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Chandigarh News: सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री कांता कृष्णन का पीजीआई में देहदान
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चंडीगढ़। सेक्टर-8 निवासी सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री कांता कृष्णन (95) का देहदान शनिवार को पीजीआई के एनाटॉमी विभाग में हुआ। स्वर्गीय सरूप कृष्णन की पत्नी कांता कृष्णन के बेटे संजीव कृष्णन, बेटियों अनु गंजू और नीति सरीन, पोते संजय कृष्णन, निखिल सरीन, नितिन सरीन, कुणाल गंजू, पोतियों मालिनी सूद, कनिका लैंग और अंजली कृष्णन की सहमति से उनका देहदान कराया गया। पीजीआई ने परिवार के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया है।
भारत में रक्त की खरीद और बिक्री पर ऐतिहासिक प्रतिबंध में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कांता कृष्णन ने छह दशक तक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर रक्तदान के माध्यम से लोगों की जान बचाने के लिए कार्य किया। 1996 में एक ऐतिहासिक जनहित याचिका दायर करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसके कारण भारत में रक्त की खरीद और बिक्री पर ऐतिहासिक प्रतिबंध लगा। कांता 1964 में ब्लड बैंक सोसाइटी की सचिव बनीं। उनके नेतृत्व में सोसाइटी ने भारत के स्वैच्छिक रक्तदान आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसने चंडीगढ़ को इस जीवन रक्षक पहल के केंद्र में बदल दिया। भारत सरकार ने 1972 में इस उद्देश्य के प्रति उनके समर्पण को मान्यता दी जब उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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भारत में रक्त की खरीद और बिक्री पर ऐतिहासिक प्रतिबंध में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कांता कृष्णन ने छह दशक तक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर रक्तदान के माध्यम से लोगों की जान बचाने के लिए कार्य किया। 1996 में एक ऐतिहासिक जनहित याचिका दायर करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसके कारण भारत में रक्त की खरीद और बिक्री पर ऐतिहासिक प्रतिबंध लगा। कांता 1964 में ब्लड बैंक सोसाइटी की सचिव बनीं। उनके नेतृत्व में सोसाइटी ने भारत के स्वैच्छिक रक्तदान आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसने चंडीगढ़ को इस जीवन रक्षक पहल के केंद्र में बदल दिया। भारत सरकार ने 1972 में इस उद्देश्य के प्रति उनके समर्पण को मान्यता दी जब उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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