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Hindi News ›   Chandigarh ›   Somvati Amavasya falls on the 15th, marking a rare and auspicious celestial alignment; the Purushottam Maas will also concludeSomvati Amavasya falls on the 15th, marking a rare and auspicious celestial alignment; the Purushottam Maas will also conclude

Chandigarh News: 15 को सोमवती अमावस्या, बनेगा दुर्लभ महासंयोग<bha>;</bha> पुरुषोत्तम मास का होगा समापन

Thu, 11 Jun 2026 02:35 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 02:35 AM IST
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Somvati Amavasya falls on the 15th, marking a rare and auspicious celestial alignment; the Purushottam Maas will also concludeSomvati Amavasya falls on the 15th, marking a rare and auspicious celestial alignment; the Purushottam Maas will also conclude
चंडीगढ़। 17 मई से प्रारंभ हुआ पुरुषोत्तम (अधिक) मास 15 जून को समाप्त हो जाएगा। इस दिन सोमवती अमावस्या, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग तथा मिथुन संक्रांति का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिष एवं धर्म शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किए गए व्रत, जप, तप और दान का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उद्यापन का विशेष महत्व है।
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श्री देवालय पूजक परिषद के सलाहकार आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि 15 जून को प्रातः 8:23 बजे तक अमावस्या रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। इस अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा, हवन, दान और ब्राह्मण भोजन का विशेष महत्व है। श्रीमद्भागवत महापुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों का दान भी पुण्यदायी माना गया है। इसी के साथ मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी समाप्त हो जाएगा। 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष आरंभ होगा। 19 जून से विवाह सहित शुभ मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि दोपहर 12:52 बजे सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इससे मिथुन संक्रांति का शुभ अवसर बनेगा। इस दिन से सौर आषाढ़ मास का भी प्रारंभ होगा।
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उद्यापन और मांगलिक कार्यों का महत्व

आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री के अनुसार 15 जून का दिन उद्यापन के लिए श्रेष्ठ रहेगा। पुरुषोत्तम मास के व्रतों का पूर्ण फल उद्यापन से ही मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, हवन और दान का विशेष विधान है। ब्राह्मणों को भोजन कराना और धार्मिक ग्रंथों का दान करना भी महत्वपूर्ण है। 15 जून के बाद मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो जाएगा। 19 जून से विवाह जैसे शुभ कार्य फिर से शुरू हो सकेंगे।
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सोमवती अमावस्या पर पितृ तर्पण

सेक्टर-32 के प्राचीन श्री हनुमान मंदिर के पुजारी अभय चंद्र झा ने बताया कि अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। इसका फल सूर्य ग्रहण के समान बताया गया है। इस दिन गंगा, यमुना, कुरुक्षेत्र और पुष्कर जैसे तीर्थों में स्नान करना चाहिए। दान और तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।




पीपल पूजन और शिव अराधना के लाभ

सेक्टर-15 के जय श्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित राम बहादुर मिश्र ने पीपल पूजन का महत्व बताया। सोमवती अमावस्या पर कच्ची लस्सी में काले तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करें। पीपल की परिक्रमा करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना चाहिए। भगवान शिव का अभिषेक, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और गायत्री मंत्र जाप करें। सूर्य उपासना से जीवन की बाधाएं दूर होकर सुख, शांति और समृद्धि मिलती है।
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