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Chandigarh-Haryana News: स्वीडन की तर्ज पर संवारे जाएंगे हरियाणा के शहर, हरियाली व जल संरक्षण के लिए होगा काम
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स्वीडन में प्रति 200 मीटर पर पार्क, अत्याधुनिक तकनीक से कचरे का होता है अंडरग्राउंड निस्तारण
स्वीडन से लौटे शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारी बनाएंगे योजना
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। स्वीडन की तर्ज पर अब हरियाणा के शहरों को संवारने की तैयारी हो रही है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारी स्वीडन दाैरे के दाैरान वहां के शहरों में कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण, हरियाली तथा बारिश के पानी के उपयोग पर हो रहे कार्यों का अध्ययन कर लाैटे हैं। अब स्वीडन के इसी माॅडल को हरियाणा में लागू करने की योजना बनाई जाएगी। स्वीडन में अधिकारियों ने दो शहरों का अवलोकन किया। वहां प्रति 200 मीटर पर पार्क बनाया गया है। खुले में कचरे के ढेर के बजाय उसे अंडरग्राउंड डालने की व्यवस्था की गई है। बारिश का पानी पार्कों में ही बड़े टैंकों के माध्यम से संग्रहित किया जा रहा है।
शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, निदेशक शरणदीप कौर बरार, स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक शाश्वत सांगवान आदि ने 14 से 17 अक्तूबर तक स्वीडन का दौरा किया। अधिकारियों ने स्वीडन के स्टॉक होम रॉयल सीपोर्ट और हम्मारबी शोस्टाड में शहरी विकास के माॅडल को देखा। अधिकारियों ने वेस्ट वाटर मैटेरियल, कचरा प्रबंधन, बरसाती पानी के संग्रह, शहरी क्षेत्र में हरियाली और अनुपयोगी वस्तुओं के दोबारा उपयोग पर विस्तार से जानकारी जुटाई। अब हरियाणा में इन बिंदुओं पर काम कराने की संभावनाएं तलाशने के साथ ही कुछ शहरों में मॉडल के रूप में इन पर काम कराने की योजना तैयार की जाएगी।
शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने बताया कि स्वीडन में बारिश के पानी के संग्रहण के लिए पार्कों के अंदर ही अंडरग्राउंड टैंक बने हुए हैं। वहां शहरी क्षेत्र में भी बहुत हरियाली है। कचरे के निष्पादन के लिए अत्याधुनिक तकनीकी का उपयोग हो रहा है। वहां अलग-अलग स्थानों पर लगे कूड़ादानों (डस्टबिन) में घरों से निकलने वाला कचरा डालने के लिए नगरवासियों को एक कार्ड मिलता है। जब कोई व्यक्ति घर से कचरा लेकर जाता है तो वह कूड़ादान पर कार्ड स्वाइप करता है जिससे कूड़ादान खुल जाता है। यह कूड़ादान ऐसी तकनीक से जुड़ा होता है कि इसमें कूड़ा डालने के बाद वह अंडरग्राउंड स्थान पर स्थापित कचरा संग्रह केंद्र पर कचरा पलटकर उसी स्थान पर वापस आ जाता है। कचरे की जो वस्तुएं दोबारा से उपयोग करने योग्य होती हैं, उनसे नए उत्पाद तैयार किए जाते हैं। विभागीय आयुक्त ने कहा कि हरियाणा में भी स्वीडन की तर्ज पर बारिश के पानी के संग्रह, हरियाली, कचरा प्रबंधन आदि के लिए योजना तैयार की जाएगी।
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स्वीडन से लौटे शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारी बनाएंगे योजना
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। स्वीडन की तर्ज पर अब हरियाणा के शहरों को संवारने की तैयारी हो रही है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारी स्वीडन दाैरे के दाैरान वहां के शहरों में कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण, हरियाली तथा बारिश के पानी के उपयोग पर हो रहे कार्यों का अध्ययन कर लाैटे हैं। अब स्वीडन के इसी माॅडल को हरियाणा में लागू करने की योजना बनाई जाएगी। स्वीडन में अधिकारियों ने दो शहरों का अवलोकन किया। वहां प्रति 200 मीटर पर पार्क बनाया गया है। खुले में कचरे के ढेर के बजाय उसे अंडरग्राउंड डालने की व्यवस्था की गई है। बारिश का पानी पार्कों में ही बड़े टैंकों के माध्यम से संग्रहित किया जा रहा है।
शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, निदेशक शरणदीप कौर बरार, स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक शाश्वत सांगवान आदि ने 14 से 17 अक्तूबर तक स्वीडन का दौरा किया। अधिकारियों ने स्वीडन के स्टॉक होम रॉयल सीपोर्ट और हम्मारबी शोस्टाड में शहरी विकास के माॅडल को देखा। अधिकारियों ने वेस्ट वाटर मैटेरियल, कचरा प्रबंधन, बरसाती पानी के संग्रह, शहरी क्षेत्र में हरियाली और अनुपयोगी वस्तुओं के दोबारा उपयोग पर विस्तार से जानकारी जुटाई। अब हरियाणा में इन बिंदुओं पर काम कराने की संभावनाएं तलाशने के साथ ही कुछ शहरों में मॉडल के रूप में इन पर काम कराने की योजना तैयार की जाएगी।
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शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने बताया कि स्वीडन में बारिश के पानी के संग्रहण के लिए पार्कों के अंदर ही अंडरग्राउंड टैंक बने हुए हैं। वहां शहरी क्षेत्र में भी बहुत हरियाली है। कचरे के निष्पादन के लिए अत्याधुनिक तकनीकी का उपयोग हो रहा है। वहां अलग-अलग स्थानों पर लगे कूड़ादानों (डस्टबिन) में घरों से निकलने वाला कचरा डालने के लिए नगरवासियों को एक कार्ड मिलता है। जब कोई व्यक्ति घर से कचरा लेकर जाता है तो वह कूड़ादान पर कार्ड स्वाइप करता है जिससे कूड़ादान खुल जाता है। यह कूड़ादान ऐसी तकनीक से जुड़ा होता है कि इसमें कूड़ा डालने के बाद वह अंडरग्राउंड स्थान पर स्थापित कचरा संग्रह केंद्र पर कचरा पलटकर उसी स्थान पर वापस आ जाता है। कचरे की जो वस्तुएं दोबारा से उपयोग करने योग्य होती हैं, उनसे नए उत्पाद तैयार किए जाते हैं। विभागीय आयुक्त ने कहा कि हरियाणा में भी स्वीडन की तर्ज पर बारिश के पानी के संग्रह, हरियाली, कचरा प्रबंधन आदि के लिए योजना तैयार की जाएगी।
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