दर्शनी ड्योढ़ी गिराने के विवाद में एसजीपीसी ने बनाई कमेटी, बाबा जगतार सिंह ने मांगी माफी
श्री दरबार साहिब की ऐतिहासिक दर्शनी ड्योढ़ी को गिराए जाने के मामले में एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि श्री दरबार साहिब के मैनेजर प्रताप सिंह को निलंबित कर जांच के लिए कमेटियां बना दी गई हैं।
इनमें से एक कमेटी में एसजीपीसी के मेंबर भगवंत सिंह सिआलका, भाई राम सिंह और गुरमीत सिंह बूह शामिल है। दूसरी कमेटी में एसजीपीसी के मीत सचिव हरजीत सिंह लालूघुमण, इंचार्ज फ्लाइंग कुलदीप सिंह रोडे और एसडीओ (निर्माण) सुखविंदर सिंह को शामिल किया गया है।
नानकशाही ईंटों से बनी दर्शनी ड्योढ़ी की हालत खस्ता होने पर एसजीपीसी ने जुलाई 2018 में इसे गिराकर दोबारा बनाने का फैसला किया था। यह सेवा बाबा जगतार सिंह कारसेवा वालों को सौंपी गई थी।
एसजीपीसी महासचिव गुरबचन सिंह करमूवाला ने टक लगाकर कारसेवा का उद्घाटन भी किया लेकिन संगत के विरोध के चलते अक्तूबर 2018 में एक अन्य प्रस्ताव पारित कर कारसेवा पर रोक लगाकर मामले को पेंडिंग कर दिया था। शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के पोते कंवर नौनिहाल सिंह ने 1839 में नानकशाही ईंटों से श्री दरबार साहिब तरनतारन की दर्शनी ड्योढ़ी बनवाई थी।
मुझे बलि का बकरा बनाया : प्रताप सिंह
मैनेजर प्रताप सिंह ने कहा कि दर्शनी ड्योढ़ी की मरम्मत का प्रस्ताव 2017 में उनकी तैनाती के दौरान हुआ था। उनके बाद मैनेजर बलविंदर सिंह उबोके के कार्यकाल के दौरान दर्शनी ड्योढ़ी को ढहाने का प्रस्ताव पारित हुआ। प्रताप सिंह ने दावा किया कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है।
दर्शनी ड्योढ़ी की दोबारा करवाई जाएगी मरम्मत : लौंगोवाल
एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने कहा कि इस घटना से सिख कौम की भावनाओं को ठेस लगी है। तकनीकी माहिरों की निगरानी में एसजीपीसी द्वारा दर्शनी ड्योढ़ी की दोबारा मरम्मत करवाई जाएगी। इस घटना के बाद श्री दरबार साहिब में लगी कारसेवा बाबा जगतार सिंह संप्रदाय की सभी गोलकें हटा दी गई हैं।
लौंगोवाल का त्यागपत्र मांगा
सिख विद्वान भाई बलदेव सिंह वडाला ने कहा कि ऐतिहासिक स्थानों की सेवा संभाल में एसजीपीसी विफल रही है। एसजीपीसी अध्यक्ष को तुरंत त्याग पत्र देना चाहिए। उधर, सिरलत्थ खालसा जत्थेबंदी ने श्री दरबार साहिब के मुख्य गेट के सामने धरना देकर एसजीपीसी का विरोध किया।
धरने में पीडीए प्रत्याशी परमजीत कौर खालड़ा, दल सरना के बलदेव सिंह सिरसा सहित अन्य शामिल थे। उन्होंने बाबा जगतार सिंह के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। जत्थेबंदी के मुखी भाई परमजीत सिंह अकाली ने कहा कि एसजीपीसी की मिलीभगत का मामला जगजाहिर हो चुका है।
इस पूरे मामले में कई सवाल भी उठ रहे हैं। बिना किसी सूचना के शनिवार आधी रात को दर्शनी ड्योढ़ी को गिराने का क्या मकसद था, यह साफ नहीं हो रहा है। शनिवार रात श्री दरबार साहिब के मुख्य गेट पर लगी लाइटों को बंद करके बाबा जगतार सिंह के अन्य सेवक बाबा बलवंत सिंह की अगुवाई में लोग दर्शनी ड्योढ़ी पर कैसे चढ़े। वहीं दो घंटे तक दर्शनी ड्योढ़ी को तोड़ा जाता रहा, पर गुरुद्वारा साहिब के मैनेजर प्रताप सिंह मौके पर नहीं पहुंचे।
दर्शनी ड्योढ़ी के ऊपर जाने वाला रास्ता श्री दरबार साहिब के भीतर (मुख्य गेट के साथ) है। इस रास्ते पर हमेशा ताला लगा होता है। रात को श्री दरबार साहिब के चारों द्वारों पर एसजीपीसी के सेवादार तैनात रहते हैं। करीब साढ़े 10 बजे के बाद कारसेवा संप्रदाय के लोग जब दर्शनी ड्योढ़ी पर चढ़े तो मुख्य द्वार पर तैनात कर्मियों ने इसकी सूचना अपने कार्यालय में क्यों नहीं दी। अगर सूचना दी गई थी तो मौके पर मैनेजर प्रताप सिंह क्यों नहीं पहुंचे।
शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) के प्रधान रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने सोमवार को जो फोटो मीडिया को जारी की उसमें बाबा जगतार सिंह के साथ एसजीपीसी के महासचिव गुरबचन सिंह कर्मवाला और खुशविंदर सिंह भाटिया भी कारसेवा शुरू करवाते दिखाई दे रहे हैं। वहीं बाबा जगतार सिंह कार सेवा ट्रस्ट के बाबा मोहिंदर सिंह ने कहा कि एसजीपीसी ने जो मता डाल कर हमें दिया था हमने उसी के हिसाब से काम किया है।
आधी रात को काम करने पर उन्होंने कहा कि रात के समय संगत कम होती है, इसलिए सेवा रात को शुरू की थी। वहीं ड्योढ़ी तोड़ने के विरोध में सिरलत्थ खालसा जत्थेबंदी के सदस्य देर रात तक धरने पर बैठे रहे। उन्होंने बाबा जगतार सिंह कारसेवा वालों पर केस दर्ज करने की मांग भी की।
बाबा जगतार सिंह ने माफी मांगी
तरनतारन स्थित श्री दरबार साहिब की ऐतिहासिक दर्शनी ड्योढ़ी तोड़ने के विरोध का पंथक दबाव झेल रहे बाबा जगतार सिंह ने संगत से माफी मांग ली है। अपने लेटर पैड पर जारी एक बयान में बाबा जगतार सिंह ने कहा कि दर्शनी ड्योढ़ी तोड़ने की जो गलती उनसे हुई है उसकी वह संगत से माफी मांगते हैं। भविष्य में किसी भी ऐतिहासिक इमारत की कार सेवा सिख संगत और विद्वानों के साथ विचार-विमर्श कर की जाएगी।