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विधायक की पगड़ी उतारने का मामला गवर्नर तक पहुंचा, बंडूगर ने सौंपा ज्ञापन

Fri, 23 Jun 2017 09:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 23 Jun 2017 09:22 AM IST
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SGPC president meet governer VP Singh badnaur
SGPC प्रधान बंडूगर ने राज्यपाल से की मुलाकात
पंजाब विधानसभा में हंगामे के बीच मार्शलों की ओर से विपक्षी सदस्य की पगड़ी उतरने के मामले को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल से इसकी शिकायत की है।
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वीरवार शाम सिख पंथ के विभिन्न मुद्दों को लेकर चंडीगढ़ में राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर से मिलने पहुंचे एसजीपीसी से प्रधान प्रो. किरपाल सिंह बंडूगर ने कहा कि यह अति निंदनीय और गंभीर घटना है। पगड़ी सिखों की पहचान और उनका सम्मान व धार्मिक पहचान है।
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इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि एसजीपीसी ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर मंथन के लिए 26 जून को रोपड़ में गुरुद्वारा श्री भट्ठा साहिब में एक बैठक बुलाई है। ऐसी घटनाएं रोकने के लिए एसजीपीसी कड़े फैसले लेगी।
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SGPC president meet governer VP Singh badnaur
Punjab assembly session
प्रो. बंडूगर ने कहा कि राज्यपाल से मिलकर उन्होंने सिख पंथ के कुछ अन्य मामलों पर भी उनका ध्यान आकर्षित किया है। बीते कुछ समय से सूबे में पावन श्री गुरु ग्रंथ साहिब से स्वरूपों की बेअदबी की घटनाएं बढ़ी हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने राज्यपाल से मिलकर इन मामलों की विशेष तौर पर जांच कराने और अपराधियों से निपटने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की है। इसके अलावा प्रो. बंडूगर ने प्रदेश के ऐतिहासिक गुरुद्वारों की भूमि पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा कब्जे किए जाने की शिकायत भी राज्यपाल से की।

एसजीपीसी प्रधान ने बताया कि बठिंडा में गुरुद्वारा भाई रूपा की 161 एकड़ जमीन, बठिंडा के ही मौड़ कलां स्थित गुरुद्वारा पातशाही नौवीं की 130 एकड़ भूमि और मोगा के गुरुद्वारा श्री तंबू मल की जमीन पर कब्जे के मुद्दे को राज्यपाल के समक्ष उठाया है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारों की भूमि पर कब्जे के बारे में एसजीपीसी ने मुख्यमंत्री और सूबे के डीजीपी से भी शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में उन्होंने भाई काहन सिंह नाभा द्वारा रचित महान कोष जोकि सिख इतिहास, पंजाबी इतिहास और पंजाबी भाषा का शोध ग्रंथ है, लेकिन पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला की ओर से किए गए इसके अनुवाद में कई बड़ी गलतियां हुई हैं। इसलिए राज्यपाल से मांग की गई है कि इसकी अनुवादित प्रतियां जब्त कर इसके प्रकाशन पर रोक लगाई जाए और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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