{"_id":"5d3939eb8ebc3e6cc768a678","slug":"sawan-2019-story-behind-khempuri-shiv-mandir-at-chandigarh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सावन 2019: देखिए एक मंदिर, जहां हर रोज कुएं के जल से होता है भगवान भोलेनाथ का अभिषेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावन 2019: देखिए एक मंदिर, जहां हर रोज कुएं के जल से होता है भगवान भोलेनाथ का अभिषेक
Thu, 25 Jul 2019 10:42 AM IST
खुशबू गोयल
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 25 Jul 2019 10:42 AM IST
विज्ञापन
शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सावन के मौके पर हम आपको बता रहे हैं, एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां हर रोज भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कुंए के जल से होता है। चंडीगढ़ में सेक्टर-24 के शिवालय खेमपुरी में प्राचीन कुआं है। मंदिर प्रबंधन ने इसे संरक्षित किया है। इसी कुएं के जल से हर रोज भोले बाबा का जलाभिषेक होता है। कुएं में कोई गंदगी न जाए इसके लिए उसे ऊपर से ढककर रखा गया है।
चारों तरफ जाली भी लगाई गई है, ताकि उसमें ऑक्सीजन जाती रहे। यह जानकारी शिवालय के प्रबंधक गोबिंद हरि ने दी। उन्होंने बताया कि सुबह 5 से 6 बजे तक ब्राह्मणों द्वारा अभिषेक करवाया जाता है। सुबह का जलाभिषेक भक्त करते हैं और शाम को अभिषेक व शृंगार यजमानों की ओर से किया जाता है।
मंदिर में शिवालय के अलावा राम परिवार, श्री लक्ष्मी नारायण, शीतला माता, सरस्वती माता, संतोषी माता की प्रतिमा भी है। मंदिर में प्राचीन त्रिवेणी (बरगद, पीपल और नीम) का पेड़ है। इसकी रोज पूजा होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
चारों तरफ जाली भी लगाई गई है, ताकि उसमें ऑक्सीजन जाती रहे। यह जानकारी शिवालय के प्रबंधक गोबिंद हरि ने दी। उन्होंने बताया कि सुबह 5 से 6 बजे तक ब्राह्मणों द्वारा अभिषेक करवाया जाता है। सुबह का जलाभिषेक भक्त करते हैं और शाम को अभिषेक व शृंगार यजमानों की ओर से किया जाता है।
विज्ञापन
मंदिर में शिवालय के अलावा राम परिवार, श्री लक्ष्मी नारायण, शीतला माता, सरस्वती माता, संतोषी माता की प्रतिमा भी है। मंदिर में प्राचीन त्रिवेणी (बरगद, पीपल और नीम) का पेड़ है। इसकी रोज पूजा होती है।
विज्ञापन
स्वयंभू शिवलिंग हैं इस शिवालय में
शिवालय खेमपुरी के शिवलिंग स्वयंभू हैं। यह बहुत प्राचीन मंदिर है। कभी यह कैलड़ गांव होता था। चंडीगढ़ के बसने से पहले यहां पर शिवालय था। काफी संख्या में भक्त दूर-दूर से जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। शाम को रुद्राभिषेक और भव्य शृंगार होता है।
मंदिर परिसर और बाहर लगे हैं बेल के पौधे
गोबिंद हरि के अनुसार कुएं का पानी पूरी तरह से शुद्ध है। हर साल कुएं के जल को जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। रोज कुएं की पूजा होती है। भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए कोई सामान लाने की जरूरत नहीं पड़ती। मंदिर परिसर और उसके बाहर बेल के पौधे लगाए गए हैं। मंदिर में बाबा रामदास की समाधि है। बाबा रामदास ने 4 दिसंबर, 1959 को समाधि ली थी।
मंदिर परिसर और बाहर लगे हैं बेल के पौधे
गोबिंद हरि के अनुसार कुएं का पानी पूरी तरह से शुद्ध है। हर साल कुएं के जल को जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। रोज कुएं की पूजा होती है। भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए कोई सामान लाने की जरूरत नहीं पड़ती। मंदिर परिसर और उसके बाहर बेल के पौधे लगाए गए हैं। मंदिर में बाबा रामदास की समाधि है। बाबा रामदास ने 4 दिसंबर, 1959 को समाधि ली थी।