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जवान की सुसाइड से साथी की 'शहादत' पर सवाल

Wed, 29 Oct 2014 10:29 AM IST
नसीब सैनी/अमर उजाला, कैथ्ाल
नसीब सैनी/अमर उजाला, कैथ्ाल Updated Wed, 29 Oct 2014 10:29 AM IST
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Sensational disclosure: suicide note opened true of martyrdom

ट्रेन से कटकर सुसाइड से पहले आईटीबीपी के जवान ने साथी की 'शहादत' पर चौंकाने वाला खुलासा किया। इसके साथ ही दीपावली के दिन मौत का शिकार हुए गांव चंदाना के जवान कपिल शर्मा की मौत पर परिजनों का अंदेशा सही निकला।

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उसकी ग्रेनेड फटने से नहीं बल्कि संदिग्ध हालात में हुई है। उसकी मौत के लिए उसके दोस्त ने आईटीबीपी के अधिकारियों को दोषी ठहराया है। जिनकी प्रताड़ना से तंग आकर कपिल के दोस्त जवान भी मंगलवार को बहादुरगढ़ में सुसाइड कर लिया।
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गांव चंदाना से दो वर्ष पूर्व आईटीबीपी में भर्ती हुआ कपिल शर्मा की दीपावली के दिन 23 अक्तूबर को मौत हो गई थी। उसके बाद आईटीबीपी के जवान 25 की सुबह उसका शव लेकर गांव चंदाना में पहुंचे थे। जहां कपिल शर्मा के पार्थिव शरीर को न तो तिरंगा नसीब हुआ और न ही सेना के जवानों ने उसे सलामी दी।
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इस कारण परिजनों को शुरु से ही पूरा मामला संदिग्ध लग रहा था। शव लेकर पहुंचे जवानों ने भी कुछ भी जानकारी देने से इंकार कर दिया था। परिजन कपिल को शहीद का दर्जा देने की मांग कर रहे थे। लेकिन मंगलवार को बहादुरगढ़ में एक जवान द्वारा सुसाईड करने एवं सुसाईड नोट में किए गए खुलासों से इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

सुसाइड नोट में ये किया खुलासा

Sensational disclosure: suicide note opened true of martyrdom

अपने सुसाइड नोट में आईटीबीपी 18-बीएन-सी कंपनी के जवान झज्जर जिला के गांव आसौदा निवासी मदन कुमार ने जिक्र किया है कि-23 तारीख को शायद दीपावली थी, आपको भी याद होगा।

उस दिन सुबह सीता गांव, मोहला मानपुर, तहसील राजनांदगांव में सुबह 8 या 9 बजे(छुट्टी थी इसीलिए लेट थोड़ा) फ्रैश होने जा रहा था तो मुझे आईटीबीपी एक जवान कपिल शर्मा मिला, जो काफी परेशान लग रहा था। मुझे बताया कि किसी छोटी-मोटी बात पर साहब(प्रवीण कुमार) ने 150 तो गालियां सुना दीं और दिमाग अलग खराब कर दिया।

मैंने बोला भाई कोई बात नहीं, मैं भी तो साढ़े छह वर्ष से खा रहा हूं, तू भी खा ले। इसके बाद करीब साढ़े 10 व ग्यारह बजे के बीच मुझे चारपाई पर आवाज सुनाई दी तो लोग कहने लगे, दीपावली है, सभी सीपीजी वाले पटाखे जला रहे हैं। लेकिन जब तक लोग पहुंचे, तब तक उसकी तलाशी ले ली गई थी और बाद में सीपीजी(छत्तीसगढ़ पुलिस) को बुलाया गया।

'मेरी ही राइफल से मुझे मारने का प्रयास'

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बाद में कपिल शर्मा की बॉडी को एंबुलेंस में डालकर मानपुर में पोस्टमार्टम करवाया गया। मानपुर से 7 बजे निकले। इसके बाद राजनांदगांव में बॉडी के पास बर्फ रखी गई, वहां से वे उसे ढाई बजे अंबेडकर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। इसी बीच मैंने यहां हो रही मौतों पर सवाल उठाया तो मेरे साथ जो एसओ थे, वे गर्म हो गए।

अधिकारियों के कहने के बाद उसने मेरे से सारी राइफल, राऊंड ले लिए तथा मेरी ही राइफल से मुझे मारने का प्रयास किया। लेकिन मैं किसी तरह वहां से भागकर एक पत्रकार और कांग्रेस नेता की मदद से रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। अपने सुसाईड नोट में उसने यह भी कहा है कि छत्तीसगढ़ पुलिस भी आईटीबीपी के अधिकारियों के साथ मिली हुई है।

सुसाइड नोट में मदन ने यह भी खुल्लासा किया है कि अब तक वहां चार से पांच जवानों की मौत हो चुकी है। अधिकारी कहते हैं कि उनका कोई बाल भी नहीं उखाड़ सकता। वह भी प्रवीण कुमार, राम भरत कुशवाह और एसओ के कारण अपनी जान दे रहा है।

पीएम मोदी से की जांच की मांग

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मदन लाल ने खुलासा किया है कि अधिकारी जवानों को प्रताड़ित करते हैं। यदि जवान जवाब देता है तो उसके खिलाफ मनमर्जी की देशद्रोही, अफीम, गांजा आदि रखने की रिपोर्ट तैयार कर देते हैं या फिर उसकी हत्या करके सुसाईड का रंग दे देते हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस भी उनके अधिकारियों की ही मानती है।

कपिल की मौत को लेकर पहले ही पशोपेश में उसके परिजनों ने इस खुलासे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरे मामले की सीबीआई से जांच करवाकर न्याय दिलवाने की मांग की है। कपिल के चाचा शीशपाल ने कहा कि यदि जवानों को इस तरह से अपना जीवन खोना पड़ेगा तो कौन सेना में जाएगा?

उन्होंने प्रधानमंत्री को ई-मेल करते हुए इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है और कपिल को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की है। यह जवानों का सुसाईड नहीं बल्कि एक सुनियोजित तरीके से की गई हत्या है। हमें न्याय दिया जाना चाहिए।

जबरन ठीक कर भेजा था कपिल को ड्यूटी पर:-कपिल के चाचा ने कहा कि 25 सितंबर को जब कपिल यहां से छुट्टियां काटकर गया था तो उसे घर भेजने की बजाए वहीं पर अस्पताल में कुछ दिन रखने के बाद जबरन ड्यूटी पर भेज दिया गया था। इस कारण भी कपिल परेशान था।

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