{"_id":"58f07e934f1c1bbc7fcf7cc3","slug":"sister-donated-brother-s-body-organs-to-chandigarh-pgi","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेमिसालः बहन ने कराए भाई के अंगदान, 5 लोगों को मिली नई जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेमिसालः बहन ने कराए भाई के अंगदान, 5 लोगों को मिली नई जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 14 Apr 2017 01:17 PM IST
विज्ञापन
अंगदान
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहन की जिंदादिली देखिए, भाई के अंगदान कराएं और दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी वह पांच लोगों की जिंदगी रोशन कर दिया। पीजीआई चंडीगढ़ की ओर से आर्गन डोनेशन के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का असर अब लोगों में दिखने लगा है। वीरवार को रंजीत सिंह के परिजनों ने उनके अंगों को डोनेट कर पांच जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दिया है। 32 वर्षीय रंजीत सिंह सात अप्रैल को दूसरी मंजिल से गिर गए थे। इससे वे काफी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
उन्हें पीजीआई में दाखिल कराया गया। डाक्टरों ने काफी कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। 13 अप्रैल को उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। उसके बाद ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने रंजीत सिंह के परिजनों से आर्गन डोनेशन के मसले पर बातचीत की। परिजन इस बात के लिए राजी हो गए। स्वीकृति मिलते ही रंजीत को आपरेशन थियेटर ले जाया गया और उनके लिवर, किडनी, पेनक्रियाज और कोर्निया सुरक्षित निकाल लिए गए।
लिवर, किडनी और पेनक्रियाज के लिए जरूरतमंद मरीज पीजीआई में ही मिल गए। पीजीआई की दूसरी टीम ने ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया। इससे तीन मरीजों को दूसरी जिंदगी मिली, जबकि कोर्निया को संभाल कर रख दिया गया है। जैसे ही उनका मरीज मिलेगा, उसे ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। रंजीत सिंह मूल रूप से उत्तराखंड के रानीखेत के रहने वाले हैं।
विज्ञापन
रंजीत सिंह की बहन हीमा देवी ने बताया कि उनके भाई के जाने से उनका परिवार बहुत दुखी है, लेकिन इस बात का सुकून है कि वे उन्हें उन लोगों में जिंदा देख पाएंगे, जिनकी रंजीत सिंह ने जाते-जाते मदद की है। पीजीआई रोटो के नोडल आफिसर डा. विपिन कौशल ने कहा कि आर्गन डोनेशन के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। इससे असली जरूरतमंदों को मदद मिल रही है।
विज्ञापन
उन्हें पीजीआई में दाखिल कराया गया। डाक्टरों ने काफी कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। 13 अप्रैल को उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। उसके बाद ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने रंजीत सिंह के परिजनों से आर्गन डोनेशन के मसले पर बातचीत की। परिजन इस बात के लिए राजी हो गए। स्वीकृति मिलते ही रंजीत को आपरेशन थियेटर ले जाया गया और उनके लिवर, किडनी, पेनक्रियाज और कोर्निया सुरक्षित निकाल लिए गए।
विज्ञापन
लिवर, किडनी और पेनक्रियाज के लिए जरूरतमंद मरीज पीजीआई में ही मिल गए। पीजीआई की दूसरी टीम ने ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया। इससे तीन मरीजों को दूसरी जिंदगी मिली, जबकि कोर्निया को संभाल कर रख दिया गया है। जैसे ही उनका मरीज मिलेगा, उसे ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। रंजीत सिंह मूल रूप से उत्तराखंड के रानीखेत के रहने वाले हैं।
विज्ञापन
रंजीत सिंह की बहन हीमा देवी ने बताया कि उनके भाई के जाने से उनका परिवार बहुत दुखी है, लेकिन इस बात का सुकून है कि वे उन्हें उन लोगों में जिंदा देख पाएंगे, जिनकी रंजीत सिंह ने जाते-जाते मदद की है। पीजीआई रोटो के नोडल आफिसर डा. विपिन कौशल ने कहा कि आर्गन डोनेशन के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। इससे असली जरूरतमंदों को मदद मिल रही है।