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पंजाब यूनिवर्सिटी में भवनों के निर्माण में घपला, कईयों की गर्दन फंसते देख छिपाने के लिए करा दी पुताई
Sun, 06 Oct 2019 12:30 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 06 Oct 2019 12:30 PM IST
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punjab university
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में दर्जनभर भवनों के निर्माण में बड़ा घपला हुआ है। सीनेटरों की जांच कमेटी ने यह रिपोर्ट सिंडिकेट तक पहुंचा दी है। सिंडिकेट की ओर से इसके लिए विशेषज्ञों की जांच कमेटी बनाई जानी थी, लेकिन अब तक इस पर कार्रवाई नहीं की गई है। बताया जाता है कि वर्ष 2018 में जो सिंडिकेट थी उसके कुछ सदस्य भी इसमें फंस रहे थे। यही कारण है कि निर्माण विभाग से तालमेल करते हुए इन भवनों की पुताई करवा दी। पिछले सात-आठ साल के मध्य पीयू ने कई भवनों का निर्माण किया।
इसमें तेग बहादुर रीडिंग हॉल, इंटरनेशनल हॉस्टल गर्ल्स, राजीव गांधी भवन, यूआईएमएस विभाग, डेंटल इंस्टीट्यूट, साइंस ब्लॉक आदि शामिल हैं। इन भवनों के निर्माण पर 15 करोड़ से अधिक रकम खर्च हुई है। निर्माण के तीन-चार साल बाद ही यह भवन टपकने लगे। डेंटल कॉलेज में बारिश में पानी भरने लगा। राजीव गांधी भवन की टाइलें गिरने लगीं। फर्श भी कई भवनों में धंसा और प्लास्टर आदि भी छूटने लगा। यह प्रकरण सीनेट की बैठक में सीनेटर रविंदर, प्रो. अजय रंगा आदि ने उठाया तो इसके लिए जांच कमेटी बनाई गई।
इसमें सीनेटर रविंदर, यूबीएस विभाग से डॉ. मनोज शर्मा, इसी विभाग से डॉ. लक्ष्मी, गांधीयन विभाग से डॉ. मनीष शर्मा, यूआईएमएस विभाग से संजीव शर्मा शामिल थे। जांच रिपोर्ट सौंपी गई और सिंडिकेट में प्रकरण रखा गया। अब सिंडिकेट को विशेषज्ञों की जांच कमेटी बनानी है, लेकिन उसमें लगातार देरी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ घपलेबाज इसमें फंस रहे हैं। निर्माण विभाग भी फंस रहा है। इसके कारण जांच के दौरान ही पुताई व अन्य निर्माण भी करा दिए गए।
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अब सवाल उठता है कि आखिर जांच के दौरान रंगाई-पुताई इन भवनों की क्यों की गई? साथ ही सिंडिकेट विशेषज्ञों की जांच टीम बनाने में देरी क्यों कर रही है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सीनेटर रविंदर कहते हैं कि जांच में कई गड़बड़ी पाई गई थी, लेकिन विशेषज्ञों की जांच टीम अब तक नहीं बनाई गई। इस पर यूनिवर्सिटी को काम करना चाहिए, ताकि घपला करने वालों पर कार्रवाई हो सके।
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इसमें तेग बहादुर रीडिंग हॉल, इंटरनेशनल हॉस्टल गर्ल्स, राजीव गांधी भवन, यूआईएमएस विभाग, डेंटल इंस्टीट्यूट, साइंस ब्लॉक आदि शामिल हैं। इन भवनों के निर्माण पर 15 करोड़ से अधिक रकम खर्च हुई है। निर्माण के तीन-चार साल बाद ही यह भवन टपकने लगे। डेंटल कॉलेज में बारिश में पानी भरने लगा। राजीव गांधी भवन की टाइलें गिरने लगीं। फर्श भी कई भवनों में धंसा और प्लास्टर आदि भी छूटने लगा। यह प्रकरण सीनेट की बैठक में सीनेटर रविंदर, प्रो. अजय रंगा आदि ने उठाया तो इसके लिए जांच कमेटी बनाई गई।
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इसमें सीनेटर रविंदर, यूबीएस विभाग से डॉ. मनोज शर्मा, इसी विभाग से डॉ. लक्ष्मी, गांधीयन विभाग से डॉ. मनीष शर्मा, यूआईएमएस विभाग से संजीव शर्मा शामिल थे। जांच रिपोर्ट सौंपी गई और सिंडिकेट में प्रकरण रखा गया। अब सिंडिकेट को विशेषज्ञों की जांच कमेटी बनानी है, लेकिन उसमें लगातार देरी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ घपलेबाज इसमें फंस रहे हैं। निर्माण विभाग भी फंस रहा है। इसके कारण जांच के दौरान ही पुताई व अन्य निर्माण भी करा दिए गए।
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अब सवाल उठता है कि आखिर जांच के दौरान रंगाई-पुताई इन भवनों की क्यों की गई? साथ ही सिंडिकेट विशेषज्ञों की जांच टीम बनाने में देरी क्यों कर रही है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सीनेटर रविंदर कहते हैं कि जांच में कई गड़बड़ी पाई गई थी, लेकिन विशेषज्ञों की जांच टीम अब तक नहीं बनाई गई। इस पर यूनिवर्सिटी को काम करना चाहिए, ताकि घपला करने वालों पर कार्रवाई हो सके।