन्नत
तकनीक की तरफ प्रेरित करना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से किसानों को फसली विविधता अपनाने के मकसद से धान की सीधी बुआई (डीएसआर) की तकनीक अपनाने को कहा गया है। इसके लिए सरकार ने किसानों को प्रति एकड़ 1500 रुपये की वित्तीय सहायता देने का एलान भी किया है, ताकि किसान धान की बुआई के रिवायती तरीके छोड़कर पानी की बचत करने के उद्यमों में अपना बनता योगदान डाल सकें।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे फसली विविधता के अंतर्गत विभिन्न फसलों जैसे मूंग, मक्का, दालें और बाजरे सहित वैकल्पिक फसलों की पैदावार करें। संधवां ने कहा कि भू-विज्ञान की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब का पानी 2039 तक खतरनाक स्तर तक नीचे जा सकता है। इसलिए भूजल बचाने के लिए पंजाब के किसानों से अपील है कि वे सिंचाई के लिए नहरी पानी का अधिकतम प्रयोग करें और जमीनी पानी का प्रयोग ज्यादा अति जरूरी हालात में ही किया जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने प्रदेशवासियों खासकर किसानों से अपील की है कि वे भूजल स्तर को और गिरने से रोकने के लिए पानी का संयम से प्रयोग करें। संधवां ने कहा कि भूजल के दुरुपयोग के कारण पंजाब भर में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है और राज्य के 150 ब्लाकों में से 78 प्रतिशत से अधिक जमीनी पानी नीचे जाने से डार्क जोन में आ गए हैं।
तेजी से गिर रहे भूजल स्तर पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए स्पीकर ने कहा कि किसानों को रिवायती धान की बुआई से सीधी बुआई जैसी उन्नत
तकनीक की तरफ प्रेरित करना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से किसानों को फसली विविधता अपनाने के मकसद से धान की सीधी बुआई (डीएसआर) की तकनीक अपनाने को कहा गया है। इसके लिए सरकार ने किसानों को प्रति एकड़ 1500 रुपये की वित्तीय सहायता देने का एलान भी किया है, ताकि किसान धान की बुआई के रिवायती तरीके छोड़कर पानी की बचत करने के उद्यमों में अपना बनता योगदान डाल सकें।
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उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे फसली विविधता के अंतर्गत विभिन्न फसलों जैसे मूंग, मक्का, दालें और बाजरे सहित वैकल्पिक फसलों की पैदावार करें। संधवां ने कहा कि भू-विज्ञान की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब का पानी 2039 तक खतरनाक स्तर तक नीचे जा सकता है। इसलिए भूजल बचाने के लिए पंजाब के किसानों से अपील है कि वे सिंचाई के लिए नहरी पानी का अधिकतम प्रयोग करें और जमीनी पानी का प्रयोग ज्यादा अति जरूरी हालात में ही किया जाए।
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