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अलविदा 2016: ट्रैफिक सिस्टम को ही स्मार्ट नहीं बना पाए, बैठकों में गुजार दिया साल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 28 Dec 2016 11:44 PM IST
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ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट नहीं कर पाया इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम
- फोटो : File Photo
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शहर के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से ट्रैफिक सिस्टम को इंटेलिजेंट बनाए जाने, बसों की सुविधा बढ़ाने के दावे कागजी हो गए। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, सीटीयू और एसटीए की ओर से कई पॉलिसी पर मीटिंग हुई लेकिन यह फाइनल नहीं हो पाई। इस कारण शहर के यात्रियों की समस्या कम नहीं हुई।
ये सुविधाएं नहीं हो पाई पूरी
200 लांग रूट की बसें नहीं खरीदी
सीटीयू की ओर से लांग रूट के लिए 200 बसें खरीदने का प्रपोजल मार्च 2015 में बनाया गया, लेकिन अभी तक इसकी खरीद नहीं की गई है। इसी कारण शहर से लांग रूट पर जाने वाले यात्रियों को समस्या आती है। वहीं चंडीगढ़ की लोकल रूट पर सीटीयू की 392 बसें चल रही हैं। इन बसों को बढ़ाकर 500 किए जाने का लक्ष्य है लेकिन यह बसें नहीं खरीदी गई। इसी कारण यहां पर अभी तक लोगों को हर रूट पर बसें 20 मिनट से लेकर 45 मिनट में मिलती हैं। इन्हें पांच मिनट किए जाने का लक्ष्य है जो पूरा नहीं किया जा सका है।
जीपीआरएस से नहीं जोड़ा जा सका
इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम से सीटीयू की बसों को जीपीआरएस से जोड़ा जाना था। ताकि अगर ड्राइवर और कंडक्टर किसी प्रकार से गड़बड़ी करें तो उन पर कार्रवाई की जा सके। लेकिन इस सिस्टम को भी शुरू नहीं किया जा सका।
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ये सुविधाएं नहीं हो पाई पूरी
200 लांग रूट की बसें नहीं खरीदी
सीटीयू की ओर से लांग रूट के लिए 200 बसें खरीदने का प्रपोजल मार्च 2015 में बनाया गया, लेकिन अभी तक इसकी खरीद नहीं की गई है। इसी कारण शहर से लांग रूट पर जाने वाले यात्रियों को समस्या आती है। वहीं चंडीगढ़ की लोकल रूट पर सीटीयू की 392 बसें चल रही हैं। इन बसों को बढ़ाकर 500 किए जाने का लक्ष्य है लेकिन यह बसें नहीं खरीदी गई। इसी कारण यहां पर अभी तक लोगों को हर रूट पर बसें 20 मिनट से लेकर 45 मिनट में मिलती हैं। इन्हें पांच मिनट किए जाने का लक्ष्य है जो पूरा नहीं किया जा सका है।
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जीपीआरएस से नहीं जोड़ा जा सका
इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम से सीटीयू की बसों को जीपीआरएस से जोड़ा जाना था। ताकि अगर ड्राइवर और कंडक्टर किसी प्रकार से गड़बड़ी करें तो उन पर कार्रवाई की जा सके। लेकिन इस सिस्टम को भी शुरू नहीं किया जा सका।
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दोनों बस स्टैंड पर नहीं चला वाई फाई
ISBT 43
- फोटो : File Photo
दोनों बस स्टैंड पर नहीं चला वाई फाई
शहर के दोनों इंटरस्टेट बस टर्मिनल सेक्टर - 17 और 43 बस स्टैंड पर वाई फाई नहीं चलाया गया। दोनों बस स्टैंड पर सीसीटीवी कैमरे सभी क्षेत्रों में नहीं लगाए गए हैं। वहीं सेक्टर - 17 बस स्टैंड की बाउंड्री वाल भी नहीं बनाई गई है।
बैट्री चालित बसों का प्रपोजल अधर में
शहर में बैट्री चालित 300 बसों को प्रपोजल बनाया गया, लेकिन यह प्रपोजल भी अधर में लटक गया। इसी कारण यह बसें नहीं खरीदी गई। इसी कारण शहर में चल रही सीटीयू की डीजल बसों को बंद नहीं किया गया। इसके प्रदूषण नियंत्रण के लिए अभी तक कोई पॉलिसी नहीं बनाई गई।
