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पंजाब के सेवा केंद्रों में 56 और सेवाएं मिलेंगी, यहीं पर आरसी व ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित होंगे काम

Wed, 10 Feb 2021 02:06 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 10 Feb 2021 02:06 AM IST
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Seva Kendra will provide 56 more Services in Punjab
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को सेवा केंद्रों में 56 और नई सेवाएं शामिल करने की वर्चुअल तौर पर शुरुआत की। इन नई सेवाओं में वाहनों का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करना, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए समय लेना, वाहनों के अंतरराज्यीय हस्तांतरण (ट्रांसफर) के लिए एनओसी, पता बदलवाना शामिल है।  

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कैप्टन ने कहा कि अब सेवा केंद्रों में मिलने वाली नागरिक केंद्रित सेवाओं की कुल संख्या 383 हो गई है। अगले तीन महीनों में यह संख्या 500 तक पहुंच जाएगी। रोजाना 60,000 लोग सेवाएं हासिल करने के लिए इन केंद्रों में आते हैं। राज्य में मंगलवार को सेवा केंद्रों में जो 56 नई सेवाएं शामिल की गई हैं उनमें से 37 सेवाएं पुलिस द्वारा पहले ही सांझ केंद्रों में मुहैया करवाई जा रही हैं। इसके अलावा 18 सेवाएं परिवहन विभाग अपने दफ्तरों और राजस्व विभाग एक सेवा (फर्द की नकल) फर्द केंद्रों में मुहैया करा रहा है। 
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अगले महीने से कॉल सेंटर की भी शुरुआत
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले महीने एक कॉल सेंटर भी शुरू किया जाएगा। इससे नागरिक आसानी से अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकेंगे। उन्होंने शासन सुधार विभाग को पासपोर्ट की तर्ज पर नागरिकों से संबंधित दस्तावेजों को तुरंत घरों तक पहुंचाने की सेवा शुरू करने के लिए डाक विभाग से तालमेल करने का आदेश दिया। 

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पुलिस से संबंधित 21 सेवाएं मिलेंगी केंद्रों में : डीजीपी

डीजीपी दिनकर गुप्ता ने खुलासा किया कि पुलिस से संबंधित 21 सेवाएं अब राज्य भर में 516 सेवा केंद्रों में भी मुहैया होंगी। इनमें पासपोर्ट के लिए पड़ताल, हथियार लाइसेंस के लिए पड़ताल, विदेशियों का पंजीकरण, एनओसी जारी करना, लापता रिपोर्टों आदि की कॉपी शामिल हैं। पहले ये सेवाएं सिर्फ 294 सांझ केंद्रों से मिलती थीं। 

पिछली सरकार ने सफेद हाथी बना दिए थे सेवा केंद्र : कैप्टन
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया कि पिछली सरकार द्वारा लगभग 2144 सेवा केंद्र चलाए जा रहे थे। उन्होंने इन केंद्रों को सफेद हाथी बना दिया था। उनमें स्टाफ कम होने के साथ-साथ सेवाएं देने में भी ढिलाई बरती जाती रही। इन सेवा केंद्रों में केवल 170 सरकारी सेवाएं मिलती थीं। इसके अलावा इनके निर्माण के लिए 400 करोड़ रुपये अंधाधुंध खर्च किए गए और इन केंद्रों को चलाने पर राज्य सरकार को सालाना 250 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे। 

कैप्टन ने बताया कि उनकी सरकार ने ‘यूनिफाइड सर्विस डिलिवरी सेंटर’ (एकीकृत सेवा केंद्र) स्थापित करने का फैसला लिया था। इसके साथ ही मौजूदा सभी केंद्रों- सुविधा केंद्रों, सांझ केंद्रों, फर्द केंद्रों का विस्तार करते हुए इनका पूर्ण तौर से कंप्यूटरीकृत और डिजिटलाइजेशन करने का फैसला लिया गया। सेवा केंद्रों की संख्या 2147 से घटाकर 516 कर दी गई है। इन केंद्रों को ठेका आधारित मॉडल के साथ अपना खर्च खुद जुटाने के योग्य बनाया गया। इससे राज्य सरकार को सालाना छह करोड़ रुपये की आमदनी शुरू हो गई। 

516 सेवा केंद्र कार्यरत, 50 हजार युवाओं को मिला रोजगार
मुख्यमंत्री को सेवा केंद्रों की मौजूदा स्थिति की जानकारी देते हुए प्रशासनिक सुधारों के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने बताया कि राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 516 सेवा केंद्र हैं। यहां रोजाना 60,000 लोगों की आमद होती है और 50,000 नौजवानों को रोजगार मिला है। यह केंद्र 327 सरकारी सेवाएं मुहैया करवाने के अलावा फोटोस्टेट, कोरियर, डायरेक्ट मनी ट्रांसफर, फास्टैग, पैन कार्ड, टिकट (बस और ट्रेन) की सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। 

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