फरीदपुर की बेटी रोडवेज में बनीं पहली महिला परिचालक, इन्हें देखकर मिली थी प्रेरणा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहते हैं कि ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से नहीं, हौसलों से उड़ान होती है।’ इस कहावत को चरितार्थ किया है पंचग्रामी चौतरा के गांव फरीदपुर के किसान परिवार में जन्मी 25 वर्षीय सोनिया ढुल ने। वे आज हरियाणा रोडवेज हिसार की पहली महिला परिचालक बन गई हैं और सोमवार से अपनी हिसार डिपो में ड्यूटी ज्वाइन करेंगी।
सोनिया कभी अध्यापिका बनकर अपना करियर संवारना चाहती थीं, लेकिन अब हिसार डिपो की रोडवेज बसों में परिचालक बनकर टिकट काटती नजर आएंगी। कंप्यूटर साइंस विषय में बीटेक पास करने के बाद सोनिया ने भाई अमित को देखकर परिचालक बनने के लिए आवेदन किया था। उसके बाद सोनिया ने न तो पीछे मुड़कर देखा और न ही दिन और रात की परवाह की। आखिरकार छह दिसंबर को हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन ने रोडवेज परिचालकों की लिस्ट जारी की।
खुशी की बात की राज्य में चयनित नौ बेटियों में सोनिया भी परिचालक बनने का सपना पूरा कर चुकी है। वह सोमवार को अपनी ड्यूटी ज्वॉइन करेगी। उसे ट्रेनिंग देकर स्पेशल बस की ड्यूटी दी जाएगी, ताकि शुरुआत में उसका विश्वास बढ़े। -जितेंद्र यादव, वर्कशॉप मैनेजर हिसार।
पिता बोले- बेटी भी बेटों से कम नहीं
मेरी बेटी ने मेरे सारे सपने साकार कर दिए। मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरी बेटी हिसार की पहली महिला परिचालक बन गई हैं। मेरी बेटी ने यह साबित कर दिया है कि बेटी भी बेटों से कम नहीं हैं। -फूलकुमार, सोनिया के पिता
मेरी बेटी पर मुझे आज गर्व हो रहा है। बेटी ने घर के काम के साथ मन लगाकर पढ़ाई की और आज उसने दिखा दिया कि लड़की आज के जमाने में कुछ भी कर सकती है। -राजबाला, सोनिया की माता
मैं सोमवार को ड्यूटी ज्वाइन करूंगी। मेरा मेडिकल हो चुका है। सभी लड़कियों से एक बात कहती हूं कि जब मन में हौसला हो तो कोई काम मुश्किल नहीं होता। मेहनत के बल पर मंजिलें आसानी से मिल जाती हैं। -सोनिया, हिसार की पहली महिला परिचालक