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पीयू का नाम रोशन करने वाले वैज्ञानिकों को सम्मान भी दें ‘सरकार’
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चंडीगढ़। पीयू का नाम दुनियाभर में रोशन करने वाले वैज्ञानिकों ने अपना दर्द बुधवार को बयां किया। मौका था पीयू वीसी के साथ चाय पार्टी का।
दो घंटे चली इस पार्टी में वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्हें सम्मान भी चाहिए। वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने तो अपना काम पूरा कर दिया, लेकिन युवा वैज्ञानिक और तेजी से काम करें, इसके लिए सम्मान बहुत जरूरी है। उन्हें विशेष ग्रांट शोध के लिए दें। साथ ही संसाधनों की पूर्ति करें। यह भी कहा है कि विश्व रैंकिंग में छाए वैज्ञानिकों को अपने-अपने शिक्षण संस्थान सम्मान दे रहे हैं, लेकिन यहां इस जैसी कोई बात नहीं की गई। वैज्ञानिक अपना कार्य कर रहे हैं, लेकिन संस्थान को उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
विशेष रिसर्च बजट की व्यवस्था होगी : वीसी
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी यूएसए ने हाल ही में वैज्ञानिकों की विश्व रैंकिंग जारी की थी। इसमें पीयू के 24 से अधिक वैज्ञानिक शामिल हुए हैं। इन सभी से पीयू वीसी प्रो. राज कुमार ने मुख्य गेस्ट हाउस में मुलाकात की। सभी वैज्ञानिकों को उन्होंने बधाई देते कहा कि विशेष रिसर्च बजट की व्यवस्था की जाएगी। बीएचयू का बजट 700 करोड़ से अधिक का है। साथ ही वहां पर्याप्त संसाधन हैं और किसी चीज की कमी नहीं है। पीयू के पास बजट 250 करोड़ है, इसके बावजूद यहां के वैज्ञानिकों ने विश्व रैंकिंग में कमाल कर दिया। ये सभी बधाई के पात्र हैं।
दो घंटे की मुलाकात में वैज्ञानिकों को नहीं मिला कुछ खास
वीसी ने वैज्ञानिकों से कहा कि ऐसे रिसर्च सामने आने चाहिए जिससे कुछ उत्पाद बनें या समाज को सीधा लाभ मिले। इस पर वैज्ञानिकों ने अपनी बात रखी। कहा, शोध का त्वरित लाभ नहीं ढूंढा जाना चाहिए, उसका प्रभाव आगे तक देखा जाना चाहिए। फिजिक्स, एंथ्रोपोलॉजी, कला आदि संकायों में होने वाले शोध का अपना अलग महत्व है जो आगे भी काम आता है। बात जब पुरस्कार की शुरू हुई तो वीसी ने कहा कि इसके लिए प्रस्ताव बनाकर दिया जाए ताकि इस पर काम किया जा सके। कुछ वैज्ञानिकों ने बताया कि दो घंटे की मुलाकात में कुछ नया ज्ञान या कोई नई चीज निकलकर सामने आनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया। उनका तर्क है कि दो घंटे एक वैज्ञानिक के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
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दो घंटे चली इस पार्टी में वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्हें सम्मान भी चाहिए। वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने तो अपना काम पूरा कर दिया, लेकिन युवा वैज्ञानिक और तेजी से काम करें, इसके लिए सम्मान बहुत जरूरी है। उन्हें विशेष ग्रांट शोध के लिए दें। साथ ही संसाधनों की पूर्ति करें। यह भी कहा है कि विश्व रैंकिंग में छाए वैज्ञानिकों को अपने-अपने शिक्षण संस्थान सम्मान दे रहे हैं, लेकिन यहां इस जैसी कोई बात नहीं की गई। वैज्ञानिक अपना कार्य कर रहे हैं, लेकिन संस्थान को उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
विशेष रिसर्च बजट की व्यवस्था होगी : वीसी
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी यूएसए ने हाल ही में वैज्ञानिकों की विश्व रैंकिंग जारी की थी। इसमें पीयू के 24 से अधिक वैज्ञानिक शामिल हुए हैं। इन सभी से पीयू वीसी प्रो. राज कुमार ने मुख्य गेस्ट हाउस में मुलाकात की। सभी वैज्ञानिकों को उन्होंने बधाई देते कहा कि विशेष रिसर्च बजट की व्यवस्था की जाएगी। बीएचयू का बजट 700 करोड़ से अधिक का है। साथ ही वहां पर्याप्त संसाधन हैं और किसी चीज की कमी नहीं है। पीयू के पास बजट 250 करोड़ है, इसके बावजूद यहां के वैज्ञानिकों ने विश्व रैंकिंग में कमाल कर दिया। ये सभी बधाई के पात्र हैं।
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दो घंटे की मुलाकात में वैज्ञानिकों को नहीं मिला कुछ खास
वीसी ने वैज्ञानिकों से कहा कि ऐसे रिसर्च सामने आने चाहिए जिससे कुछ उत्पाद बनें या समाज को सीधा लाभ मिले। इस पर वैज्ञानिकों ने अपनी बात रखी। कहा, शोध का त्वरित लाभ नहीं ढूंढा जाना चाहिए, उसका प्रभाव आगे तक देखा जाना चाहिए। फिजिक्स, एंथ्रोपोलॉजी, कला आदि संकायों में होने वाले शोध का अपना अलग महत्व है जो आगे भी काम आता है। बात जब पुरस्कार की शुरू हुई तो वीसी ने कहा कि इसके लिए प्रस्ताव बनाकर दिया जाए ताकि इस पर काम किया जा सके। कुछ वैज्ञानिकों ने बताया कि दो घंटे की मुलाकात में कुछ नया ज्ञान या कोई नई चीज निकलकर सामने आनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया। उनका तर्क है कि दो घंटे एक वैज्ञानिक के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
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