{"_id":"ebfce9752d3c86362171a5b500754b76","slug":"sant-daduwal-resign-uncertaintiy-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संत दादूवाल के इस्तीफे को लेकर असमंजस ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संत दादूवाल के इस्तीफे को लेकर असमंजस
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Sun, 31 Aug 2014 10:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के नामजद सदस्य संत बलजीत सिंह दादूवाल के इस्तीफा को लेकर असमंजस बना हुआ है। रविवार को लगातार दूसरे दिन भी उनके पद से इस्तीफे देने के संदर्भ में कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। इस मामले में उनके ससुर बाबा गुरमीत सिंह बरीवाला का कहना है कि वे भी संत दादूवाल से मुलाकात करने के बाद ही कुछ कह सकते है।
सिख प्रचारक संत बलजीत सिंह दादूवाल ने हरियाणा में एचएसजीएमसी का गठन करवाने से लेकर वहां के गुरुद्वारा साहिबों की सेवा संभालने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी भूमिका को लेकर खुद संत दादूवाल ने 14 अगस्त को ही पंजाब में अपनी गिरफ्तारी की आशंका जता दी थी और फरीदकोट की जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी। इस याचिका में संत दादूवाल ने अदालत से कहा था कि फरीदकोट पुलिस उन्हें 5 साल पुराने एक आपराधिक मामले में दोबारा गिरफ्तार करना चाहती है।
इस याचिका पर 22 अगस्त को सुनवाई होनी थी लेकिन उसी दिन फरीदकोट पुलिस ने संत दादूवाल और उनके दो साथियों को भारी मात्रा में अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार करने का दावा कर दिया। साथ ही थाना बाजाखाना से संबंधित पांच साल पुराने केस में भी उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया। यहां पर दो दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत ने संत दादूवाल को जेल भेज दिया गया। लेकिन 4 दिनों के बाद ही 28 अगस्त को मानसा पुलिस उन्हें तीन साल पुराने आपराधिक केस में पूछताछ के लिए ले गई। वहां पर दो दिन के रिमांड के बाद 30 अगस्त शनिवार को उन्हें वापस फरीदकोट जेल लाया गया।
विज्ञापन
प्रेस विज्ञप्ति ने मचाई खलबली
संत बलजीत सिंह दादूवाल के 30 अगस्त शनिवार शाम फरीदकोट जेल में लौटते ही उनके हस्ताक्षर वाली एक प्रेस विज्ञप्ति ने खलबली मचा दी। इस विज्ञप्ति में न सिर्फ उन्होंने एचएसजीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा देने की बात कही है बल्कि एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा पर कांग्रेस के हाथों की कठपुतली बनने का आरोप लगाया है। हालांकि इस प्रेस विज्ञप्ति की प्रामाणिकता पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि यदि संत दादूवाल ने इस्तीफा ही देना था तो वे अपने किसी रिश्तेदार के माध्यम से मीडिया से संपर्क साध सकते थे। उनके ससुर बाबा गुरमीत सिंह बरीवाला को भी इस विज्ञप्ति पर कोई भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि शनिवार दोपहर 12 बजे तक वह मानसा में उनके साथ थे और इस समय के दौरान संत दादूवाल ने अपने इस्तीफे के संदर्भ में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी।
विज्ञापन
सिख प्रचारक संत बलजीत सिंह दादूवाल ने हरियाणा में एचएसजीएमसी का गठन करवाने से लेकर वहां के गुरुद्वारा साहिबों की सेवा संभालने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी भूमिका को लेकर खुद संत दादूवाल ने 14 अगस्त को ही पंजाब में अपनी गिरफ्तारी की आशंका जता दी थी और फरीदकोट की जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी। इस याचिका में संत दादूवाल ने अदालत से कहा था कि फरीदकोट पुलिस उन्हें 5 साल पुराने एक आपराधिक मामले में दोबारा गिरफ्तार करना चाहती है।
विज्ञापन
इस याचिका पर 22 अगस्त को सुनवाई होनी थी लेकिन उसी दिन फरीदकोट पुलिस ने संत दादूवाल और उनके दो साथियों को भारी मात्रा में अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार करने का दावा कर दिया। साथ ही थाना बाजाखाना से संबंधित पांच साल पुराने केस में भी उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया। यहां पर दो दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत ने संत दादूवाल को जेल भेज दिया गया। लेकिन 4 दिनों के बाद ही 28 अगस्त को मानसा पुलिस उन्हें तीन साल पुराने आपराधिक केस में पूछताछ के लिए ले गई। वहां पर दो दिन के रिमांड के बाद 30 अगस्त शनिवार को उन्हें वापस फरीदकोट जेल लाया गया।
विज्ञापन
प्रेस विज्ञप्ति ने मचाई खलबली
संत बलजीत सिंह दादूवाल के 30 अगस्त शनिवार शाम फरीदकोट जेल में लौटते ही उनके हस्ताक्षर वाली एक प्रेस विज्ञप्ति ने खलबली मचा दी। इस विज्ञप्ति में न सिर्फ उन्होंने एचएसजीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा देने की बात कही है बल्कि एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा पर कांग्रेस के हाथों की कठपुतली बनने का आरोप लगाया है। हालांकि इस प्रेस विज्ञप्ति की प्रामाणिकता पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि यदि संत दादूवाल ने इस्तीफा ही देना था तो वे अपने किसी रिश्तेदार के माध्यम से मीडिया से संपर्क साध सकते थे। उनके ससुर बाबा गुरमीत सिंह बरीवाला को भी इस विज्ञप्ति पर कोई भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि शनिवार दोपहर 12 बजे तक वह मानसा में उनके साथ थे और इस समय के दौरान संत दादूवाल ने अपने इस्तीफे के संदर्भ में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी।