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स्मॉग: दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद से अधिक जहरीली 'रोहतक' की हवा

Mon, 13 Nov 2017 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Mon, 13 Nov 2017 09:17 AM IST
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Smog, Rohtak is in the category of the most dangerous area
स्मोग - फोटो : File Photo
स्मॉग का असर मानव जीवन को गहरे संकट में डाल रहा है। दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे भीड़-भाड़ वाले और बडे़ औद्योगिक एरिया को पछाड़ते हुए रोहतक सबसे अधिक खतरनाक एरिया की श्रेणी में आ गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुरूप रोहतक में रविवार को 483 एक्यूआई का मानक दर्ज किया गया। 
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शहर में बढ़ते प्रदूषण का जितना जिम्मेदार आमजन है, उससे अधिक इसके लिए जिम्मेदार नौकरशाह है। क्योंकि समय रहते नियमों को ताक पर रख कर प्रदूषण फैलाने वालों पर कोई लगाम नहीं लगाई जाती। जब समस्या विकट रुप लेती है तो सारी जिम्मेदारी किसानों पर पराली जलाने पर डाल कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जाता है। जबकि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले वाहनों, औद्योगिक इकाइयों, निर्माण कार्यों को इसका जनक मानने को भी कोई तैयार नहीं होता। रविवार को दिल्ली का एक्यूआई 481, गुरुग्राम का 463, फरीदाबाद 470 दर्ज किया गया। जबकि गाजियाबाद में 498 और नोएडा में 487 एक्यूआई दर्ज किया गया। 
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कोई अपनी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं : दहिया
वरिष्ठ सर्जन एवं समाजसेवी डॉ. आरएस दहिया ने बताया कि प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने की नैतिक जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं है। विकसित देश भी पर्यावरण में प्रदूषण का कारण भी तीसरी दुनिया पर थौंप देते हैं। इसकी मुख्य वजह कई हैं, लेकिन हर बार बात किसानों की पराली पर डाल दी जाती है। फिलहाल इससे बचने के लिए जरूरी है कि खुले में न जाएं, जितना समय हो इनडोर एक्टिविटी ही करें। वरिष्ठ सर्जन ने बताया कि एक मानक के अनुसार प्रदूषण के कारणों में 51 फीसदी उद्योग, 25 फीसदी यातायात, एक प्रतिशत उपभोक्ता और कामर्शियल प्रोडक्ट, 11 फीसदी कामर्शियल एंड रेजिडेंटल हीटिंग, चार अन्य व 8 फीसदी ही कृषि से संबंधित होती है।   
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'30 फीसदी बढ़ी मरीजों की ओपीडी'

Smog, Rohtak is in the category of the most dangerous area
पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी बने हैं मजाक
शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों में से कुछ पर पॉल्यूशन सर्टिफिकेट लेना मजाक बना हुआ है। यहां बगैर जांच के रुपये दे कर सर्टिफिकेट लेना आसान है। यही नहीं शहर में घूम रहे भारी वाहन और सबसे अधिक आटो चालकों की बात करें तो इनके पास पॉल्यूशन के सर्टिफिकेट हैं भी या नहीं यह किसी को नहीं पता। प्रशासन दबाव में आकर इनके कागज तक जांचने की जहमत नहीं उठाता। 

फैक्ट्री करवा दी गई हैं बंद, ईंट-भट्ठा पहले से हैं बंद : मलिक
पॉल्यूशन विभाग के एसडीई अजय मलिक ने बताया कि फैक्ट्रियों को बंद करवा दिया गया है। इसके अलावा जिले में 146 ईंट-भट्ठा हैं, ये पहले से ही बंद हैं। जो दो ईंट-भट्ठा संचालित हो रहे हैं, वह नई तकनीक के हैं। इसके अलावा जो प्रदूषण फैला रहे हैं, उनको नोटिस दिया जा रहा है। इन पर जल्द ही कार्रवाई करके सील किया जाएगा। 

30 फीसदी बढ़ी मरीजों की ओपीडी : डॉ. ध्रुव
पीजीआईएमएस में पीसीसीएम विभागाध्यक्ष एवं आपातकालीन विभाग के प्रभारी डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि इन दिनों स्मॉग ने मरीजों की संख्या में 30 फीसदी इजाफा किया है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि सुबह और शाम को आउटडोर कार्य न करें। अभी सांस लेने और आंखों में जलन जैसी समस्या आ रही है। यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में इसके मरीजों की संख्या में इजाफा होगा। आवश्यक होने पर ही बाहर निकले और थ्री लेयर और एन-95 मास्क का प्रयोग करें। बाहर जाने वालों को ध्यान देने की जरूरत है कि यह मास्क भी कोई स्मॉग से बचने का स्थायी समाधान नहीं हैं। जब तक तेज हवा या बरसात नहीं होती, इससे राहत मिलने वाली नहीं है। सुबह और शाम तापमान घटने के दौरान प्रदूषण का स्तर कई गुणा बढ़ जाता है।
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