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अफसरों की लापरवाही से चंडीगढ़ पर लगा दाग, 100 करोड़ हैं खाते में...फिर भी प्रोजेक्ट ठप
Sun, 10 Feb 2019 10:31 AM IST
खुशबू गोयल
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 10 Feb 2019 10:31 AM IST
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साल 2016 में चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी का तोहफा मिला तो लगा शहर के विकास को पंख लग जाएंगे, लेकिन ढाई साल से शहर में प्रोजेक्ट अफसरों की फाइलों में कैद होकर बोझ बढ़ा रहा है। 100 करोड़ से अधिक रुपया सरकारी खातों में डंप पड़ा है। अगर बीते सालों की बात करें तो पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को परवान चढ़ाने के लिए अफसर बड़े-बड़े दावे करते रहे लेकिन यह सभी दावे हवाहवाई साबित हुए। यही वजह है कि 100 स्मार्ट शहरों की रैंकिंग में चंडीगढ़ को 67वां स्थान मिला है। सिटी ब्यूटीफुल के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
हालांकि बीते दिसंबर माह में कार्यभार संभालने वाले एडवाइजर मनोज परिदा ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कई महत्वपूर्ण टेंडर जारी कर दिए हैं लेकिन इन्हें अभी धरातल पर आने में टाइम लगेगा। मई 2016 में स्मार्ट सिटी के तहत चंडीगढ़ को 13 फास्ट ट्रैक विनिंग सिटी में चुना गया था। चंडीगढ़ के लिए 6200 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इन योजनाओं के तहत चंडीगढ़ में पीने योग्य पानी की व्यवस्था, अशुद्ध जल का शोधन, बिजली, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी डिजाइन और रेट्रोफिट डेवलपमेंट, परिवहन, सेक्टर-43 सब-सिटी सेंटर, सिटी सर्विलांस, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट और ई-गवर्नेंस अप्लिकेशन को विकसित करना शामिल हैं।
ढाई साल में जमीन तक नहीं हुई ट्रांसफर
शहर के जिस स्थान पर यूटी प्रशासन ने स्मार्ट सिटी का 90 प्रतिशत बजट खर्च करने की रूपरेखा बनाई है, ढाई साल में उस जमीन का ट्रांसफर तक नहीं हो पाया है। ऐसे में इस प्रोजेक्ट से जुड़े अफसर कितनी तेजी दिखा रहे थे, यह तो समझ में आ ही जाना चाहिए। हम बात कर रहे हैं सेक्टर-43 के डेवलपमेंट की। स्मार्ट सिटी के अंदर चंडीगढ़ की डेवलपमेंट के लिए कुल 6200 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित हुआ था, जिसमें से 5200 करोड़ रुपये इसी सेक्टर-43 की डेवलपमेंट पर लगाए जाने हैं। बार-बार फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से निवेदन के बावजूद यह लैंड अभी तक ट्रांसफर नहीं हुई है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने चंडीगढ़ प्रशासन से इस प्रोजेक्ट के लिए 71 एकड़ भूमि हैंडओवर करने की मांग की थी।
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हालांकि बीते दिसंबर माह में कार्यभार संभालने वाले एडवाइजर मनोज परिदा ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कई महत्वपूर्ण टेंडर जारी कर दिए हैं लेकिन इन्हें अभी धरातल पर आने में टाइम लगेगा। मई 2016 में स्मार्ट सिटी के तहत चंडीगढ़ को 13 फास्ट ट्रैक विनिंग सिटी में चुना गया था। चंडीगढ़ के लिए 6200 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इन योजनाओं के तहत चंडीगढ़ में पीने योग्य पानी की व्यवस्था, अशुद्ध जल का शोधन, बिजली, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी डिजाइन और रेट्रोफिट डेवलपमेंट, परिवहन, सेक्टर-43 सब-सिटी सेंटर, सिटी सर्विलांस, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट और ई-गवर्नेंस अप्लिकेशन को विकसित करना शामिल हैं।
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ढाई साल में जमीन तक नहीं हुई ट्रांसफर
शहर के जिस स्थान पर यूटी प्रशासन ने स्मार्ट सिटी का 90 प्रतिशत बजट खर्च करने की रूपरेखा बनाई है, ढाई साल में उस जमीन का ट्रांसफर तक नहीं हो पाया है। ऐसे में इस प्रोजेक्ट से जुड़े अफसर कितनी तेजी दिखा रहे थे, यह तो समझ में आ ही जाना चाहिए। हम बात कर रहे हैं सेक्टर-43 के डेवलपमेंट की। स्मार्ट सिटी के अंदर चंडीगढ़ की डेवलपमेंट के लिए कुल 6200 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित हुआ था, जिसमें से 5200 करोड़ रुपये इसी सेक्टर-43 की डेवलपमेंट पर लगाए जाने हैं। बार-बार फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से निवेदन के बावजूद यह लैंड अभी तक ट्रांसफर नहीं हुई है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने चंडीगढ़ प्रशासन से इस प्रोजेक्ट के लिए 71 एकड़ भूमि हैंडओवर करने की मांग की थी।
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सेक्टर- 43 में डेवलपमेंट की यह है रूपरेखा
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सेक्टर-43 के डेवलपमेंट की योजना है, जिसके तहत यहां बिजनेस इन्वायरमेंट विकसित करने के लिए कन्वेंशन सेंटर, मिक्स इनकम हाउसिंग, सर्विस्ड अपार्टमेंट्स, होटल, फूड एंड ब्रेवरेज, ऑफिस एंड रिटेल और म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी आदि का निर्माण किया जाना है। इसके अलावा यहां पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रमोट करना और पैदल चलने वालों के लिए उचित सुविधाएं प्रदान करना भी शामिल है।
टेंडर तो जारी कर दिए पर काम शुरू नहीं हुआ
शहर में 13,700 स्मार्ट वाटर मीटर लगाने के लिए 31 दिसंबर को 24 करोड़ रुपये के टेंडर किए गए। पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम के तहत 5 हजार बाइक और 617 डॉकिंग लोकेशन के लिए पीपीपी मोड पर 20 करोड़ के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। ड्डडूमाजरा में 5 करोड़ की लागत से इंसिनरेटर लगाया जा रहा है, जहां मरे जानवरों को जलाया जाएगा। यह बीओटी बेस पर होगा।
मनीमाजरा में 24 घंटे और सातों दिन 140 करोड़ की लागत से टेंडर निकाल दिए गए हैं। 511 करोड़ की लागत से वर्तमान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के अपग्रेडेशन और एक नए एसटीपी का टेंडर जारी किया गया है। यह डिजाइन, बिल्ट एंड आपरेट बेसिस पर होगा। खास बात यह है कि इन कामों के लिए टेंडर तो जारी कर दिए गए हैं लेकिन अब तक इन पर काम नहीं शुरू हो पाया है।
अभी शुरू नहीं हो सका टायलेट ब्लॉक का निर्माणकार्य
सिटी की सेहत सुधारने के लिए सेक्टर 17, 22, 35 और 43 में पब्लिक टायलेट ब्लॉक नए सिरे से तैयार किए जाने हैं। इस पर 6 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनमें बैंक एटीएम, वॉटर एटीएम, बे-शाप्स, पावर सप्लाई के लिए रूफ टॉप सोलर प्लांट लगेगा। पुरुषों और महिलाओं के साथ दिव्यांगों के लिए भी अलग टायलेट की सुविधा मिलेगी। ये पब्लिक टायलेट ब्लॉक पीपीपी मोड पर तैयार किए जाएंगे। इनका काम भी अभी शुरू नहीं हो सका है।
टेंडर तो जारी कर दिए पर काम शुरू नहीं हुआ
शहर में 13,700 स्मार्ट वाटर मीटर लगाने के लिए 31 दिसंबर को 24 करोड़ रुपये के टेंडर किए गए। पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम के तहत 5 हजार बाइक और 617 डॉकिंग लोकेशन के लिए पीपीपी मोड पर 20 करोड़ के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। ड्डडूमाजरा में 5 करोड़ की लागत से इंसिनरेटर लगाया जा रहा है, जहां मरे जानवरों को जलाया जाएगा। यह बीओटी बेस पर होगा।
