शहादत को सलाम, आतंकी को ढेर कर बचाई 50 साथियों की जान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उधमपुर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ जांबाज रॉकी बिलासपुर खंड के गांव रामगढ़ माजरा का रहने वाला था। बीएफएस सूत्रों के मुताबिक उधमपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए बीएसएफ के जवान रॉकी ने अपने प्राणों की बलि देकर अपने साथियों की जान बचाई।
बीएसएफ के करीब 50 जवान बस में सवार होकर जम्मू से कश्मीर जा रहे थे। जम्मू से करीब 50 किलोमीटर दूर पहुंचने पर अचानक एक आतंकवादी बस के सामने आ गया और उसने बस की ओर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दी। रॉकी चालक के बगल की सीट पर बैठा हुआ था।
आतंकवादी द्वारा चलाई गई गोली चालक के साथ-साथ रॉकी को भी लगी। बुरी तरह घायल होने के बावजूद रॉकी ने बस में चढ़ने का प्रयास कर रहे आतंकवादी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। मारे गए आतंकवादी के पास हैंड ग्रेनेड भी था। यदि आतंकवादी बस में चढ़ने में सफल हो जाता तो कई जवानों की जान जा सकती थी।
परिवार को रोता-बिलखता छोड़ देश के लिए दी शहादत
शहीद जांबाज रॉकी बिलासपुर खंड के गांव रामगढ़ माजरा का रहने वाला था। उसके पिता शीशपाल छोटे किसान हैं। रॉकी की शहादत की सूचना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पूर्व सरपंच जयकुमार ने कहा कि रॉकी की शहादत से पूरा गांव स्तब्ध है। रॉकी ने अपनी शहादत देकर हमारे गांव का नाम रोशन कर दिया है।
रॉकी का एक बड़ा भाई और रॉकी से छोटी बहन है। रॉकी वर्ष 2012 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। उसकी उम्र करीब 25 वर्ष थी। गांव के पूर्व सरपंच जयकुमार ने बताया कि रॉकी बहुत मिलनसार लड़का था और शुरू से ही वह सेना में भर्ती होना चाहता था।
इसके लिए वह तड़के उठकर गांव में दौड़ लगाया करता था। करीब दो महीने पहले ही वह छुट्टी पर घर आया था। रॉकी के शहीद होने की खबर का पता चलते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां अंग्रेजी देवी गुमसुम सी हो गईं। बड़े भाई रोहित की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
गांव वालों को जब पता चला कि रॉकी ने एक आतंकवादी को मारकर अपने साथियों की जान बचाई तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। पूर्व सरपंच जयकुमार ने कहा कि रॉकी ने अपनी शहादत देकर हमारे गांव का नाम रोशन कर दिया है। गांव के लोग देर रात तक शीशपाल के घर पर मौजूद रहे। हर किसी की जुबान पर रॉकी की बहादुरी के चर्चे थे।