विलुप्त नहीं, जल्द बहती दिखेगी सरस्वती नदी, 200 किमी तक होगा प्रवाह, हरियाणा-हिमाचल में बनेंगे दो डैम
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भारत की पौराणिक सभ्यता की प्रतीक सरस्वती नदी का पुर्नउद्धार होगा। सरस्वती नदी का दो सौ किलोमीटर तक विकास किया जाएगा। इसके लिए हरियाणा और हिमाचल में डैम और बैराज बनाकर पानी जमा किया जाएगा। जल्द ही तकनीकी विभाग इसे हरी झंडी दे देगा और सरस्वती नदी फिर से कलकल करते हुए बहेगी। यह बात केंद्रीय जल शक्तिमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कही। वे सरस्वती उद्गम स्थल पर पूजन करने पहुंचे थे। उनके साथ केंद्रीय जलशक्ति एवं सामाजिक न्यायिक राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया भी रहे।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे भारत की प्राचीन संस्कृति से जुड़ी सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने की परियोजना पर बेहतर तालमेल से कार्य करें। उन्होंने हरियाणा सरस्वती विकास बोर्ड और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे 31 मार्च 2021 तक इस परियोजना की टेक्नीकल ड्राइंग तैयार करें।
यहां उन्होंने सरस्वती उद्गम स्थल पर पूजा की। इससे पहले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को बिलासपुर विश्राम गृह में गार्ड ऑफ ऑनर से सलामी दी गई। इसके बाद सरस्वती उद्गगम स्थल व सरस्वती सरोवर के किनारे पूजा कर 421 नदियों का जल सरस्वती नदी में प्रवाहित किया। उसके पश्चात केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय मंत्री रतन लाल कटारिया, शिक्षा मंत्री कंवर पाल, विधायक धन श्याम दास अरोड़ा, नाहन विधायक राजीव बिंदल ने पौधा रोपण किया।
मंत्री शेखावत ने कहा कि दोनों प्रदेशों के एओयू होना शेष है। साथ में डैम व बैराज की तकनीकी चित्रण बाकी है। जिसके लिए मार्च 2021 तक का समय निर्धारित किया गया है सीडब्लूसी तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी व दोनों प्रदेश अपने एमओयू क्लीयर होने पर पूरे प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू करेंगे।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण ने भी कार्य कर सरस्वती की प्रमाणिकता की बात कही है। भारत की पौराणिक सभ्यत ही विकास का आधार है। सिंधु और सरस्वती सभ्यता पूरे विश्व में भारतीय सभ्यता के रूप में जानी जाती है। हरियाणा सरकार सरस्वती नदी के उद्धार पर कार्य कर रही है। जल्द ही दो बांध व बैराज बना जाएंगे। इससे दो सौ किलोमीटर तक नदी का प्रवाह शुरू हो जाएगा।
भू विज्ञान के प्रमाण है कि सरस्वती नदी का प्रवाह कच्छ था। जोधपुर, जसलमेर में भी सरस्वती पर शोध हुआ है। भू-गर्भ के जल से सरस्वती नदी का पानी आज भी लोग निकाल कर उपयोग में ले रहे हैं।
केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाले हर सहयोग में दोनों राज्यों के अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे। नदी के लिए हिमाचल प्रदेश क्षेत्र से 20 क्यूसेक जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और इसके लिए काठगढ़ क्षेत्र में 400 एकड़ पंचायती भूमि पर जल भंडारण परियोजना भी तैयार की जा रही है।