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कब्जे हटाने पर एमसीए कर्मियों से भिड़े दुकानदार
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला
Updated Sat, 30 Aug 2014 01:03 AM IST
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म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) की टीम ने शहर के रेलवे रोड पर शुक्रवार को जेसीबी मशीन से दुकानदारों के बाहर की ओर बढ़े हुए कब्जों को हटा दिया। इससे भड़के दुकानदारों ने वहां जमकर हंगामा खड़ा कर दिया और नगर निगम की टीम का घेराव किया।
वबाल उस वक्त ज्यादा भड़क गया जब शहर के पूर्व विधायक मास्टर शिव प्रसाद की चाय व हलवाई की दुकान पर जेसीबी मशीन चला दी गई। उसके बेटे अनिल प्रसाद का आरोप है कि उन्होंने एमसीए की टीम को आश्वस्त कर दिया था कि उनकी दुकान के जो शेड थोड़े आगे बढ़े हुए हैं, वे खुद कुछ ही दिनों में उसे वहां से हटा देंगे, लेकिन इनेलो और जनचेतना पार्टी के नेताओं व कार्यकर्त्ताओं की वजह से एमसीए उनकी दुकान पर कार्रवाई करने पर मजबूर हो गया और उनकी दुकान पर भी तोड़फोड़ की गई। उधर, दुकानदारों ने एमसीए कर्मियों पर यह भी आरोप लगाया कि पूरे शहर के सभी बाजार अतिक्रमण से बहुत ज्यादा ग्रस्त है, लेकिन वहां तो आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुकानदारों ने डीसी व एमसीए अफसरों पर अतिक्रमण हटाने पर पक्षपात किए जाने का आरोप लगाया है।
तनावपूर्ण बनी स्थिति, पुलिस से उलझे दुकानदार
एमसीए की टीम शुक्रवार को भारी पुलिस बल के साथ रेलवे रोड पर पहुंची और सड़क की ओर बढ़े दुकानदारों के अवैध कब्जे तुड़वाने शुरू कर दिए। टीम की इस कार्रवाई से दुकानदारों का गुस्सा भड़क गया और वे पहले एमसीए अफसरों और फिर पुलिस से ही भिड़ गए। पुलिस के एसीपी हितेश यादव ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन बहस बढ़ती गई। उधर, एमसीए की कार्रवाई का विरोध कर रहे मास्टर शिव प्रसाद के बेटे अनिल प्रसाद की भी पुलिस तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने इस दौरान जैसे ही उन्हें पकड़कर घसीटना शुरू किया तो भाजपा समर्थक भड़क गए और वहां ज्यादा वबाल हो गया।
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तोड़फोड़ में नेताओं ने चमकाई राजनीति
इस मामले में भाजपा और इनेलो नेताओं ने खूब राजनीति की। भाजपा नेता एडवोकेट संदीप सचदेवा, पवित्र सिंह बाजवा, कुशल जैन, बलजीत सिंह बलाना, हरीश खन्ना, राज वालिया, सुधीर चौपड़ा, सुशील अग्रवाल, बृजमोहन धीमान ने कहा कि प्रशासन तो अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ लीपापोती कर रहा था, लेकिन इनेलो व जनचेतना पार्टी के कार्यकर्त्ता व नेताओं की वजह से तोड़फोड़ हुई है। क्योंकि यही नेता तोड़फोड़ में पक्षपात होने की शिकायत लेकर डीसी अंबाला के पास गए थे, जिसके बाद सभी दुकानों को गिरा दिया गया। उधर, इनेलो नेता मक्खन सिंह लबाना भी मौके पर खूब राजनीति करते नजर आए और इसी प्रकरण में थोड़ी देर बाद ही उन्होंने इस कार्रवाई के विरोध में रेलवे रोड पर जाम लगा दिया। जिसे बाद में हटवा दिया गया।
अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार कौन?
एमसीए व पुलिस कर्मियों से दुकानदारों की तीखी नोकझोंक के कारण शहर के रेलवे रोड पर तनाव का माहौल बना रहा। इस पूरे मामले में ये बात भी सामने आई कि इस अतिक्रमण का जिम्मेदार कौन है। शहर के रेलवे रोड पर जहां ये कार्रवाई हुई वहीं दुकानदारों ने पांच से पंद्रह फीट तक दुकानें सड़कों पर निकाल रखी है। अब सवाल यह है कि जब ये दुकानदार कब्जा कर रहे थे तो एमसीए प्रशासन चुप क्यों था? उसी वक्त इन दुकानदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उधर, इसी तरह पूरे शहर के विभिन्न बाजारों में भी अतिक्रमण और अवैध कब्जों की वजह से हालात बहुत खराब है, लेकिन वहां भी आज तक एमसीए प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, यही वजह से कब्जेधारी और अतिक्रमणकारी दुकानदारों को बढ़ावा मिलता जा रहा है। प्रशासन यदि अपनी जिम्मेदारियों से यूं ही मुंह मोड़ता रहा तो रेलवे रोड जैसे हालात बार-बार पनपते रहेंगे।
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वबाल उस वक्त ज्यादा भड़क गया जब शहर के पूर्व विधायक मास्टर शिव प्रसाद की चाय व हलवाई की दुकान पर जेसीबी मशीन चला दी गई। उसके बेटे अनिल प्रसाद का आरोप है कि उन्होंने एमसीए की टीम को आश्वस्त कर दिया था कि उनकी दुकान के जो शेड थोड़े आगे बढ़े हुए हैं, वे खुद कुछ ही दिनों में उसे वहां से हटा देंगे, लेकिन इनेलो और जनचेतना पार्टी के नेताओं व कार्यकर्त्ताओं की वजह से एमसीए उनकी दुकान पर कार्रवाई करने पर मजबूर हो गया और उनकी दुकान पर भी तोड़फोड़ की गई। उधर, दुकानदारों ने एमसीए कर्मियों पर यह भी आरोप लगाया कि पूरे शहर के सभी बाजार अतिक्रमण से बहुत ज्यादा ग्रस्त है, लेकिन वहां तो आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुकानदारों ने डीसी व एमसीए अफसरों पर अतिक्रमण हटाने पर पक्षपात किए जाने का आरोप लगाया है।
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तनावपूर्ण बनी स्थिति, पुलिस से उलझे दुकानदार
एमसीए की टीम शुक्रवार को भारी पुलिस बल के साथ रेलवे रोड पर पहुंची और सड़क की ओर बढ़े दुकानदारों के अवैध कब्जे तुड़वाने शुरू कर दिए। टीम की इस कार्रवाई से दुकानदारों का गुस्सा भड़क गया और वे पहले एमसीए अफसरों और फिर पुलिस से ही भिड़ गए। पुलिस के एसीपी हितेश यादव ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन बहस बढ़ती गई। उधर, एमसीए की कार्रवाई का विरोध कर रहे मास्टर शिव प्रसाद के बेटे अनिल प्रसाद की भी पुलिस तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने इस दौरान जैसे ही उन्हें पकड़कर घसीटना शुरू किया तो भाजपा समर्थक भड़क गए और वहां ज्यादा वबाल हो गया।
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तोड़फोड़ में नेताओं ने चमकाई राजनीति
इस मामले में भाजपा और इनेलो नेताओं ने खूब राजनीति की। भाजपा नेता एडवोकेट संदीप सचदेवा, पवित्र सिंह बाजवा, कुशल जैन, बलजीत सिंह बलाना, हरीश खन्ना, राज वालिया, सुधीर चौपड़ा, सुशील अग्रवाल, बृजमोहन धीमान ने कहा कि प्रशासन तो अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ लीपापोती कर रहा था, लेकिन इनेलो व जनचेतना पार्टी के कार्यकर्त्ता व नेताओं की वजह से तोड़फोड़ हुई है। क्योंकि यही नेता तोड़फोड़ में पक्षपात होने की शिकायत लेकर डीसी अंबाला के पास गए थे, जिसके बाद सभी दुकानों को गिरा दिया गया। उधर, इनेलो नेता मक्खन सिंह लबाना भी मौके पर खूब राजनीति करते नजर आए और इसी प्रकरण में थोड़ी देर बाद ही उन्होंने इस कार्रवाई के विरोध में रेलवे रोड पर जाम लगा दिया। जिसे बाद में हटवा दिया गया।
अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार कौन?
एमसीए व पुलिस कर्मियों से दुकानदारों की तीखी नोकझोंक के कारण शहर के रेलवे रोड पर तनाव का माहौल बना रहा। इस पूरे मामले में ये बात भी सामने आई कि इस अतिक्रमण का जिम्मेदार कौन है। शहर के रेलवे रोड पर जहां ये कार्रवाई हुई वहीं दुकानदारों ने पांच से पंद्रह फीट तक दुकानें सड़कों पर निकाल रखी है। अब सवाल यह है कि जब ये दुकानदार कब्जा कर रहे थे तो एमसीए प्रशासन चुप क्यों था? उसी वक्त इन दुकानदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उधर, इसी तरह पूरे शहर के विभिन्न बाजारों में भी अतिक्रमण और अवैध कब्जों की वजह से हालात बहुत खराब है, लेकिन वहां भी आज तक एमसीए प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, यही वजह से कब्जेधारी और अतिक्रमणकारी दुकानदारों को बढ़ावा मिलता जा रहा है। प्रशासन यदि अपनी जिम्मेदारियों से यूं ही मुंह मोड़ता रहा तो रेलवे रोड जैसे हालात बार-बार पनपते रहेंगे।