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विशेषज्ञ का खुलासा, सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने को उत्तराखंड के आदिबद्री में बनेगा डैम

Sat, 09 Feb 2019 02:05 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 09 Feb 2019 02:05 PM IST
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Seminar on Saraswati River Rebirth in Punjab University Chandigarh
सरस्वती नदी पर सेमिनार
सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। इस नदी के उद्गम स्थल उत्तराखंड के आदिब्रदी में डैम बनाया जाएगा। इसका प्रोजेक्ट लगभग तैयार हो गया है। आदिबद्री के बाद हरियाणा के यमुनानगर व उसके बाद कुरुक्षेत्र के पहेवा में नदी के पुनर्जीवन पर काम होगा। इन क्षेत्रों में सरस्वती नदी के अंश पाए गए हैं।
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यह बात पीयू हिस्ट्री विभाग व बोर्ड की ओर से आयोजित संयुक्त अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के दौरान हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड के सीईओ अजीत बालाजी जोशी ने कही। उन्होंने कहा कि अगले चरण में राजस्थान, गुजरात के कच्छ और फिर मुंबई की ओर काम चलेगा। इन्हीं इलाकों से यह नदी होकर गुजरी है। उन्होंने कहा कि नदी के पुनर्जीवन पर तेजी से काम चल रहा है।
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इस अवसर पर भारतीय अनुसंधान सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर राम गोपाल ने राजस्थान के एक चैनल, इसरो, डीआरडीओ की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्नत विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर बलराम सिंह ने संयुक्त राज्य अमेरिका का उन्नत ग्रामीण क्षेत्र पर प्रकाश डाला। प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग कर कैसे बेहतर प्रबंधन हो सकता है, इस पर बल दिया। सेमिनार संयोजक प्रोफेसर अंजू सूरी ने सेमिनार पर प्रकाश डाला और सभी का आभार जताया। इस मौके पर दीपा आदि रहीं।
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संत सींचेवाल बोले- नदी को मां का दर्जा, न डालें गदंगी
इस मौके पर पदमश्री संत बलबीर सिंह सींचेवाल ने कहा कि नदियों की हम पूजा करते हैं। नदी को मां का दर्जा देते हैं, लेकिन उसी में लोग गंदगी डाल रहे हैं। इससे खुद ही प्रभावित भी हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे बीमारियां भी फैलती हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले नदियों को साफ किया जाना चाहिए। उन्होंने इस कांफ्रेंस की प्रशंसा की। वाइस चांसलर प्रो. राजकुमार ने कहा कि शुरुआत से ही वह सुनते आए हैं कि गंगा यमुना और सरस्वती का संगम होता है। यदि सरस्वती नदी नहीं होगी तो गंगा यमुना का संगम अधूरा है इसलिए सरस्वती नदी का पुनर्जन्म जरूरी है।
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