मनीमाजरा में 24 घंटे और सातों दिन 140 करोड़ की लागत से टेंडर निकाल दिए गए हैं। 511 करोड़ की लागत से वर्तमान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के अपग्रेडेशन और एक नए एसटीपी का टेंडर जारी किया गया है। यह डिजाइन, बिल्ट एंड आपरेट बेसिस पर होगा। खास बात यह है कि इन कामों के लिए टेंडर तो जारी कर दिए गए हैं लेकिन अब तक इन पर काम नहीं शुरू हो पाया है।
अभी शुरू नहीं हो सका टायलेट ब्लॉक का निर्माणकार्य
सिटी की सेहत सुधारने के लिए सेक्टर 17, 22, 35 और 43 में पब्लिक टायलेट ब्लॉक नए सिरे से तैयार किए जाने हैं। इस पर 6 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनमें बैंक एटीएम, वॉटर एटीएम, बे-शाप्स, पावर सप्लाई के लिए रूफ टॉप सोलर प्लांट लगेगा। पुरुषों और महिलाओं के साथ दिव्यांगों के लिए भी अलग टायलेट की सुविधा मिलेगी। ये पब्लिक टायलेट ब्लॉक पीपीपी मोड पर तैयार किए जाएंगे। इनका काम भी अभी शुरू नहीं हो सका है।
डंपिंग ग्राउंड की समस्या भी जस की तस
डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड को बीओटी बेसिस पर 40 करोड़ रुपये की लागत से साफ कराया जाना है। यहां लैंड को रिकवर किया जाएगा। डड्डूमाजरा के लोगों को फिलहाल डंपिंग ग्राउंड की वजह से बड़ी दिक्कतें पेश आ रही हैं। गंदगी की वजह से इलाके के लोगों को जबरदस्त बदबू सहनी पड़ती है। बीमारियां होने का अलग खतरा रहता है। इस वेस्ट को उठाने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट दिखाई गई लेकिन यह प्रोजेक्ट भी अफसरशाही के भेंट चढ़ गया है।
यह काम भी नहीं हो पाए हैं शुरू
मरे जानवरों को दबाने के लिए प्रीलिमनरी डिजाइन रिपोर्ट का भी खाका पेश किया गया था। डड्डूमाजरा में 5 करोड़ रुपये की लागत से यह प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। स्मार्ट सिटी के बोर्ड ने इसे भी मंजूरी दे दी है। चेयरमैन ने बताया कि जानवरों को फिलहाल शहर में जमीन में दबाया जाता है, जिससे बदबू पैदा होती है। कुत्ते इन दबे जानवरों को निकाल लेते हैं। इस प्लांट में मरे जानवरों को पीएनजी और एलपीजी की मदद से जलाया जाएगा।
वॉटर सप्लाई शहर की प्रमुख समस्या
टर्शरी वाटर की क्वालिटी और प्रॉपर सप्लाई के लिए अंडरग्राउंड स्टोरेज रिजर्व वायर्ज में सेंसर लगाए जा रहे हैं। टर्शरी वाटर मेन लाइन पर भी सेंसर लगाए जाएंगे। प्रेशर, लो, क्लोरीन इत्यादि की जांच के लिए 21 प्वाइंट्स पर रिमोट टर्मिनल यूनिट लगेंगे। सेक्टर 28 ए के पंप हाउस में कंट्रोल रूम होगा जहां से सारी मानीटरिंग होगी।
यह काम भी नहीं हो पाए हैं शुरू
मरे जानवरों को दबाने के लिए प्रीलिमनरी डिजाइन रिपोर्ट का भी खाका पेश किया गया था। डड्डूमाजरा में 5 करोड़ रुपये की लागत से यह प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। स्मार्ट सिटी के बोर्ड ने इसे भी मंजूरी दे दी है। चेयरमैन ने बताया कि जानवरों को फिलहाल शहर में जमीन में दबाया जाता है, जिससे बदबू पैदा होती है। कुत्ते इन दबे जानवरों को निकाल लेते हैं। इस प्लांट में मरे जानवरों को पीएनजी और एलपीजी की मदद से जलाया जाएगा।
वॉटर सप्लाई शहर की प्रमुख समस्या
टर्शरी वाटर की क्वालिटी और प्रॉपर सप्लाई के लिए अंडरग्राउंड स्टोरेज रिजर्व वायर्ज में सेंसर लगाए जा रहे हैं। टर्शरी वाटर मेन लाइन पर भी सेंसर लगाए जाएंगे। प्रेशर, लो, क्लोरीन इत्यादि की जांच के लिए 21 प्वाइंट्स पर रिमोट टर्मिनल यूनिट लगेंगे। सेक्टर 28 ए के पंप हाउस में कंट्रोल रूम होगा जहां से सारी मानीटरिंग होगी।