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कारगिल की विजय गाथा सुनाने 30 दिन के सफर पर निकले 6 जवान, 30 हजार किमी की दूरी करेंगे तय
Fri, 28 Jun 2019 11:12 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 28 Jun 2019 11:12 AM IST
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भारतीय सेना के जवान
- फोटो : अमर उजाला
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कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे होने जा रहे हैं और इस युद्ध की विजय गाथा सुनाने के लिए छह जवान 30 दिन की यात्रा पर निकल गए हैं। इस साल भारतीय सेना ऑपरेशन विजय के 20 साल पूरे होने का जश्न काफी जोर शोर से मना रही है। 21 जून को लेह से शुरू हुई यात्रा 19 जुलाई को अहमदाबाद में संपन्न होगी।
इस यात्रा के दौरान सेना के जवान सेक्टर-11 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज पहुंचे। पूरी यात्रा के दौरान ये जवान 7 राज्यों के 16 शहरों से होते हुए 30 हजार किलोमीटर का सफर तय करेंगे। बुधवार को इन जवानों ने पीजीजीसी-11 में एनसीसी कैडेटों के साथ बातचीत की और भारतीय सेना की शौर्य गाथा सुनाई।
एनसीसी कैडेटों को भारतीय सेना पर फिल्माई गई एक वीडियो भी दिखाई गई, जिसने सभी कैडेटों में जोश से भर दिया। पीजीजीसी-11 का ऑडिटोरियम ‘हाउज द जोश- हाई सर’ के नारों से गूंज उठा। जवानों की टीम ने एनसीसी कैडेटों को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
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साथ ही यह भी बताया कि 12वीं या ग्रेजुएशन करने के बाद वह कैसे सेना में शामिल हो सकते हैं। कैप्टन शौनक भाटे ने सियाचिन ग्लेशियर में अपनी सर्विस के अनुभव के बारे में भी बताया। कार्यक्रम के आखिर में एक सवाल-जवाब सेशन भी रखा गया, जिसमें एनसीसी कैडेटों ने उनसे कई सवाल पूछे।
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इस यात्रा के दौरान सेना के जवान सेक्टर-11 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज पहुंचे। पूरी यात्रा के दौरान ये जवान 7 राज्यों के 16 शहरों से होते हुए 30 हजार किलोमीटर का सफर तय करेंगे। बुधवार को इन जवानों ने पीजीजीसी-11 में एनसीसी कैडेटों के साथ बातचीत की और भारतीय सेना की शौर्य गाथा सुनाई।
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एनसीसी कैडेटों को भारतीय सेना पर फिल्माई गई एक वीडियो भी दिखाई गई, जिसने सभी कैडेटों में जोश से भर दिया। पीजीजीसी-11 का ऑडिटोरियम ‘हाउज द जोश- हाई सर’ के नारों से गूंज उठा। जवानों की टीम ने एनसीसी कैडेटों को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
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साथ ही यह भी बताया कि 12वीं या ग्रेजुएशन करने के बाद वह कैसे सेना में शामिल हो सकते हैं। कैप्टन शौनक भाटे ने सियाचिन ग्लेशियर में अपनी सर्विस के अनुभव के बारे में भी बताया। कार्यक्रम के आखिर में एक सवाल-जवाब सेशन भी रखा गया, जिसमें एनसीसी कैडेटों ने उनसे कई सवाल पूछे।
ये है यात्रा का रूट
कैप्टन शौनक भाटे की अगुवाई में कैप्टन विष्णु, नायब सूबेदार अशोक थापा, सैपर्स अलाउद्दीन, सैपर्स अमनदीप सिंह और सैपर्स अमनदीप सिंह अपनी-अपनी बाइक पर 21 जून को लेह से रवाना हुए थे। इस टीम को जीओसी फायर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने हरी झंडी दिखाई थी।
जवानों की यह यात्रा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान से होते हुए गुजरात के अहमदाबाद में पहुंचेगी। इस दौरान जवान इन राज्यों की एनसीसी यूनिटों में जाकर कैडेटों से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चचेरे भाई हैं कैप्टन विष्णु
