राजोआणा मामला: अमित शाह बोले- जिसे पछतावा नहीं, वह रहम का हकदार नहीं, SGPC ने कहा- बयान अधिसूचना के विपरीत
अमित शाह ने सदन में बहस का जवाब देते हुए कहा कि रहम का हकदार वह होता है, जिसे अपनी गलती का एहसास हो। उन्होंने कहा कि कोई आतंकवादी अपराध करे और उसे पछतावा भी न हो तो वह रहम का हकदार नहीं है।
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बंदी सिंहों की रिहाई की मुहिम को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआणा की मौत की सजा को कम करने संबंधी दया याचिका पर कहा कि जिस व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास नहीं है, उसे कैसी माफी?
अमित शाह ने यह बात लोकसभा में पंजाब की सांसद हरसिमरत कौर बादल के सवाल पर कही। हरसिमरत कौर बुधवार को संसद में पेश हुए तीन संशोधित आपराधिक विधेयकों पर बहस के दौरान राजोआना की सजा माफी का मुद्दा उठाया था। हरसिमरत का कहना था कि संशोधित विधेयक में दया याचिका संबंधी किए प्रावधान के कारण राजोआना के लिए एसजीपीसी की ओर से 2011 में दी गई दया याचिका बेकार हो जाएगी।
अमित शाह ने सदन में बहस का जवाब देते हुए कहा कि रहम का हकदार वह होता है, जिसे अपनी गलती का एहसास हो। उन्होंने कहा कि कोई आतंकवादी अपराध करे और उसे पछतावा भी न हो तो वह रहम का हकदार नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि कोई तीसरा पक्ष उसकी सजा माफ करने के लिए दया याचिका दाखिल करे और सजायाफ्ता को किसी बात का पछतावा तक न हो तो वह रहम का हकदार कैसे हो सकता है?
बंदी सिखों पर अमित शाह का बयान केंद्र सरकार की अपनी अधिसूचना के विपरीत: धामी
अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि ये बयान देश की जेलों में तीन दशकों से बंद सिखों के मानवीय अधिकारों के विपरीत है। यह बयान कैदियों के मानवीय अधिकारों का भी उल्लंघन है। गृह मंत्री को इन कैदियों के मानवीय अधिकारों को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। धामी ने कहा कि सिखों को पहले से ही लग रहा है कि उन्हें अपने ही देश में न्याय नहीं मिल रहा है और अब गृह मंत्री के ताजा बयान ने एक बार फिर सिखों के मन पर गहरा आघात किया है।
धामी ने कहा कि सरकार को भारत की आजादी के लिए सिखों के 90 फीसदी बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। जिस संसद में गृह मंत्री अपना बयान दे रहे हैं, वह भी सिखों के बलिदान के कारण ही खड़ी है। धामी ने कहा कि बंदी सिखों की रिहाई की मांग संविधान के दायरे में है। केंद्र सरकार ने भी श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर 2019 में अपनी अधिसूचना के माध्यम से इसे मंजूरी दे दी है। सरकार को अपनी 2019 की अधिसूचना को लागू करना चाहिए।
धामी ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का बयान उनकी ही अधिसूचना की भावना के बिल्कुल विपरीत और आश्चर्यजनक है। इस मामले पर मिलजुल कर चर्चा होनी है, जिसके लिए श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय भी मांगा है।