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Amritsar: 20 दिसंबर को राष्ट्रपति भवन तक विरोध मार्च का फैसला वापस, एसजीपीसी कार्यकारिणी ने लिया फैसला
Sat, 16 Dec 2023 02:07 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 16 Dec 2023 02:07 PM IST
सार
ये मार्च बंदी सिंहों की रिहाई और पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद को बदलने की मांग को लेकर निकाला जाना था। धामी ने कहा कि यह फैसला एसजीपीसी की कार्यकारिणी ने लिया था।
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एसजीपीसी कार्यालय में पत्रकारो से बातचीत करते अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेकर 20 दिसंबर को गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब से राष्ट्रपति भवन तक आयोजित किए जाने वाले रोष मार्च को वापस ले लिया है। कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की ओर से इसका एलान किया गया।
ये मार्च बंदी सिंहों की रिहाई और पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद को बदलने की मांग को लेकर निकाला जाना था। धामी ने कहा कि यह फैसला एसजीपीसी की कार्यकारिणी ने लिया था। यह फैसला श्री अकाल तख्त साहिब को मिले दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कलेके के पत्र को मुख्य रखकर किया गया है।
इसके अलावा धामी ने तख्त हजूर साहिब पर सिख कौम में विवाह संबंधी लिए गए फैसलों का भी स्वागत किया है। धामी ने सभी सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों से अपील की है कि एक जनवरी तक किसी भी गुरुद्वारा साहिब के लंगर में मीठा पकवान न बनाया जाए और न ही किसी को भी सिरोपा देकर सम्मानित किया जाए। सिर्फ नगर कीर्तन की अगुवाई करने वाले पंज प्यारों को ही सिरोपा दिया जाए।
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ये मार्च बंदी सिंहों की रिहाई और पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद को बदलने की मांग को लेकर निकाला जाना था। धामी ने कहा कि यह फैसला एसजीपीसी की कार्यकारिणी ने लिया था। यह फैसला श्री अकाल तख्त साहिब को मिले दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कलेके के पत्र को मुख्य रखकर किया गया है।
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इसके अलावा धामी ने तख्त हजूर साहिब पर सिख कौम में विवाह संबंधी लिए गए फैसलों का भी स्वागत किया है। धामी ने सभी सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों से अपील की है कि एक जनवरी तक किसी भी गुरुद्वारा साहिब के लंगर में मीठा पकवान न बनाया जाए और न ही किसी को भी सिरोपा देकर सम्मानित किया जाए। सिर्फ नगर कीर्तन की अगुवाई करने वाले पंज प्यारों को ही सिरोपा दिया जाए।
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