टीम में शामिल कैप्टन विष्णु मुंबई हमले में शहीद हुए परणोपरांत अशोक चक्र विजेता मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चचेरे भाई हैं। कैप्टन विष्णु ने बताया कि 12वीं कक्षा के बाद एनडीए करके वह सेना में शामिल हुए। परिवार का एक जवान बेटा पहले ही शहीद हो चुका था, बावजूद इसके परिजनों ने उनका पूरा साथ दिया और सेना ज्वॉइन करने दिया।
कैप्टन शौनक ने बताया कि उनके पिता समेत परिवार के कई लोग सेना में हैं। इसलिए उन्होंने बचपन से ही फौज में भर्ती होने के बारे में सोचा था। सैपर्स अलाउद्दीन ने बताया कि कॉलेज में एनसीसी की वजह से वह भारतीय सेना में शामिल हुए। सैपर्स अमनदीप सिंह ने बताया कि उन्हें एडवेंचर पसंद था, इसलिए वह भारतीय सेना में आए।
जवानों की यह यात्रा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान से होते हुए गुजरात के अहमदाबाद में पहुंचेगी। इस दौरान जवान इन राज्यों की एनसीसी यूनिटों में जाकर कैडेटों से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चचेरे भाई हैं कैप्टन विष्णु
टीम में शामिल कैप्टन विष्णु मुंबई हमले में शहीद हुए परणोपरांत अशोक चक्र विजेता मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चचेरे भाई हैं। कैप्टन विष्णु ने बताया कि 12वीं कक्षा के बाद एनडीए करके वह सेना में शामिल हुए। परिवार का एक जवान बेटा पहले ही शहीद हो चुका था, बावजूद इसके परिजनों ने उनका पूरा साथ दिया और सेना ज्वॉइन करने दिया।
कैप्टन शौनक ने बताया कि उनके पिता समेत परिवार के कई लोग सेना में हैं। इसलिए उन्होंने बचपन से ही फौज में भर्ती होने के बारे में सोचा था। सैपर्स अलाउद्दीन ने बताया कि कॉलेज में एनसीसी की वजह से वह भारतीय सेना में शामिल हुए। सैपर्स अमनदीप सिंह ने बताया कि उन्हें एडवेंचर पसंद था, इसलिए वह भारतीय सेना में आए।
यात्रा पर निकले जवान, देश के चारों कोनों से
30 दिन की यात्रा पर निकले ये सभी छह जवान देश के चारों कोनों से संबंध रखते हैं। कैप्टन शौनक भाटे पुणे (महाराष्ट्र) से हैं, जबकि कैप्टन विष्णु केरल से, नायब सूबेदार अशोक थापा उत्तराखंड से हैं और इनको सेना ज्वॉइन किए 26 साल हो गए हैं। सैपर्स अलाउद्दीन असम से तो सैपर्स अमनदीप सिंह और सैपर्स अमनदीप सिंह दोनों पंजाब से हैं।
सभी जवान देश के चारों कोनों से निकले हैं और इनके फोकस युवा हैं, जो करगिल युद्ध के दौरान या तो पैदा ही हुए थे या बहुत छोटे थे। इन्हें युद्ध के बारे में और हमारे जांबाजों के बारे में खास जानकारी नहीं है। विजय दिवस 26 जुलाई को है, इसी दिन ऑपरेशन विजय खत्म हुआ था।
यह है कारगिल युद्ध का इतिहास
20 साल पहले 1999 में 26 जुलाई के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी। इसलिए हर साल 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान ने की थी। 3 मई 1999 को युद्ध शुरू हुआ था और भारत ने युद्ध का अंत 26 जुलाई 1999 को करीब 3 महीने बाद किया था।
इस युद्ध में भारतीय सेना के कुल 527 सैनिक शहीद हुए थे। 1363 लोग घायल हुए थे। इस युद्ध को हर भारतवासी गर्व के साथ हर साल याद करता है। आगामी 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस मनाएगा।
सभी जवान देश के चारों कोनों से निकले हैं और इनके फोकस युवा हैं, जो करगिल युद्ध के दौरान या तो पैदा ही हुए थे या बहुत छोटे थे। इन्हें युद्ध के बारे में और हमारे जांबाजों के बारे में खास जानकारी नहीं है। विजय दिवस 26 जुलाई को है, इसी दिन ऑपरेशन विजय खत्म हुआ था।
यह है कारगिल युद्ध का इतिहास
20 साल पहले 1999 में 26 जुलाई के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी। इसलिए हर साल 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान ने की थी। 3 मई 1999 को युद्ध शुरू हुआ था और भारत ने युद्ध का अंत 26 जुलाई 1999 को करीब 3 महीने बाद किया था।
इस युद्ध में भारतीय सेना के कुल 527 सैनिक शहीद हुए थे। 1363 लोग घायल हुए थे। इस युद्ध को हर भारतवासी गर्व के साथ हर साल याद करता है। आगामी 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस मनाएगा।