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पंजाब का ऐलान, SYL के लिए हरियाणा से ली राशि वापिस करेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Mar 2016 01:00 PM IST
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प्रकाश सिंह बादल, पंजाब सीएम
- फोटो : amar ujala
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सतलुज यमुना लिंक नहर के मुद्दे पर पंजाब सरकार का बेहद अहम फैसलज्ञ। नहर के लिए हरियाणा से ली गई पूरी राशि उसे लौटाई जाएगी। एसवाईएल की जमीन किसानों को लौटाने संबंधी बिल के बाद सरकार का यह दूसरा अहम फैसला है। मंगलवार शाम को हुई कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई। सीएम प्रकाश सिंह बादल की प्रधानगी में हुई मीटिंग में हरियाणा को नदियों का एक बूंद पानी न देने की वचनबद्धता दोहराई गई।
कैबिनेट ने माना कि पानी पंजाब की जीवन रेखा है, इसे बांटे जाने का सवाल ही नहीं होता। नदी जल पर पंजाब किसी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगा। कैबिनेट ने नई एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दी है। इसके तहत 5440 करोड़ प्राप्त होने की संभावना है, जोकि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चार सौ करोड़ ज्यादा हैं। 2016-17 के लिए ठेकों की अलॉटमेंट पारदर्शी ढंग से कराई जाएगी। लाइसेंस धारकों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए शराब का अधिकतम मूल्य भी निश्चित किया गया है।
शराब की दरें ठेके के बाहर लिखी जाएंगी। कोई भी लाइसेंस धारक ज्यादा नहीं वसूल कर सकेगा। उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगेगा। मैरिज पैलेसों में समागमों में परोसी जाने वाली शराब की भी कीमतें निर्धारित की गई हैं। परमिट जारी करने के मौके पर यह विभागीय अधिकारियों से प्राप्त की जा सकती हैं। परमिट लेने के बाद जिले के किसी भी ठेके से शराब ली जा सकती है। नई नीति में ग्रुपों का आकार घटाया गया है। पिछले साल 226 ग्रुपों के मुकाबले अब 600-700 ग्रुप होंगे।
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परचून ठेकों की संख्या 6400 ही रखी गई है। देसी शराब का कोटा 9.80 करोड़ प्रूफ लीटर से बढ़ाकर 10.30 करोड़ प्रूफ लीटर कर दिया गया है। आईएमएफएल का कोटा 4.50 करोड़ प्रूफ लीटर से बढ़ा कर 4.75 करोड़ प्रूफ लीटर किया गया है। बियर का कोटा 312 लाख बल्क लीटर से बढ़ा कर 330 लाख बल्क लीटर किया गया है। डिब्बा बंद बियर पर आयात ड्यूटी खत्म कर दी गई है। मुख्य शहरों में मॉडल शॉप स्थापित की जाएंगी। थोक विक्रेता परचून बिक्री न करें, इसके लिए कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
देश में बनी शराब के कुल कोटे पर अतिरिक्त लाइसेंस फीस 23 रुपये प्रति प्रूफ लीटर से बढ़ा कर 29 रुपये कर दी गई है। जिससे शिक्षा, खेल व सभ्याचारक गतिविधियों के लिए तीन सौ करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। राज्य में निजी प्रबंधों अधीन सहायता प्राप्त कॉलेजों को 95 फीसदी ग्रांट-इन-एड देने संबंधी कानूनी समस्याओं के हल को बिल पेश करने के लिए कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। राज्य सरकार 136 निजी कॉलेजों को ग्रांट-इन-एड देती है, कुछ कॉलेज प्रबंधकों ने केस कर दिए हैं।
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कैबिनेट ने माना कि पानी पंजाब की जीवन रेखा है, इसे बांटे जाने का सवाल ही नहीं होता। नदी जल पर पंजाब किसी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगा। कैबिनेट ने नई एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दी है। इसके तहत 5440 करोड़ प्राप्त होने की संभावना है, जोकि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चार सौ करोड़ ज्यादा हैं। 2016-17 के लिए ठेकों की अलॉटमेंट पारदर्शी ढंग से कराई जाएगी। लाइसेंस धारकों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए शराब का अधिकतम मूल्य भी निश्चित किया गया है।
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शराब की दरें ठेके के बाहर लिखी जाएंगी। कोई भी लाइसेंस धारक ज्यादा नहीं वसूल कर सकेगा। उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगेगा। मैरिज पैलेसों में समागमों में परोसी जाने वाली शराब की भी कीमतें निर्धारित की गई हैं। परमिट जारी करने के मौके पर यह विभागीय अधिकारियों से प्राप्त की जा सकती हैं। परमिट लेने के बाद जिले के किसी भी ठेके से शराब ली जा सकती है। नई नीति में ग्रुपों का आकार घटाया गया है। पिछले साल 226 ग्रुपों के मुकाबले अब 600-700 ग्रुप होंगे।
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परचून ठेकों की संख्या 6400 ही रखी गई है। देसी शराब का कोटा 9.80 करोड़ प्रूफ लीटर से बढ़ाकर 10.30 करोड़ प्रूफ लीटर कर दिया गया है। आईएमएफएल का कोटा 4.50 करोड़ प्रूफ लीटर से बढ़ा कर 4.75 करोड़ प्रूफ लीटर किया गया है। बियर का कोटा 312 लाख बल्क लीटर से बढ़ा कर 330 लाख बल्क लीटर किया गया है। डिब्बा बंद बियर पर आयात ड्यूटी खत्म कर दी गई है। मुख्य शहरों में मॉडल शॉप स्थापित की जाएंगी। थोक विक्रेता परचून बिक्री न करें, इसके लिए कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
देश में बनी शराब के कुल कोटे पर अतिरिक्त लाइसेंस फीस 23 रुपये प्रति प्रूफ लीटर से बढ़ा कर 29 रुपये कर दी गई है। जिससे शिक्षा, खेल व सभ्याचारक गतिविधियों के लिए तीन सौ करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। राज्य में निजी प्रबंधों अधीन सहायता प्राप्त कॉलेजों को 95 फीसदी ग्रांट-इन-एड देने संबंधी कानूनी समस्याओं के हल को बिल पेश करने के लिए कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। राज्य सरकार 136 निजी कॉलेजों को ग्रांट-इन-एड देती है, कुछ कॉलेज प्रबंधकों ने केस कर दिए हैं।