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यह भी हैं नेक चंद... सेनेटरी ठेकेदार विजय गोयल ने वेस्ट मैटेरियल से बनाया एक अलग संसार
Fri, 12 Jun 2020 04:16 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 12 Jun 2020 04:16 PM IST
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विजय गोयल का बनाया संसार
- फोटो : अमर उजाला
पद्मश्री शिल्पकार नेकचंद सैनी के शहर चंडीगढ़ में उनकी विरासत और काम को आगे बढ़ाने वाले कुछ और लोग भी हैं। इन्होंने भी वेस्ट मैटेरियल से एक नया संसार गढ़ा है। निजी सेनेटरी ठेकेदारी का कार्य करने वाले इस शख्स का नाम है विजय गोयल, जो सेक्टर-47 में रहते हैं।
इन्होंने बाथरूम और ट्वॉयलेट के वेस्ट मैटेरियल से कई कलाकृतियां बनाईं, जिन्हें संजोने के लिए यूटी प्रशासन ने कला सागर नाम से म्यूजियम ही बना दिया। ठेकेदारी के दौरान 1995-96 में विजय गोयल ने बाथरूम के खराब होने वाले सामानों से कलाकृतियां बनाने का काम घर से ही शुरू किया।
उनका यह शौक घर से कब बाहर पहुंच गया पता ही नहीं चला। वर्ष 1998 में कलाग्राम में लगी प्रदर्शनी के दौरान जब विजय गोयल ने बाथरूम फिटिंग की वेस्ट सामग्री से बनी कलाकृतियां प्रस्तुत कीं तो यूटी प्रशासन के अधिकारी भी हैरान रह गए। उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सेक्टर-10 स्थित कलाग्राम में उनके द्वारा बनाई गईं कलाकृतियों की इन साइड और आउट साइड प्रदर्शनी लगाई गई।
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इसके बाद जमीन की समस्या को दूर करने के लिए 1998 में ही सेक्टर-36 में उन्हें जमीन की गई और यहां कला सागर म्यूजियम का निर्माण कराया गया। जहां आज भी उनके द्वारा खराब बाथरूम फिटिंग से 1.5 इंच से लेकर 25 फिट बड़ी कलाकृतियां बनाई जा चुकी हैं।
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इन्होंने बाथरूम और ट्वॉयलेट के वेस्ट मैटेरियल से कई कलाकृतियां बनाईं, जिन्हें संजोने के लिए यूटी प्रशासन ने कला सागर नाम से म्यूजियम ही बना दिया। ठेकेदारी के दौरान 1995-96 में विजय गोयल ने बाथरूम के खराब होने वाले सामानों से कलाकृतियां बनाने का काम घर से ही शुरू किया।
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उनका यह शौक घर से कब बाहर पहुंच गया पता ही नहीं चला। वर्ष 1998 में कलाग्राम में लगी प्रदर्शनी के दौरान जब विजय गोयल ने बाथरूम फिटिंग की वेस्ट सामग्री से बनी कलाकृतियां प्रस्तुत कीं तो यूटी प्रशासन के अधिकारी भी हैरान रह गए। उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सेक्टर-10 स्थित कलाग्राम में उनके द्वारा बनाई गईं कलाकृतियों की इन साइड और आउट साइड प्रदर्शनी लगाई गई।
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इसके बाद जमीन की समस्या को दूर करने के लिए 1998 में ही सेक्टर-36 में उन्हें जमीन की गई और यहां कला सागर म्यूजियम का निर्माण कराया गया। जहां आज भी उनके द्वारा खराब बाथरूम फिटिंग से 1.5 इंच से लेकर 25 फिट बड़ी कलाकृतियां बनाई जा चुकी हैं।
री-साइकिल नहीं होती चीनी मिट्टी
बाथरूम व ट्वायलेट में अधिकांश वस्तुएं सिरेमिक मिट्टी (चीनी मिट्टी) से बनी होती है। इसकी खास बात यह है कि खराब होने के बाद इसको री-साइकिल नहीं किया जा सकता, जो पर्यावरण के लिए घातक है। ऐसे में सेनेटरी ठेकेदार विजय गोयल ने इस खराब वेस्ट मैटेरियल से कलाकृतियां बनानी शुरू कीं। उन्होंने बताया कि लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान भी चीनी मिट्टी का यह सामान अधिकांश रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है।
कलाकृति का कर देते हैं शेप चेंज
वेस्ट से बनीं कलाकृतियों की एक खास बात यह भी है कि इनको जोड़ने के लिए किसी भी प्रकार का कोई सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया है। इससे विजय गोयल कलाकृतियों का शेप भी आसानी से बदल सकते हैं। पर्यावरण के दृष्टिकोण से इनकी बनाई गई कलाकृतियां बेहद मुफीद मानी जाती हैं।
बच्चों को देते हैं निशुल्क प्रशिक्षण
अपनी इस कला को संरक्षित करने के लिए विजय गोयल बेहद गंभीर हैं। आने वाली पीढ़ी भी उनकी कलाकृतियों को बनाकर प्रदर्शित कर सके इसके लिए वह बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण भी देते हैं। अभी तक वह चंडीगढ़ सहित देश के कई प्रांतों में जाकर बच्चों और अन्य कलाकारों को प्रशिक्षित कर चुके हैं।
कलाकृति का कर देते हैं शेप चेंज
वेस्ट से बनीं कलाकृतियों की एक खास बात यह भी है कि इनको जोड़ने के लिए किसी भी प्रकार का कोई सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया है। इससे विजय गोयल कलाकृतियों का शेप भी आसानी से बदल सकते हैं। पर्यावरण के दृष्टिकोण से इनकी बनाई गई कलाकृतियां बेहद मुफीद मानी जाती हैं।
बच्चों को देते हैं निशुल्क प्रशिक्षण
अपनी इस कला को संरक्षित करने के लिए विजय गोयल बेहद गंभीर हैं। आने वाली पीढ़ी भी उनकी कलाकृतियों को बनाकर प्रदर्शित कर सके इसके लिए वह बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण भी देते हैं। अभी तक वह चंडीगढ़ सहित देश के कई प्रांतों में जाकर बच्चों और अन्य कलाकारों को प्रशिक्षित कर चुके हैं।