ई रिक्शा पॉलिसी फाइनल नहीं
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से ई - रिक्शा पॉलिसी अभी तक फाइनल नहीं हो पाई है। इसकी प्रेजेंटेशन देने के लिए एसटीए और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने 20 से ज्यादा बार मीटिंग की। लेकिन इसको गवर्नर को प्रेजेंटेशन देने की तैयारी नहीं कर पाए। इस कारण इस साल यह पॉलिसी भी फाइनल नहीं हो पाई।
शहर के दोनों इंटरस्टेट बस टर्मिनल सेक्टर - 17 और 43 बस स्टैंड पर वाई फाई नहीं चलाया गया। दोनों बस स्टैंड पर सीसीटीवी कैमरे सभी क्षेत्रों में नहीं लगाए गए हैं। वहीं सेक्टर - 17 बस स्टैंड की बाउंड्री वाल भी नहीं बनाई गई है।
बैट्री चालित बसों का प्रपोजल अधर में
शहर में बैट्री चालित 300 बसों को प्रपोजल बनाया गया, लेकिन यह प्रपोजल भी अधर में लटक गया। इसी कारण यह बसें नहीं खरीदी गई। इसी कारण शहर में चल रही सीटीयू की डीजल बसों को बंद नहीं किया गया। इसके प्रदूषण नियंत्रण के लिए अभी तक कोई पॉलिसी नहीं बनाई गई।
ई रिक्शा पॉलिसी फाइनल नहीं
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से ई - रिक्शा पॉलिसी अभी तक फाइनल नहीं हो पाई है। इसकी प्रेजेंटेशन देने के लिए एसटीए और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने 20 से ज्यादा बार मीटिंग की। लेकिन इसको गवर्नर को प्रेजेंटेशन देने की तैयारी नहीं कर पाए। इस कारण इस साल यह पॉलिसी भी फाइनल नहीं हो पाई।
अवैध ऑटो का आना नहीं हुआ बंद
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट नहीं कर पाया इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम
- फोटो : File Photo
अवैध ऑटो का आना नहीं हुआ बंद
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की ओर से डीजल वाहन चलाने की पॉलिसी बंद करने का सख्ती से पालन करते हुए फरवरी 2016 तक 2000 चालान किए गए । इसके बाद भी शहर के बाहरी सीमाओं पर ऑटो धड़ल्ले से चल रहे हैं। इस कारण शहर में प्रदूषण बढ़ रहा है।
ड्राइवरों की नहीं होती है वेरीफिकेशन
एसटीए और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से सभी ड्राइवरों की वेरिफिकेशन की तैयारी की गई थी। लेकिन 4500 ऑटो पर सभी ड्राइवरों का रिकार्ड इनके पास नहीं है। इस कारण कई बार ऑटो चालक गलत व्यवहार कर भी बच जा रहे हैं।
शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ठीक करने केलिए प्रपोजल तैयार किए गए हैं। इस सभी प्रपोजलों को जल्द ही पूरा किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही मीटिंग कर सभी कामों का प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।
अमित तलवार, निदेशक , चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की ओर से डीजल वाहन चलाने की पॉलिसी बंद करने का सख्ती से पालन करते हुए फरवरी 2016 तक 2000 चालान किए गए । इसके बाद भी शहर के बाहरी सीमाओं पर ऑटो धड़ल्ले से चल रहे हैं। इस कारण शहर में प्रदूषण बढ़ रहा है।
ड्राइवरों की नहीं होती है वेरीफिकेशन
एसटीए और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से सभी ड्राइवरों की वेरिफिकेशन की तैयारी की गई थी। लेकिन 4500 ऑटो पर सभी ड्राइवरों का रिकार्ड इनके पास नहीं है। इस कारण कई बार ऑटो चालक गलत व्यवहार कर भी बच जा रहे हैं।
शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ठीक करने केलिए प्रपोजल तैयार किए गए हैं। इस सभी प्रपोजलों को जल्द ही पूरा किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही मीटिंग कर सभी कामों का प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।
अमित तलवार, निदेशक , चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट