नागरिकता संसोधन बिल के विरोध में उतरे शाही इमाम, बोले-धर्म के आधार पर नागरिकता देना उचित नहीं
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केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन बिल का स्वतंत्रता सेनानियों की जमात मजलिस अहरार की ओर से शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने विरोध किया है। शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर किसी को भारतीय नागरिकता देना किसी भी तरह से उचित नहीं है।
यह सरासर देश के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। संविधान में यह बात स्पष्ट रूप से कहीं गई है कि देश की सरकार किसी धर्म विशेष की नहीं बल्कि धर्म निरपेक्ष होगी और यही भारत का शुरू से सिद्धांत रहा है। शाही इमाम पंजाब ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार का यह कहना कि पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश में वहां के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं इसलिए गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता दी जानी चाहिए तो क्या चीन, म्यांमार, नेपाल और श्रीलंका में अगर किसी मुसलमान पर अत्याचार हो तो उसे भारत की नागरिकता का अधिकार नहीं होगा।
क्या यह गैर मुस्लिम देश भारत के पड़ोसी नहीं है। क्या इन देशों में मानवता पर अत्याचार नहीं हो रहे हैं। शाही इमाम ने कहा कि म्यांमार में वहां के अल्पसंख्यकों पर बहुत अत्याचार हुए हैं, उसे कौन नहीं जानता लेकिन फिर भी धर्म के आधार पर राजनीति की जा रही है। शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने कहा कि दुनिया इस वक्त आतंकवाद से जूझ रही है।
आतंक का कोई धर्म नहीं होता। वोट की राजनीति में कहीं हम इन पड़ोसी देशों से आए पाकिस्तानी घुसपैठियों के लिए दरवाजा तो नहीं खोलने जा रहे क्योंकि अब तक जो भी जासूस और आतंकी भारत में पकडे़ गए हैं, उन सब का किसी एक धर्म से संबंध नहीं है। शाही इमाम ने कहा कि सरकार देश में बढ़ रही महंगाई और बेरोजगारी पर ध्यान केंद्रित करने की बजाए धर्म के नाम पर सियासत कर रही हैं।