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Reality Check: बातें स्मार्ट सिटी की, टीन की चद्दर की नीचे चल रहे स्कूल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 11 May 2017 03:28 PM IST
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टीन की चद्दर की नीचे स्कूल
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बेशक चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने की बातें हो रही हैं, लेकिन यहां के स्कूलों की हालत तो कुछ और ही हकीकत बयां कर रही है। शहर के गांवों और कॉलोनियों के स्कूलों में इंस्फ्रास्ट्रक्चर की कमी का सामना स्टूडेंट्स कर रहे हैं। अमर उजाला टीम की ओर से गवर्नमेंट हाईस्कूल हल्लोमाजरा की ग्राउंड रिपोर्ट जांची गई। इसमें यह बात सामने आई। हल्लोमाजरा हाईस्कूल तीन जगह पर चलाया जाता है। हल्लोमाजरा के बाहर इस स्कूल में छत पर टीन पड़ी है।
इस गर्मी में बच्चे इसके नीचे बैठकर पढ़ते हैं। इस तरह के हालात में स्टूडेंट्स को कैसे बेहतरीन एजुकेशन मिल सकती है। वहीं स्कूल परिसर में गंदगी का आलम बना हुआ है। वहीं इस जगह पर लगाए गए वाटर कूलर भी खराब पडे़ हैं। इन वाटर कूलर में गर्मी में स्टूडेंट्स को ठंडा पानी नहीं मिलता है। वही एक डिस्पेंसरी के अंदर बिल्डिंग हैं। यहां पर स्टूडेंट्स को वाटर कूलर्स भी नहीं मिल रहा है। वहीं हल्लोमाजरा के अंदर बने स्कूल में कोई प्ले ग्राउंड नहीं है। इस स्कूल में तीन हजार स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं।
यहां पर अगर कोई इमरजेंसी हालात बन जाए तो केवल एक ही रास्ता सीढ़ी का है। इसमें से तीन हजार बच्चों का आना जाना है। अगर यह बिल्डिंग रिस्क जोन में आती है। डिपार्टमेंट को यह जानकारी है लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस तरह के हालात में परेशानी हो सकती है। स्कूल में पढ़ने वाले छठवीं क्लास के स्टूडेंटस संदीप कुमार ने बताया कि स्कूल का वाटर कूलर खराब पड़ा है। वहीं टॉयलेट में भी गंदगी है। यह भी टूटा हुआ है। इसे अभी तक ठीक नहीं कराया गया है। इस कारण परेशानी होती है।
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इस गर्मी में बच्चे इसके नीचे बैठकर पढ़ते हैं। इस तरह के हालात में स्टूडेंट्स को कैसे बेहतरीन एजुकेशन मिल सकती है। वहीं स्कूल परिसर में गंदगी का आलम बना हुआ है। वहीं इस जगह पर लगाए गए वाटर कूलर भी खराब पडे़ हैं। इन वाटर कूलर में गर्मी में स्टूडेंट्स को ठंडा पानी नहीं मिलता है। वही एक डिस्पेंसरी के अंदर बिल्डिंग हैं। यहां पर स्टूडेंट्स को वाटर कूलर्स भी नहीं मिल रहा है। वहीं हल्लोमाजरा के अंदर बने स्कूल में कोई प्ले ग्राउंड नहीं है। इस स्कूल में तीन हजार स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं।
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यहां पर अगर कोई इमरजेंसी हालात बन जाए तो केवल एक ही रास्ता सीढ़ी का है। इसमें से तीन हजार बच्चों का आना जाना है। अगर यह बिल्डिंग रिस्क जोन में आती है। डिपार्टमेंट को यह जानकारी है लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस तरह के हालात में परेशानी हो सकती है। स्कूल में पढ़ने वाले छठवीं क्लास के स्टूडेंटस संदीप कुमार ने बताया कि स्कूल का वाटर कूलर खराब पड़ा है। वहीं टॉयलेट में भी गंदगी है। यह भी टूटा हुआ है। इसे अभी तक ठीक नहीं कराया गया है। इस कारण परेशानी होती है।
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नहीं मिली है अभी तक ग्रांट
school
- फोटो : amarujala
सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) की ओर से नॉन मॉडल स्कूलों में प्रिंट बाला प्रोजेक्ट के तहत दो लाख रुपये इन स्कूलों का नहीं दिया जाता है। इस बार एमएचआरडी की ग्रांट नहीं मिलने के कारण शिक्षा विभाग नॉन मॉडल और पेरीफेरी के स्कूलों को यह ग्रांट नहीं दे पाया है। इस कारण इस तरह के हालात में सुधार नहीं है।
आरटीई लागू करने में फेल
शिक्षा के अधिकार के तहत एक क्लास में 40 छात्रों पर एक शिक्षक होता है। लेकिन हल्लोमाजरा में छात्रों की संख्या एक क्लास में करीब 70 के है। शिक्षा विभाग को यह जानकारी होने के बाद भी इस पर कुछ नहीं किया जा सका है। इस कारण स्टूडेंट्स की पढ़ाई भी बाधित है।
स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द सुधारा जाएगा। यहां पर नए हाईस्कूल बनाए जाने का प्लान बनाया गया है। जो भी स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर में कमी है। उसे सुधारा जाएगा।
- रूबिंदर जीत सिंह बराड़, डीएसई, चंडीगढ़ शिक्षा विभाग
आरटीई लागू करने में फेल
शिक्षा के अधिकार के तहत एक क्लास में 40 छात्रों पर एक शिक्षक होता है। लेकिन हल्लोमाजरा में छात्रों की संख्या एक क्लास में करीब 70 के है। शिक्षा विभाग को यह जानकारी होने के बाद भी इस पर कुछ नहीं किया जा सका है। इस कारण स्टूडेंट्स की पढ़ाई भी बाधित है।
स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द सुधारा जाएगा। यहां पर नए हाईस्कूल बनाए जाने का प्लान बनाया गया है। जो भी स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर में कमी है। उसे सुधारा जाएगा।
- रूबिंदर जीत सिंह बराड़, डीएसई, चंडीगढ़ शिक्षा विभाग