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Chandigarh News: सुखना में अब विज्ञान करेगा कमाल...बढ़ेंगी मछलियां, लौटेंगे परिंदे, सुधरेगा पारिस्थितिकी तंत्र

Fri, 03 Jul 2026 02:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 02:53 AM IST
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Science to work wonders at Sukhna... fish populations to rise, birds to return, and the ecosystem to improve.
चंडीगढ़। सुखना में अब विज्ञान करेगा कमाल। बढ़ेंगी देशी मछलियां, लौटेंगे प्रवासी परिंदे और पूरा पारिस्थितिकी तंत्र पहले से अधिक मजबूत होगा। इसी लक्ष्य के साथ चंडीगढ़ प्रशासन ने सुखना वेटलैंड के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक मॉडल पर काम तेज कर दिया है। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने वीरवार को लोक भवन में वेटलैंड अथॉरिटी की पांचवीं बैठक में साफ किया कि सुखना वेटलैंड का संरक्षण किसी एक विभाग का नहीं बल्कि सभी संबंधित विभागों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने जैव विविधता को बढ़ावा देने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और दीर्घकालिक संरक्षण योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।
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बैठक में सुखना वेटलैंड और उसके कैचमेंट क्षेत्र में चल रहे संरक्षण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। चौथी बैठक में लिए गए फैसलों पर हुई प्रगति का आकलन किया गया, जबकि वेटलैंड अथॉरिटी के आधिकारिक लोगो को भी अंतिम मंजूरी दे दी गई। प्रशासक ने सभी विभागों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया, ताकि सुखना वेटलैंड की प्राकृतिक विरासत और पारिस्थितिकी तंत्र को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
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खरपतवार की समस्या भी प्रमुख मुद्दा रहा
सुखना वेटलैंड में बढ़ रही खरपतवार की समस्या भी बैठक का प्रमुख मुद्दा रही। प्रशासक ने निर्देश दिए कि खरपतवार हटाने का कार्य पूरी तरह वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से किया जाए, ताकि जलजीवों और अन्य जलीय प्रजातियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कैनाल डायवर्जन चैनल के रखरखाव, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा मृदा एवं नमी संरक्षण के उपायों पर भी व्यापक अध्ययन कराने को कहा।
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प्रवासी पक्षियों की जानकारी वाले डिस्प्ले बोर्ड लगेगा
प्रवासी पक्षियों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रशासक ने अधिकारियों से वेटलैंड में आने वाले प्रवासी पक्षियों की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली और उनके लिए बेहतर प्राकृतिक आवास विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही पर्यटकों और विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए वेटलैंड के आसपास विभिन्न प्रवासी पक्षियों की जानकारी वाले डिस्प्ले बोर्ड लगाने को कहा।


जल भंडारण क्षमता में 5.4 हेक्टेयर-मीटर की वृद्धि की संभावना
मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि आईआईटी रुड़की और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया की सिफारिशों के अनुरूप वेटलैंड के रेगुलेटरी एंड पर वैज्ञानिक तरीके से डी-सिल्टेशन का कार्य जारी है। इससे वेटलैंड की जल भंडारण क्षमता में करीब 5.4 हेक्टेयर-मीटर की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे भविष्य में जल संरक्षण और पारिस्थितिक तंत्र दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
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